गर्भावस्‍था के दौरान आपकी त्‍वचा में होते हैं कई बदलाव

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 17, 2014

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गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोन में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव होता है। महिला हार्मोन का स्‍तर जैसे एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन, मेलानोसाईट उत्तेजक हार्मोन और अन्य हार्मोन में वृद्धि के कारण त्‍वचा में परिवर्तन आने लगता है।
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    गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल बदलाव

    गर्भावस्था के दौरान शरीर में हार्मोन में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव होता है। महिला हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन, प्रोजेस्ट्रोन, मेलानोसाईट उत्तेजक हार्मोन (एम एस एच से त्वचा में की झाइयों बढ़ जाती है) और अन्य हार्मोन के स्‍तर में वृद्धि होने लगती है। इसके अलावा, बढ़े हुए वजन के कारण त्‍वचा में स्‍ट्रेच मार्क्‍स भी आ जाते है। यह मुख्य रूप से पेट के क्षेत्र में, लेकिन हाथ और पैर पर भी देखने को मिलते है।
    Image Courtesy : Getty Images

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    गर्भावस्था के दौरान त्‍वचा में परिवर्तन

    इसके अलावा, पेट में बच्‍चे के दबाव के कारण रक्‍त पैरों में इकट्ठा हो जाता है। इन सभी कारकों के परिणामस्‍वरूप त्‍वचा में कई प्रकार के बदलाव आते है। ये त्‍वचा में आने वाले परिवर्तन अस्‍थायी और कॉस्‍मेटिक होते हैं। ऐसे में इन सबसे ज्यादा परेशान न हो क्योंकि वक्त के साथ ये समस्यायें काफी हद तक ठीक हो जाती हैं और आमतौर पर डिलीवरी के बाद स्‍वयं ही दूर हो जाती है।
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    स्‍ट्रेच मार्क्स

    गर्भावस्‍था के दौरान अधिकांश महिलाओं के पेट पर स्‍ट्रेच मार्क्‍स हो जाते हैं। कुछ महिलाओं के तो स्‍तनों, कमर और नितंबों पर भी स्‍ट्रेच मार्क्‍स देखने को मिलते है। पेट या शरीर के निचले भाग पर स्‍ट्रेच मार्क्‍स के निशान बच्‍चे के बढ़ने के साथ दिखाई देने लगते हैं। स्‍तनों पर यह मार्क्‍स स्‍तनपान के लिए तैयार स्‍तनों के बढ़ने पर दिखाई देते हैं।
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    स्‍ट्रेच मार्क्स से बचाव

    गर्भावस्‍था के दौरान, स्‍ट्रेच के निशान लाल, भूरे या यहां तक कि बैंगनी भी दिखाई दे सकते हैं। डिलीवरी के बाद यह निशान हल्‍के हो जाते है, लेकिन पूरी तरह से गायब नहीं होते हैं। कई लोशन और तेल स्‍ट्रेच मार्क्‍स को कम करने का दावा करते है। हालांकि इन उत्पादों की खुशबू के कारण इनको लगाना आपको अच्छा लग सकता है, लेकिन यह वास्तव में स्‍ट्रेच मार्क्‍स के निशान को नहीं रोक सकते।  
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    झाईयां

    इसे 'मास्‍क ऑफ प्रेग्‍नेंसी' या 'पिग्मेंटेशन' भी कहा जाता है, यह समस्‍या गर्भावस्‍था के दौरान देखी जाने वाली आम समस्‍या है। यह हार्मोनल परिवर्तन दौरान भी यह समस्‍या देखने को मिलती है। खासतौर पर मौखिक हार्मोन लेने वाली महिलाओं को। पिग्मेंटेशन त्वचा की रंगत एक समान न रहना, ऊपरी होठों का रंग गहरा हो जाना, चेहरे, हाथों, पैरों, छाती या शरीर के अन्य अंगों पर काले या गहरे भूरे रंग के धब्बों के रूप में नजर आता है। यूवी जोखिम के साथ हार्मोन के स्तर में बदलाव पिग्मेंटेशन के लिए जिम्मेदार होता हैं।
    Image Courtesy : aocd.org

