अधिक समय तक रसोई में रहने से खराब हो सकते हैं ये शारीरिक अंग

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 01, 2016

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजिकल रिसर्च (आईआईटीआर) द्वारा लखनऊ में 200 रसोइयों पर किए शोध से पता चला कि जरूरत से ज्यादा समय तक रसोई में रहना महिलाओं की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
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    रसोई में अधिक समय तक रहने के नुकसान

     
    रसोई घर में ज्यादा समय तक रहने से किडनी को नुकसान हो सकता है। यह हम नहीं बल्कि हाल में हुए एक शोध का परिणाम है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजिकल रिसर्च (आईआईटीआर) द्वारा लखनऊ में 200 रसोइयों पर किए शोध से पता चला कि जरूरत से ज्यादा समय तक रसोई में रहना महिलाओं की सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। घरों की रसोई ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े रेस्त्रां की रसोईयों को भी इस शोध में शामिल किया गया।
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    शोध के परिणाम


    शोध में घरेलू रसोई में काम करने वाली महिलाओं के साथ-साथ रेस्त्रां के रसोईयों को भी शामिल किया गया। इस शोध के अंतर्गत रसोई घर के वातावरण का निरीक्षण किया गया। साथ ही ये रसोईये किस अवस्था में काम करते हैं, इस पर भी गौर किया गया।
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    किचन में मौजूद गैस स्टोव


    अध्ययन के दौरान रसोई में मौजूद गैस स्टोव, खिड़कियों और फ्राइंग एरिया के आसपास मौजूद वातावरण के सैंपल लिए गए। वहीं दूसरी ओर अन्य जगहों जैसे वर्किंग डेस्क और अन्य गतिविधियों वाली जगह के सैंपल भी लिए गए। साथ ही अध्ययन में शामिल सभी लोगों के यूरीन का भी विश्लेषण किया गया।
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    चौंकाने वाले परिणाम


    उपरोक्त सभी तथ्यों का विश्लेषण कर जो परिणाम सामने आए हैं, वे वाकई चौकाने वाले हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन रसोईयों में रोज़ाना महिलाएं या होटलों के रसोईये लगातार घंटों काम करते हैं, वहां इतनी देर तक गैस जलने से तापमान लगभग 30 डिग्री तक पहुंच जाता है, जो कि स्वास्थ्य के लिये अच्छी बात नहीं है।
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    पीएम और पीएएच लेवल


    शोध के परिणामों में पाया गया कि इस जगह का पीएम लेवल 71.9 माइक्रॉन क्यूबिक मीटर थ, 2.5 माइक्रॉन आकार वाले तत्व भी रसोई में 81.3 के स्तर पर थे और पीएएच लेवल 3.1 से 17.71 तक था। वहीं शोधकर्ताओं ने रसोई सकिचन में जो पीएएच पाया गया है, वह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इस पीएएच में नेप्थालीन, फ्लोरीन, एसनाफिथीन, फेनाथिरीन, पायरीन, क्रिसीन और इंडेनो पायरीन जैसे तत्वों की मौजूदगी पाई गई। ये सभी सुरक्षित मानक सीमा से अधिक पाए गए।
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