जानें कि क्या सनस्क्रिन भी कर सकता है स्पर्म को प्रभावित

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 16, 2016

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सनस्क्रीन में कैमिकलों के होने की बात भी अकसर आती रही है, लेकिन सनस्क्रीन के उपयोग से जुड़ी ये खबर आपको चौंका सकते हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि सनस्क्रीन लगाने वाले पुरुषों के नपुंसक होने की आशंका काफी बढ़ जाती है।
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    सनस्क्रिन लोशन का स्पर्म पर प्रभाव



    गर्मियों की तेज धूप जला देने वाली होती है और इसकी अल्ट्रावॉयलेट किरणें त्वचा को बेहद नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। ऐसे में लोग घर से बाहर निकलने से पहले, त्वचा के बचाव के लिए सनस्क्रीन का विकल्प ज्यादा चुनने लगे हैं। सनस्क्रीन लोशन का इस्तेमाल करने वालों में स्त्री व पुरुष दोनों ही शामिल हैं। सनस्क्रीन में कैमिकलों के होने की बात भी अकसर आती रही है, लेकिन सनस्क्रीन के उपयोग से जुड़ी ये खबर आपको चौंका सकते हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि सनस्क्रीन लगाने वाले पुरुषों के नपुंसक होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। चलिए विस्तार से जानें कि माजरा क्या है।
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    क्या कहता है अध्ययन


    एक अध्ययन में पाया गया कि सनस्क्रीन लोशन लगाने वाले पुरुषों के नपुंसक होने की आशंका बढ़ जाती है। क्योंकि यूवी किरणों के प्रभाव को कम करने के इस प्रकार के लोशन में जो रसायनिक तत्वों इस्तेमाल किए जाते हैं वे शुक्राणुओं को नष्ट कर सकते हैं या फिर इनके कारण उनकी क्रियाशीलता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा सनस्क्रीन लोशन में इस्तेमाल किए गए कई उत्पाद महिलाओं के हॉर्मोन प्रोजेस्टेरॉन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं, जिससे शुक्राणुओं की क्रियाशीलता नाकारात्मक रूप से प्रभावित होती है। ये तत्व स्पर्म सेल्स की सामान्य क्रिया को भी बाधित करते हैं।
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    क्या है एक्पर्ट्स की राय


    एक्पर्ट्स के अनुसार जब हम सनस्क्रीन लगाते हैं तो हमारी त्वचा द्वारा इसे सोख लिया जाता है और फिर ये हमारी रक्त धारा में प्रवेश कर जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के नील्स शाक्केबीक और उनकी टीम ने स्वस्थ सीमन पर सनस्क्रीन के प्रभाव की जांच की और कई तरह के सनस्क्रीन का परीक्षण भी किया। ज्यादातर परिणामों में स्पर्म की सामान्य प्रक्रिया प्रभावित नजर आई। नील्स के मुताबिक, इस शोध से आए परिणाम वास्तव में परेशान करने वाले हैं और संभव है कि भविष्य में इससे नपुंसकता और उसके कारणों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल पाए। शोधकर्ताओं का कहना है कि शुक्राणुओं का सही फंक्शन आवश्यक है लेकिन सनस्क्रीन में मौजूद तत्व इसे प्रभावित कर सकते हैं।  
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    अपनाए जा सकते हैं सुरक्षित विकल्प


    बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त सनस्क्रीन लोशन की जगह आप घर पर बने सनस्‍क्रीन लोशन का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। घर पर बने सनस्क्रीन आपको कई तरह के नुकसान से बचाते हैं और ये सुरक्षित भी होते हैं। आप इसके लिए तिल के तेल और एवाकाडो तेल को भी त्वचा को सूरज की धूप से बचाने के लिए सनस्क्रिन की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। नारियल की तेल भी इसका एक अच्छा विकल्प है।
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