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    झाईयां से बचाव

    गर्भावस्‍था के दौरान सनस्‍क्रीन का प्रयोग इस समस्या को बढ़ने से रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। इसके लिए बाहर जाने से 30 मिनट पहले स्‍पेक्‍ट्रम सनस्‍क्रीन एसपीएफ 30 या उससे अधिक लगाना चाहिए और हर दो घंटे के बाद इसे फिर से लगाना चाहिए। आहार में गहरे रंग की सब्जियां और फल का अधिक सेवन भी इसमें आपकी मदद कर सकता है। इन खाद्य पदार्थों में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट मुक्‍त कणों के कारण होने वाले त्‍वचा के नुकसान को रोकते है, जो अक्‍सर यूवी प्रदर्शन के दौरान त्‍वचा में उत्‍पन्‍न होती है।
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    लाइन्‍स नाइग्रा

    गर्भावस्‍था के दौरान महिला के पेट के बीच से जघन हड्डी के मध्य तक आने वाली काले रंग की खड़ी रेखा को लाइन्‍स नाइग्रा कहते है। यह 1 सेमी. विस्‍तृत होते है। यह दूसरी तिमाही के आस-पास दिखाई देने लगती है। यह महिला हार्मोन एस्‍ट्रोजन और प्रोजेस्‍ट्रोन और मेलेनिन (त्‍वचा में झाईयां) के बढ़े हुए उत्‍पादन के कारण दिखाई देती है। यह रेखा डिलीवरी के कुछ हफ्तों के बाद अपने आप फीकी पड़ने लगती है।
    Image Courtesy : farm4.staticflickr.com

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    स्‍पाइडर वेन

    गर्भावस्‍था के दौरान, रक्त प्रवाह की वृद्धि की के कारण होते है। हार्मोन के उच्च स्तर के साथ संयुक्त होकर यह त्वचा पर छोटे लाल दाने के रूप में प्रकट होते हैं। यह छोटे लाल दाने वास्तव में त्वचा पर केशिकाओं हैं। यह तरंगित चिह्नों की तरह होने के कारण मकडि़यों की तरह लगते हैं। इसलिए इसे स्‍पाइडर (मकड़ी नस) वेन कहा जाता है। इनकी सौम्‍य वृद्धि होती है और दिखने में थोड़ा बुरा लगने के अलावा, यह किसी भी समस्‍या का कारण नहीं बनती है।   
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    मुंहासे

    पहली तिमाही के दौरान बहुत सी महिलाओं के मुंहासे विकसित होने लगते हैं। त्‍वचा को कोमल रखने वाले तेल को हार्मोंन का उच्‍च स्‍तर सीबम के उत्‍पादन को प्रोत्‍साहित करता है। बहुत अधिक सीबम रोमछिद्रों को अवरूद्ध कर, त्‍वचा में चिकनाई और धब्‍बे का कारण बनता है। इस समस्‍या से बचने के लिए त्‍वचा को नियमित रूप से हल्‍के साबुन और गुनगुने पानी या क्‍लींजर से साफ करें। अगर आपकी त्‍वचा ड्राई है तो ऑयल फ्री मॉश्‍चराइचर का उपयोग करें। अगर आप मेकअप करती है तो सोने से पहले इसे साफ कर लें। मुंहासों की समस्‍या बच्‍चे के जन्‍म के कुछ ही हफ्तों के बाद, स्‍वयं की ठीक हो जाती है।  
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    स्किन टैग

    त्वचा टैग त्वचा की ऊपरी परत में कोशिकाओं के एक अतिरिक्त वृद्धि के कारण होते हैं। यह समस्‍या अक्‍सर आपकी त्‍वचा के ऐसे हिस्‍सों में पाई जाती है जिसमें कपड़े के साथ रगड़ पैदा होती है। जैसे ब्रेस्‍ट के नीचे, गर्दन, कमर, बगल या श्रोणि के आस-पास। यह  गर्भावस्था के दौरान बहुत आम हैं और पूरी तरह से हानिरहित होती हैं। वजन बढ़ने के साथ स्किन टैग होने की आंशका अधिक रहती है। इसलिए गर्भावस्था के कारण वजन बढ़ाने से यह समस्‍या बढ़ सकती है। स्किन टैग की समस्‍या भी आमतौर पर डिलीवरी के बाद स्‍वयं की ठीक हो जाती है।  
    Image Courtesy : 2.bp.blogspot.com

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