जानें एडिक्शन से संबधिंत ये 7 मिथ

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 27, 2015

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लत कोई भी अच्छी नहीं होती है और अगर ये ड्रग्स या शराब की हो तो स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से यह और भी खतरनाक हो जाती है, हालांकि इस लत को लेकर लोगों में कुछ मिथ भी होते हैं।
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    एडिक्‍शन नहीं है अच्‍छा

    अगर आपको नशे की लत है तो यह एक विकराल समस्या है। जो आपका आपके ऊपर से वश खत्म कर देती है। ये स्वास्थ्य के लिए सिर्फ हानिकारक नहीं होती बल्कि जानलेवा हो सकती है। इससे ना सिर्फ आपका, बल्कि आपके परिवार का भी जीवन प्रभावित होता है। लोगों में जानकारी के अभाव के चलते कई तरह के मिथ भी घर कर गए हैं जो इसको बढ़ावा देते हैं। इस स्लाइड शो में एडिक्शन से जुड़ें मिथ के बारें में विस्तार से जानें।
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    मिथ 1 ड्रग का आदी होना स्वैच्छिक होता है।

    जब आप कभी-कभार ड्रग का सेवन करते है तो ये स्वैच्छिक फैसला हो सकता है। लेकिन जैसे-जैसे आप इसका सेवन बढ़ाते जाते हैं, एक समय के बाद ये आपके शरीर की जरूरत बन जाती है। जिसे एडिक्शन कहते हैं। आपके मस्तिष्क को ये विषैले तत्व ही चलाने लगते हैं। जो आपको ड्रग का सेवन करने के लिए मजबूर करते हैं।
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    मिथ 2 ड्रग एडिक्शन एक दिमागी बीमारी है

    शराब से लेकर हिरोइन तक सभी प्रकार के ड्रग्स में अपनी एक क्रियाविधि होती है जो दिमाग को प्रभावित कर देती है। लेकिन एडिक्शन के बावजूद भी दिमाग पर कोशिकाओं जो याद्दाश्त और मूड कि प्रकियाओं से बनती हैं वो भी प्रभावित करती हैं। यहां तक कि कुछ आदतें जैसे - चलना या बात करना भी इसमें शामिल होता है। ऐसे में केवल ड्रग ही आपकी जिंदगी का लक्ष्य रह जाता है।
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    मिथ 3 ट्रीटमेंट के लिए फोर्स नहीं कर सकते।

    कभी कोई भी ड्रगस्टि अपना इलाज खुद से नहीं कराता। या तो उनके परिवार वाले उन्हें इलाज के लिए ले जाते है या फिर कानून के चलते वो रिहैब सेंटर पंहुचते हैं। कई बार रिहैब में आने के बाद लोग गंभीरता से बदलने की कोशिश भी करते है। यूएस के एक सर्वे के अनुसार ज्यादातर लोग कानून के चलते रिहैब सेंटर पंहुचते है ।
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    मिथ 4 एक बार में ड्रग एडिक्शन का इलाज हो जाता है।

    कई अन्य बीमारियों की तरह, ड्रग एडिक्शन भी दीर्घकालिक डिसॉर्डर होता है। कई बार लोग कोल्ड टर्की के प्रयोग से ही छोड़ देते हैं लेकिन लोगों को बार-बार इलाज कराने की जरूरत होती है। ऐसा ज्यादातर मामलों में देखा गया है। कई लोग एक बार के इलाज से भी ड्रग्स का सेवन बंद कर देते हैं।
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    मिथ 5 ट्रीटमेंट के बाद दोबारा ड्रग्स लेने वालों का कुछ नहीं हो सकता

    ड्रग्स की आदत को खत्म करना आसान नहीं है। इसलिए कई बार ट्रीटमेंट पूरा होने के बाद भी लोग वापस से ड्रग्स की ओर मुड सकते हैं। मानसिक तनाव, घर की समस्या और समाजिक कारणों के चलते ये लोग वापस से इस दुनिया में लौट जाते है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि दोबारा इनका इलाज नहीं किया जा सकता। ये एक दीर्घकालिक इलाज की प्रक्रिया है। इससे निपटने के लिए समय और सब्र की जरूरत होती है। आसपास के माहौल पर भी निर्भर करता है।
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    मिथ 6 इसका कोई इलाज नहीं होता है।

    लोग जब चाहे ड्रग लेना बंद कर सकते है, ये असंभव है। जिन लोगों को ड्रग की आदत हो जाती है वे इसका परहेज लंबे समय तक नहीं कर सकते है। रिसर्च बताती है कि लंबे समय तक ड्रग का सेवन करने के चलते व्यक्ति का दिमाग भी अलग तरह से काम करने लगता है। ये ड्रग की ओर उसे आकर्षित करता रहता है। उम्र क हिसाब से ही ड्रग असर होता है। एख बड़ें की अपेक्षा बच्चों में ड्रग की आदत जल्दी लगती है।  
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    मिथ 7 इलाज का कोई फायदा नहीं होता है।

    स्टडीज बताती है कि इलाज के बाद से ड्रग के सेवन में 40 से 60 फीसदी तक कमी आई है। कई शोधो नें इस बात की भी पुष्टि की है कि इसके इलाज से संक्रमण बीमारिया, हेपटेटाइटिस सी और एचआईवी का खतरा भी कम हो जाता है। इस इलाज के दौरान अन्तःशिरा ड्रग का सेवन करने वाले एचआईवी का खतरा 6 गुना कम हुआ है।
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