7 कारण जो इबोला की चिंता की वजह नहीं होते

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Oct 22, 2014

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इबोला एक जानलेवा वायरस है जो कि शरीरिक तरल पदार्थ या जानवरों से संपर्क में आने से फैल सकता है। हालांकि यह कुछ सीमित कारणों की वजह से ही फैलता है।
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    इबोला की चिंता

    दुनियाभर में इन दिनों इबोला नामक वायरस का खौफ फैला है। इबोला एक जानलेवा वायरस है जो कि शरीरिक तरल पदार्थ या जानवरों से संपर्क में आने से फैल सकता है। इस बीमारी का अभी तक कोई इलाज नहीं है और ना ही इसके लिये कोई टीका बनाया गया है। अध्ययनों से पता चला है कि इबोला जैसे वायरस स्तनपाई जानवरों से आते हैं। हालांकि इस वायरस से बचा जा सकता है और इसके कारण जल्द ही प्रदर्शित होते हैं तो आपको हर चीज़ को लेकर घबराने की जरूरत नहीं होती है।  
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    इसका पाता लगाना आसान है

    वायरस से संक्रमित व्यक्ति को इस बीमारी के लक्षण दिखाना शुरू हो जाते हैं, और पारंपरिक बीमारियों के ये लक्षण अलग होते हैं। इसलिए बीमारी का पता लगाना आसान है और वायरस का पता लगाने के बाद प्रारंभिक अवधि के दौरान ही इसके प्रति सचेत हुआ जा सकता है।
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    खाना खाने से नहीं फैलता इबोला

    हां, यह सच है कि ये वायरस प्राइमेट पर भी हमला करता है। हालांकि, हाल ही में जारी अनुसंधान विश्लेषण के अनुसार, जो खाना आप खाते हैं, उससे इबोला नहीं फैलता है। मांस सहित हमारे उपभोग किया जाना वाला रोज़मर्रा का खाद्य पदार्थ, इस वायरस से प्रभावित नहीं होता है।
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    सांस के जरिये नहीं फैलता इबोला

    इबोला के मरीज को सबसे अलग रखा जाता है। लेकिन यह बीमारी अन्‍य बीमारियों की तरह सांस से नहीं फैलती, बल्‍कि यह रोगी के साथ सीधे संक्रमण के संपर्क में आने पर ही फैलती है। इस बीमारी का वायरस उसके पसीने या किसी और द्रव्य से फैल सकता है। रोगी की मृत्‍यु के बाद भी यह वायरस वातावरण में जिंदा रहता है।
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    हवाई अड्डे हाई अलर्ट पर हैं

    इबोला रोग के हाल ही में सुर्खियों में छा जाने के बाद से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। तो इस बीमारी के दूसरे देश से आने के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। हालांकि इस बात का एतियात के तौर पर ध्यान रखा जा रहा है।  
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    उठाए जा रहे कदम निश्चित रूप से प्रो-एक्टिव हैं

    डब्ल्यूएचओ सहित कई महत्वपूर्ण विश्व संगठनों ने इस रोग का गंभीरता से संज्ञान लिया है। रिसर्चों में अभूतपूर्व प्रगति देखी गई है तथा ऐसा माना जा रहा है कि इस रोग के प्रसार को जल्दी ही मूल रूप से रोका जा सकेगा। Important world organisations
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  • 7

    कम मृत्यु दर

    पहली बार 1976 में ज़ैरे में इबोला का पता चला था। इसकी पहचान के बाद, तब से अब तक करीब 6000 लोगों इस हालत से प्रभावित होने के बाद मृत्यु का शिकार बने हैं। संख्या निश्चित रूप से उच्च है, लेकिन कुछ अन्य संकमणों के मुकाबले ये आंकड़ा आभी तक कम है।  
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    इसे रोका जा सकता है

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी को रोका जा सकता है। कयोंकि यह वायरस केवल मानव संपर्क के माध्यम से फैलता है। साफ पानी, साबुन और सैनेटाइज़र जैसी बुनियादी चीजों के सही उपयोग से इसके संपर्क से बचा जा सकता है।  
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