रजोनिवृत्त महिलाओं के लिए त्‍वचा की स्वच्छता के उपाय

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 06, 2014

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मेनोपोज के बाद महिलाओं में त्‍वचा कोलेजन का उत्‍पादन कम करने लगती है और यही कारण होता है त्‍वचा के सूखेपन और ढीलापन का। इसके साथ ही इस दौरान चेहरे पर झुर्रियां दिखाई देनी शुरू हो जाती हैं। लेकिन, इन प्रभावों को कुछ आसान उपाय आजमाकर नियंत्रित किया जा सकता है।
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    रजोनिवृत्ति में त्‍वचा की स्वच्छता के उपाय

    रजोनिवृत्ति को लेकर कई महिलायें आशंका से घिरी रहती हैं। रजानिवृत्ति यानी मेनोपोज के दौरान शरीर में एस्‍ट्रोजन का स्‍तर काफी बढ़ जाता है। इसका महिलाओं के शरीर पर काफी असर पड़ता है। इस दौरान महिलाओं का अस्थि घनत्व कम होने लगता है। इसके साथ ही चयापचय दर धीमी हो जाती है। इसके साथ ही उनका वजन भी बढ़ने लगता है। यानी इस दौर में महिलाओं का शरीर काफी बदलावों से गुजरता है। मेनोपोज के बाद महिलाओं की त्‍वचा में सूखापन आने लगता है। त्‍वचा की नमी कम होने लगती है। इस दौरान त्‍वचा के नीचे बहुत सारा फैट जमा होने लगता है। इससे त्‍वचा कोलेजन का उत्‍पादन कम करने लगती है और यही कारण होता है त्‍वचा के सूखेपन और ढीलापन का। इसके साथ ही इस दौरान चेहरे पर झुर्रियां दिखाई देनी शुरू हो जाती हैं। लेकिन, इन प्रभावों को कुछ आसान उपाय आजमाकर नियंत्रित किया जा सकता है।
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    सफाई

    मेनोपोज के बाद त्‍वचा की नमी खोकर रूखी होने लगती है। मेनोपोज से शरीर में होने वाले हॉर्मोनल बदलाव के कारण यह समस्‍या अधिक देखने को मिलती है। महिलाओं में 40-50 साल की उम्र में रजोनिवृत्ति की अवस्था शुरू होने के पहले या बाद में हार्मोन में बड़े बदलाव होते हैं, जिससे यह समस्‍या और बढ़ जाती है। इस समस्‍या को दूर करने के लिए क्रीमी फेस फॉश या पीएच कंसीलर से चेहरे को धोना सही रहता है। इसके अलावा, त्‍वचा की नमी को बनाये रखने के लिए आपको लंबे समय तक हॉट शॉवर से बचना चाहिए।
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    मॉइश्‍चराइजिंग

    मॉइश्चराइजर त्वचा को मुलायम बनाने में मदद करता है। नहाने के तुरंत बाद मॉश्चराइजर का उपयोग करना बेहतर रहता है। रजोनिवृत्ति के बाद त्‍वचा की देखभाल के लिए नियमित रूप से अपनी त्‍वचा पर पैराबीन (parabens) मुक्‍त क्रीमी मॉइश्‍चराइजर लगाना चाहिए। अगर आपकी त्‍वचा ज्‍यादा ड्राई है तो आम त्‍वचा को अच्‍छे से हाइड्रेट करने के लिए बॉडी बटर का उपयोग कर सकते हैं।
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    सनस्क्रीन

    रजोनिवृत्ति के बाद एसपीएफ 30 या उससे अधिक की व्यापक स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का उपयोग जारी रखना चाहिए। हालांकि सूर्य की पराबैंगनी किरणें त्‍वचा को किसी भी उम्र में नुकसान पहुंचा सकती हैं। लेकिन, लेकिन रजोनिवृत्ति के दौरान सनस्क्रीन का प्रयोग त्वचा की कई रूपों में मदद करता है।  यह त्‍वचा को अधिक पतला होने से रोकता है। इसके साथ ही इस दौरान त्‍वचा को नुकसान होने का खतरा अधिक होता है ऐसे में सनस्‍क्रीन और जरूरी हो जाता है।
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    एक्सफोलीएटिंग

