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सेक्‍स शिक्षा के लिए क्‍या है सही उम्र

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 13, 2015
देश में लोग आज भी सेक्स शिक्षा के बारे में बात करते कतराते हैं और यौन शिक्षा का नाम आते ही मानो किसी विस्फोट हो जाने जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। लेकिन सेक्स का सही जानकारी प्राप्त करना उतना ही जरूरी है, जितना कि अन्य विषयों की।
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    सेक्स शिक्षा की सही उम्र

    सेक्स शिक्षा को लेकर लंबे समय से बहस चली आ रही है। और इसके साथ कुछ बड़े सवाल हर बार खड़े होते हैं, जैसे यदि सेक्स शिक्षा दी जाए तो किस उम्र के बच्चों को सेक्स शिक्षा देनी चाहिए। यदि नहीं, तो क्यों? ये तमाम सवाल अक्सर सेक्स शिक्षा का नाम आते ही उठ खड़े होते है। देश में लोग आज भी सेक्स शिक्षा के बारे में बात करते कतराते हैं और यौन शिक्षा का नाम आते ही मानो किसी विस्फोट हो जाने जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। तो चलिये सेक्‍स शिक्षा की सही उम्र और इससे जुड़े पहलुओं पर तफ्सील से बात करें।
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    सेक्स शिक्षा की सही उम्र
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    कितनी ज़रूरी है सेक्स शिक्षा

    सेक्स का सही जानकारी प्राप्त करना उतना ही जरूरी है, जितना कि अन्य विषयों की। दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में मेडिकल कॉलेज तक में सेक्स एजुकेशन नहीं दी जाती है। परिणाम हम सेक्स संबंधी अंधविश्वास, भ्रांतियां और इससे जुड़ी कई समस्याएं के रूप में देख सकते हैं। सेक्स सिक्षा न केवल स्कूलों में बल्कि अभिभावकों द्वारा भी दी जानी चाहिये। यहां एक सवाल और उठता है कि सेक्स की सही आयु क्या है? तो शायद सही निर्णय ले पाने योग्य गहो जाना, सेक्स से जुड़ी समस्याओं और फायदों के बारे में पूरी जानकारी और समझ हो जाना व शारीरिक रूप से तैयार हो जाना ही सही समय होना चाहिये।    
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    कितनी ज़रूरी है सेक्स शिक्षा
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    बच्चों के मनोविज्ञान के नज़रिये से

    बच्चे हमेशा से ही अपने भीतर हो रहे और होने वाले परिवर्तनों के प्रति जिज्ञासू रहते हैं। जानने की ये प्रबल इच्छा के चलते वे टीवी, पत्र-पत्रिकाओं और इंटरनेट के माध्यम से आधी-अधुरी जानकारी जुटा कर आपने हिसाब से आंकलन करते हैं और सीख लेते हैं। जोकि बच्चे के मनोविज्ञान के लिए जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में यदि बच्चे को ठीक और सही तरीके से यौन शिक्षा दी जाए तो बच्चे के भटकने की संभावनाएं कम होंगी।
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    बच्चों के मनोविज्ञान के नज़रिये से
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    कम होंगी सेक्स समस्याएं

    कई कुछ बच्चों सेक्स समस्याओं से जूझ रहे होते हैं, लेकिन इस बारे में अपने अभिभावकों को बता पाने में असमर्थ होते हैं। लेकिन स्कूल में यौन शिक्षा होने पर बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ेता है और वह न सिर्फ अपनी समस्याओं के प्रति जागरूक होता है बल्कि सही समय पर अपने अभिभावकों को भी इस बारे में बता पाता है। बच्चों में होने वाले शारीरिक परिवर्त, बदलते हार्मोंस, सेक्स के दौरान रखी जाने वाली सावधानियां आदि के बारे में बताने के साथ-साथ सेक्स शिक्षा के दौरान एचआईवी एड्स संक्रमण और इस तरह के अन्य यौन संक्रमणों के बारे में जानकारी देना भी आवश्यक होता है।    
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    कम होंगी सेक्स समस्याएं
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    कच्ची उम्र में न होगा कौमार्य भंग

    यदि वर्तमान के आंकड़ो पर गौर किया जाए तो यौवनावस्था में शहरों में हर चार में से एक लड़के-लड़कियां अपना कौमार्य भंग कर चुके होते हैं। ऐसी स्थिति में स्कूलों में सेक्स शिक्षा देना और भी जरूरी हो जाता है। जिससे उन्हें सेक्स के संबंध में परिपक्व निर्णय लेने में मदद मिलेगी। बच्चों को सेक्स शिक्षा के दौरान न सिर्फ सेक्स समस्याओं से रूबरू करवाया जा सकता है बल्कि कच्ची  उम्र में सेक्स करने के जोखिमों आदि के बारे में भी बताया जा सकता है।      
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    कच्ची उम्र में न होगा कौमार्य भंग
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    शिक्षा संबंधी सामग्री

    यौन शिक्षा संबंधी सामग्री काफी संतुलित होनी चाहिए (जो कि शोध का विषय है)। न तो इसमें बिल्कुल ही खुलापन हो और न ही इसे बिल्कुल खत्म ही कर दिया जाए। यह कहना कि बच्चों को यौन शिक्षा देने से वे सेक्स के लिये और प्रेरित होंगे, ये एक एकदम बेतरतीब सा तर्क है। यदि बच्चों को यौन शिक्षा नहीं दी जाए तो वे गलत फैसला ले सकते हैं जिससे उनके भविष्य व स्वास्थ्य दोनों पर ही पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।    
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    शिक्षा संबंधी सामग्री
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    किशोरावस्‍था है सही समय

    मात-पिता को सेक्‍स शिक्षा का आधार बनाना चाहिए ताकि वो किशोरावस्‍था में प्रवेश कर रहे अपने बच्‍चों को ठीक तरह से इसका ज्ञान दे सकें। अभिभावको को अपने किशोरों को समझाना चाहिये कि स्‍त्री उपभोग की वस्‍तु नहीं। साथ ही किशोरियों को बच्चियों को भी सही उम्र में सेक्‍स शिक्षा का सही ज्ञान देना चाहिये ताकि वह अपने ही परिवार और दोस्‍तों से होने वाले यौन दुर्व्यवहार को सही समय पर पहचान और रोक सकें।   
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    किशोरावस्‍था है सही समय
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    बड़े भी समझें सेक्स की सही परिभाषा

    काम ऊर्जा मानव की एकमात्र ऊर्जा है जिसे वह समझ व देख-महसूस कर सकता है। इसका सही अर्थ जानना बेहद जरूरी है। लेकिन सेक्‍स को इस कदर गोपनीय व डर का विषय बना दिया गया है कि यह पवित्रता-और अपवित्रता के कटघरे में खड़ा पाया जाता है। धर्म की सही परिभाषा समझेंव  बच्चों को भी सही सिखाएं। अकसर सेक्‍स की सही शिक्षा न होने की वजह से दांपत्‍य जीवन भी कटु होता चला जाता है, जिसके कारण विवाह के बाहर सेक्‍स की तलाश, यौन विकृति व यौन हिंसा आदि में वृद्धि होती है। सही यौन शिक्षा न सिर्फ बच्चों के जीवन को बल्कि, माता-पिता के दांपत्‍य जीवन को सुखी, संतुष्‍ट व विश्‍वसनीय बनाएगा।
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     बड़े भी समझें सेक्स की सही परिभाषा
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