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दुनिया भर में मशहूर हैं सेहत की ये 7 परंपरायें

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 09, 2015
दुनियाभर में कई ऐसी परंपरायें मौजूद हैं जिनको आजमाने से परंपरा का निर्वहन तो होता ही है साथ ही कई सामान्‍य और खतरनाक बीमारियों का भी उपचार होता है।
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    दुनियाभर की परंपरायें

    दुनिया भले ही गोल है, लेकिन पूरी दुनिया की परंपरायें अलग-अलग हैं। एक ही देश में कई तरह के रीति-रिवाज आप देख सकते हैं। पूरी दुनिया में 196 से भी ज्‍यादा देश हैं, और कुछ देशों की परंपरायें ऐसी हैं जिनसे दूसरों को फायदा होता है। कई परंपरायें ऐसी भी हैं जिनसे शरीर को ऊर्जा मिलती है। कुछ परंपरायें अनूठी हैं तो कुछ में समय के साथ बदलाव भी हुआ है। दुनियाभर की इन कल्‍याणकारी परंपराओं के बारे में आप भी जानिये।

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    दुनियाभर की परंपरायें
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    थाइलैंड: आत्‍माओं को छोड़ना

    थाइलैंड में बौद्ध धर्म की मान्‍यता के लोग हैं। गेरुए वस्त्र पहने बौद्ध भिक्षु और सोने, संगमरमर व पत्थर से बने बुद्ध यहां आमतौर पर देखे जा सकते हैं। यहां मंदिर में जाने से पहले अपने कपड़ों का विशेष ध्यान रखें, क्‍योंकि इन जगहों पर छोटे कपड़े पहन कर आना मना है। यहां के लोग जानवरों को छुड़ाने को परंपरा मानते है, जिसका शिकार लोग करके खाने के लिए प्रयोग करते हैं। जब किसी की कोई इच्‍छा पूरी होती है तब वह बाजार से जीवित मछलियों, कछुओं सहित अन्‍य जीवों को खरीदकर इनको तालाब या नदी में छोड़ता है। इनकी जान बचाकर लोगों को सुकून मिलता है, और इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है।

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    थाइलैंड: आत्‍माओं को छोड़ना
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    भारत, इजराइल और थाइलैंड: गरीबों को खिलाना

    दूसरों की जरूरतों को पूरा करने से सुकून तो मिलता है साथ ही किसी जरूरतमंद को उसकी जरूरत की चीज मिल जाती है। अगर कोई भूखा है और उसे आपने खाना खिला दिया तो आपको खुशी मिलेगी साथ ही भूखे का पेट भी भर जायेगा। भारत, थाइलैंड और इजराइल जैसे देशों में लोगों को खाना खिलाना एक परंपरा की तरह है। यहां के लोग बड़े चाव से भूखे लोगों को खाना खिलाते हैं। भारत जैसे देश में भंडारे, लंगर, आदि का भी आयोजन लोगों को मुफ्त में खाना देने के लिए किया जाता है।

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    भारत, इजराइल और थाइलैंड: गरीबों को खिलाना
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    मिश्र, मोरक्‍को और तुर्की: हमाम

    शरीर को साफ रखने से बीमारी नहीं होती है और आप स्‍वस्‍थ रहते हैं। अगर यह परंपरा बन जाये तो क्‍या कहने। मिश्र, मोरक्‍को और तुर्की में हमाम परंपरा है। इसमें 3 तरह के कमरे होते हैं, जिसमें लोग नहाते हैं। पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग कमरे होते हैं। तीन तरह के कमरे इस प्रकार हैं, पहले कमरे में पानी चलता रहता है, दूसरा कमरा गरम होता है और तीसरा कमरा ठंडा होता है। शुरूआत पहले कमरे से करनी होती है जिसमें पूरा शरीर साफ होता है, उसके बाद गरम पानी से शरीर और बालों को साफ कीजिए फिर तीसरे कमरे में जो ठंडा होता हैं वहां आराम करते हैं। यह परंपरा दुनिया के कई देशों के स्‍पा केंद्रों पर भी आजमाई जाती है।

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    मिश्र, मोरक्‍को और तुर्की: हमाम
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    चीन, मिश्र और वियतनाम: जलते प्‍याले की थेरेपी

    यह थेरेपी चीन में बहुत ही प्रसिद्ध है, एलर्जी, कोल्‍ड, सूजन, मांसपेशियों में तनाव, पाचन संबंधी समस्‍या के उपचार के लिए भी यह तकनीक बहुत प्रभावी है। इतनी सारी समस्‍याओं के उपचार के लिए प्रयोग की जाने वाली इस थेरेपी को चीन, मिश्र और वियतनाम जैसे देशों में परंपरा माना जाता है। इस थेरेपी में एक कप को पीठ पर रखा जाता है, इस कप में आग होती है जो त्‍वचा को जलाती नहीं है, लेकिन इन समस्‍यओं को दूर कर देती है।

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    चीन, मिश्र और वियतनाम: जलते प्‍याले की थेरेपी
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    कनाडा और अमेरिका: सेज को फैलाना

    इस परंपरा को आजमाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है, मन शांत होता है और सुरक्षा की भावना बढ़ती है। अगर आपने कहीं दूसरी जगह पर घर लिया है, तो उस घर को शुद्ध करने के लिए सेज (एक प्रकार का पेड की छाल) को जलाकर पूरे घर में फैलाते हैं। इससे उस जगह की हवा स्‍वच्‍छ हो जाती है और बीमारियों के होने का खतरा कम होता है। यानी इस परंपरा के साथ आप शुद्ध हवा पाते हैं। इससे निकलने वाला खुश्‍बूदार धुआं मन को भी शांत करता है।

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    कनाडा और अमेरिका: सेज को फैलाना
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    अर्जें‍टीना, यूरोप और अमेरिका: सक्रिय कोयला

    डायरिया, फूड प्‍वॉइजनिंग, गैस की समस्‍या और अपच जैसी समस्‍या के लिए यह तरीका बहुत ही फायदेमंद है। सक्रिय कोयला को डब्‍ल्‍यूएचओ के घोल के साथ मिलाकर सेवन करने से फायदा होता है। इसमें मौजूद एंटीबॉयटिक डायरिया, गैस जैसी समस्‍या से निजात दिलाते हैं। पेट की किसी भी प्रकार की समस्‍या से ग्रस्‍त हैं तो इसका घोल बनाकर पियें। इस घरेलू नुस्‍खे की खोज अर्जेंटीना में हुई, लेकिन धीरे-धीरे यह यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका में भी फैल गया।

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    अर्जें‍टीना, यूरोप और अमेरिका: सक्रिय कोयला
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    इंडोनेशिया: जामू

    अल्‍जाइमर, अर्थराइटिस, कैंसर से बचाव, सूजन संबंधी समस्‍याओं के उपचार के लिए इस तकनीक को आजमायें। जामू की तकनीक से इन समस्‍याओं का उपचार करने की परंपरा इंडो‍नेशिया से हुई। आयुर्वेद से प्रभावित इस घरेलू नुस्‍खों में औषधीय दवाओं का मिश्रण होता है, इसको अदरक और हल्दी की जड़ें, छाल, फूल, बीज, पत्ते, और शहद को मिलाकर बनाया जाता है। इसकी औषधियों को जामू की गलियों में महिलाओं को बेचते हुए आप देख सकते हैं।
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    इंडोनेशिया: जामू
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