    नियमित रूप से एक्‍सफो‍लीएटिंग गंदगी और तेल को निकालने का सबसे अच्‍छा तरीका है। इसलिए रजोनिवृत्ति के बाद त्‍वचा को सप्‍ताह में दो बार एक्‍सफोलीएट करना चाहिए। यह मृत त्‍वचा को निकालने के साथ त्‍वचा से उम्र के धब्‍बों को कम करने में भी मदद करता है।
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    मेकअप उतार कर सोयें

    रात को त्‍वचा स्‍वयं ही रिजूवनेट होती है। यानी जब आप आराम करती हैं तो आपकी त्‍वचा अपनी खोई हुई नमी और कमी को पूरा करने में जुट जाती है। त्‍वचा का तापमान बढ़ने से रो‍मछिद्र खुलने लगते है। इसलिए रोमछिद्रों को खोलने के लिए रात में त्‍वचा को साफ करना बहुत महत्‍वपूर्ण होता है। साथ ही रात में सोने से पहले नाइट क्रीम या विटामिन युक्‍त क्रीम का उपयोग करना चाहिए क्‍योंकि वह आपकी त्‍वचा में आसानी से समा जाती है। रात में मेकअप लगाकर सोने से रोमछिद्र बंद होकर मुंहासों का कारण बनते हैं। रजोनिवृत्ति के दौरान संचयी क्षति के कारण भी त्वचा में चमक कम होने लगती है।
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    हाथों और पैरों की देखभाल

    रजोनिवृत्ति के दौरान हाथों के पीछे नमी, फैट और कोलेजन खोने से उसमें हड्डियां और नसें दिखाई देने लगती हैं। त्‍वचा के इस हिस्‍से से सबसे पहले उम्र बढ़ने के संकेत दिखने शुरू हो जाते है। इसलिए अपने हाथों पर नियमित रूप से मॉश्‍चराइजर का इस्‍तेमाल करें। साथ ही प्लम्प उपस्थिति को बनाए रखने के लिए इन हिस्‍सों पर सनस्‍क्रीन का उपयोग करें।
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    एंटीऑक्‍सीडेंट का सेवन

    एंटीऑक्‍सीडेंट त्‍वचा को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करते हैं। यह त्‍वचा को मरम्‍मत और पुनर्जीवित करने में मदद करते हैं। एंटीऑक्‍सीडेंट के लिए गहरे रंग के फल और सब्जियों को अपने आहार में शामिल करें। गहरे लाल, गुलाबी और नारंगी रंग की खाद्य सामग्रियों में फोटोकेमिकल भारी मात्रा में मिलते हैं। जो फल और सब्जी प्राकृतिक रूप से जितने रंगीन होते हैं वे उतने ही अधिक स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्द्धक होते हैं।
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    सोया का सेवन करें

    सोया इसोफ्लेवोन से समृद्ध होता है। इसोफ्लेवोन एक फाइटो एस्‍ट्रोजन है। यह पौधों से प्राप्त किया जाता है, और इसका शरीर में एस्ट्रोजन के समान प्रभाव होता है। नियमित रूप से सोया दूध पीने से उम्र संबंधी बदलाव जैसे त्वचा का पतला होना धीमा होता है।  
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    तनाव

    तनाव त्‍वचा की संवेदनशीलता बढ़ाने के साथ त्‍वचा को डिहाइड्रेट भी करता है। तनाव शरीर के लगभग सभी अंगों और त्‍वचा के नुकसान का कारण बनता है। तनाव के दौरान, हमारे शरीर में कोर्टिसोल नामक हार्मोन के अधिक स्राव से सोरायसिस और एक्जिमा जैसे त्वचा की समस्याएं बढ़ाने लगती हैं। रजोनिृत्ति के बाद महिलाओं में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए नियमित रूप से योग या ध्यान से जीवन में तनाव को कम किया जा सकता है।
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    नियमित एक्‍सरसाइज

    व्‍यायाम त्‍वचा के लिए रक्‍त परिसंचरण को बढ़ाने में मदद करता है। ऑक्‍सीजन और रक्‍त प्रवाह के अतिरिक्‍त बहाव से त्‍वचा चमकदार और स्‍वस्‍थ बनी रहती है। इसके अलावा व्‍यायाम से मेटाबॉलिज्‍म तो अच्‍छा रहता ही है साथ ही साथ इससे शरीर को संपूर्ण स्‍वास्‍थ्‍य प्राप्‍त करने में भी मदद मिलती है। व्‍यायाम आपका वजन नियंत्रित रखता है साथ ही हड्डियों को भी मजबूती देता है।
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