नींद से जुड़ी इन समस्‍याओं के बारे में कोई नहीं करता बात

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 24, 2015

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नींद से जुड़ी कुछ समस्‍याये जैसे रात में बार-बार नींद खुलना, खर्राटे, दांत भींचकर सोना, सोने का गलत तरीका आदि के बारे में लोग बिल्‍कुल बात नहीं करना चाहते। इसलिए इन समस्‍याओं के बारे में हमें जानकारी नहीं मिल जाते। तो आइए हम आपको बताते हैं, नींद से जुड़ी कुछ ऐसी ही समस्‍याओं के बारे में।
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    सेहतमंद है भरपूर नींद लेना

    यूं तो अच्‍छी नींद, भरपूर नींद, सुकून वाली नींद, इतना ही नहीं सेहतमंद नींद आदि शब्‍द ऐसे हैं जो अगर आपसे जुड़े हैं यानी आप इस तरह की नींद लेते हैं तो आपको सोने में कोई समस्‍या नहीं है। लेकिन नींद से जुड़ी कुछ बातें ऐसी भी हैं जिनके बारे में लोग बिलकुल भी बात नहीं करना चाहते। रात में बार-बार नींद खुलना, खर्राटे, दांत भींचकर सोना, सोने का गलत तरीका आदि इसमें शामिल है। तो आइए हम आपको बताते हैं नींद से जुड़ी उन बातों के बारे में जिनके बारे में लोग बिलकुल भी बात नहीं करते।
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    दांत पीसना

    बहुत से लोग नींद में इतनी जोर से दांत पीसते हैं कि पास सोया व्यक्ति भी जाग जाता है। और ज्‍यादातर मौकों पर दांत पीसने वाला व्‍यक्ति इससे अनजान रहते हैं। लेकिन, आपकी यह आदत आपके साथी की नींद खराब कर सकती है। दांतों को पीसने को चिकित्‍सीय भाषा में ब्रक्सिजम कहा जाता है। और इसके कारणों को लेकर बहस होती रहती है। लेकिन चिंता और तनाव इसका अहम कारण है। लेकिन, भंग दांत या दांत न होना भी इसके पीछे की वजह माना जा सकता है।
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    दांत पीसने की समस्‍या से बचाव

    शराब, सिगरेट और अधिक चाय व कॉफी के सेवन से भी यह समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए अपना लाइफस्‍टाइल बदलें, जिसमें कॉफी, कैफीन और अल्‍कोहल का सेवन न करना शमिल करें। नींद में श्वास अवरुद्ध होना भी इसका कारण है। तनाव, चिंता एवं निद्रा में सांस अवरुद्ध होने की स्थिति में अपने डाक्टर से सम्पर्क करें। साथ ही तनाव को दूर करने के लिए ध्‍यान और व्‍यायाम करें।
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    बॉडी क्लॉक का बंद होना

    बॉडी क्लॉक कुछ अनोखी कोशिकाओं का छोटा समूह है, जिसे बॉडी क्लॉक जीन्स कहते हैं। ये कोशिकाएं अलग-अलग समय पर सक्रिय होती हैं, साथ ही शरीर के विभिन्न हिस्सों को निर्देश भी देती हैं कि उन्हें कब काम करना है और कब नहीं। इस तरह बॉडी क्लॉक हमें रात को सोने और सुबह जागने के बारे में भी बताती है। जो इस फॉर्मूले को अपनाते हैं, वे ज्यादा सेहतमंद रहते हैं और खुश भी। लेकिन अपनी बॉडी क्‍लॉक की बात न सुनने पर और देर से सोने और उठने पर यह काम करना बंद कर देती है।
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    बॉडी क्लॉक को ऑन करने के उपाय

    अच्छी नींद की शुरुआत दरअसल सुबह से ही हो जाती है। जिस क्षण आंखें खुलती हैं और रोशनी आंखों के पीछे की नसों तक पहुंचती है, बॉडी क्लॉक ऑन हो जाती है और मस्तिष्क से तरह-तरह के हार्मोन का स्राव शुरू हो जाता है। सूरज की रोशनी मस्तिष्क को सक्रिय करती है। इसी से बॉडी क्लॉक व शरीर के बीच तालमेल स्थापित होता है। सप्ताह के आखिरी दिनों में देर रात तक जगना और सुबह देर तक सोना हमें बहुत अच्‍छा लगता है लेकिन खुद को यह छोटा-सा उपहार देना बॉडी क्लॉक के साथ अन्‍याय करने जैसा है। इससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है।
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    टांगों में ऐंठन

    कई लोगों को रात में सोते समय टांगों में ऐंठन की समस्या होती है। नस पर नस चढ़ जाती है। कई लोगों को टांगों और पिंडलियों में मीठा-मीठा सा दर्द भी महसूस होता है। पैरों में दर्द के साथ ही जलन, सुन्न, झनझनाहट या सुई चुभने जैसा एहसास होता है। कई बार टांगों में नसें फड़कती हैं। ऐसे व्यक्ति की टांगों में छटपटाहट होती है, जिस कारण वह अच्छी नींद नहीं ले पाता।
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    टांगों में ऐंठन से बचाव

    इस समस्‍या से बचने के लिए रात को सोते समय अपने पैरों को ऊंचाई पर रखें। प्रभाव वाले स्थान पर बर्फ की ठंडी सिकाई करें। सिकाई 15 मिनट, दिन में 3-4 बार करें। गर्म-ठंडी सिकाई 3 से 5 मिनट करने से (दोनों तरह की बदल-2 कर) समस्या और दर्द-दोनों से राहत मिलती है। इसके अलावा धीरे-धीरे ऐंठन वाली मसल्‍स, तंतुओं पर खिंचाव दें और आहिस्ता से मालिश करें।
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    नींद में चलना

    नींद में चलना यानी स्लीपवाकिंग एक विचित्र प्रकार की गंभीर मनोवैज्ञानिक बीमारी है जो कि कुछ ही लोगों में पायी जाती है। जिसे स्लीपिंग डिसऑर्डर भी कहते है। यह एक विचित्र बीमारी है जो कि स्नायुविक गड़बड़ी से होती है। इस रोग में रोगी नींद में ही चलने लगता है। इस बीमारी से ग्रसित रोगी रात में नींद से उठकर अपने बिस्तर से चलता है और एक जागे हुए इंसान की तरह विभिन्न कार्य को आसानी से कर लेता है। उसे पता ही नहीं चलता कि वो रात को क्या कर रहा था। जब रोगी ऐसा कर रहा होता है तब वे अर्धजागृत अवस्था में होता है, लेकिन फिर से सो जाने के बाद जब वह सुबह जागता है तो उसे अपने द्वारा नींद में किए गए काम के बारे में कुछ भी याद नहीं रहता।
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    नींद में चलना से बचाव

    इस अवस्था में इंसान अपने आप से पूरी तरह बेखबर होता है। इसलिए ऐसे लोगों के साथ दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है। इसलिए ऐसे मरीजों की सुरक्षा का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए। अगर किसी को यह समस्या हो तो उसके बेडरूम के डोर नॉब के साथ एक ऑटोमेटिक अलार्म फिट करना चाहिए, ताकी जब वह व्यक्ति दरवाजा खोलने की कोशिश करे तो अलार्म बज उठे। इससे संभावित दुर्घटना को टालना आसान हो जाएगा। अक्सर नींद में चलने वाले लोग घर में रखी चीजों से टकरा जाते हैं इसलिए उन्हें इस बात का विशेष ध्यान रखिए कि घर में बाहर निकली हुई कोई नुकीली वस्तु न हो जिससे टकरा कर वे घायल हो जाएं।
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