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महिलाओं में ईटिंग डिस्‍ऑर्डर और चिंता बढ़ा सकता है फेसबुक

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 29, 2014
फेसबुक जैसी सोशल नेटवर्किग साइट युवा महिलाओं में चिंता और ईटिंग डिस्‍ऑर्डर का कारण बन सकती है। अमेरिका में हुए ताजा शोध में यह बात सामने आयी है।
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    सोशल मीडिया और चिंता

    सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल हम फोटो और विचार शेयर करने के लिए करते हैं। हम दूसरों के विचारों पर टीका-टिप्‍पणी करते हैं और साथ ही अपने दोस्‍तों के बारे में जानने समझने के लिए भी इस मंच का इस्‍तेमाल करते हैं। लेकिन, क्‍या आपको इस बात का अंदाजा है कि यही सब बातें युवा महिलाओं में चिंता और ईटिंग डिस्‍ऑर्डर का कारण बन सकती है। अमेरिका में हुए ताजा शोध में यह बात सामने आयी है।

    सोशल मीडिया और चिंता
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    लड़कियों में देखी गयी चिंता

    कॉलेज छात्राओं के एक समूह पर प्रयोग के दौरान यह पाया गया कि फेसबुक पर लॉगिन करने वाली किशोरियों में अपने वजन और शरीर के आकार को लेकर अधिक चिंता देखी गयी, बनिस्‍बत उन महिलाओं के जिन्‍होंने इंटरनेट पर अपना समय अन्‍य आर्टिकल पढ़ने में बिताया।

    लड़कियों में देखी गयी चिंता
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    ईटिंग डिस्‍ऑर्डर से जुड़ा है फेसबुक

    शोध टीम ने सलाह दी कि वे महिलायें जो ईटिंग डिस्‍ऑर्डर का बचाव और इलाज करवा रही हैं, उन्‍हें फेसबुक पर अपने द्वारा बिताये जा रहे वक्‍त को भी नजर में रखना चाहिए। टीम का मानना है कि फेसबुक पर वक्‍त बिताने और ईटिंग डिस्‍ऑर्डर के बीच गहरा संबंध है।

    ईटिंग डिस्‍ऑर्डर से जुड़ा है फेसबुक
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    पहली बार हुआ ऐसा शोध

    पामेला कीन का कहना है कि अभी तक ईटिंग डिस्‍ऑर्डर के अलग-अलग पहलुओं पर शोध किया गया है, लेकिन पहली बार किसी ने फेसबुक को ध्‍यान में रखकर इस तरह का अध्‍ययन करने का विचार किया। पामेला शोधकर्ता और फ्लोरिडा स्‍टेट यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ साइकोलॉजी में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। उन्‍होंने छात्रा एनालीज मेब (Annalise Mabe) के नेतृत्‍व में हुए इस शोध में निरीक्षक का काम किया।

    पहली बार हुआ ऐसा शोध
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    पहले भी हुआ विचार

    पामेला का कहना है कि कुछ पुराने शोध में इस बात का इशारा किया गया था कि फेसबुक के इस्‍तेमाल और ईटिंग डिस्‍ऑर्डर के बीच संबंध हो सकता है। लेकिन, किसी ने भी इस बारे में गहन शोध न‍हीं किया कि आखिर कैसे फेसबुक ईटिंग डिस्‍ऑर्डर का कारण बन सकता है, इसलिए हमनें इस पर काम करने का विचार किया।

    पहले भी हुआ विचार
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    कैसे हुआ शोध

    शोध के पहले भाग में 960 छात्रों ने अपने आहार व्‍यवहार और खाने-पीने की आदतों के बारे में सर्वे के सवालों के जवाब दिए। इसके साथ ही उनसे यह भी पूछा गया कि आखिर वे कितना समय फेसबुक पर बिताते हैं। इसमें से 96 फीसदी महिलायें फेसबुक का इस्‍तेमाल करती थीं। और औसतन वे सप्‍ताह में दो घंटे तक का समय इस सोशल नेटवर्किंग साइट पर बिताती थीं। शोध में सामने आया कि जिन युवा महिलाओं के क्‍वेश्‍चनेयर के जवाबों से इटिंग डिस्‍ऑर्डर की शिकायत नजर आयी, वे फेसबुक पर औरों के मुकाबले अधिक समय व्‍यतीत करती थीं।

    कैसे हुआ शोध
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    दुविधा रही कायम

    इन परिणामों के बाद भी शोधकर्ताओं के मन में दो बातों को लेकर दुविधा रही। पहली बात यह कि क्‍या फेसबुक पर समय बिताना ईटिंग डिस्‍ऑर्डर के खतरे को बढ़ाता है अथवा इसका यह अर्थ है कि वे महिलायें जो अपने वजन और शरीर के आकार को लेकर अधिक चिंताग्रस्‍त होती हैं, उन्‍हें फेसबुक पर अधिक समय बिताने की आदत होती है।

    दुविधा रही कायम
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    किया गया दूसरा शोध

    इस दुविधा का हल करने के लिए दूसरा शोध किया गया। शोधकर्ताओं ने पहले शोध में से उन 84 महिलाओं को चुना, जो फेसबुक पर सप्‍ताह में दो घंटे या उससे अधिक समय बिताती थीं। इन महिलाओं को दो समूहों में बांटा दिया। एक समूह को 20 मिनट के लिए फेसबुक इस्‍तेमाल करने को कहा गया, जबकि दूसरे को वीकिपीडिया, यू्ट्यूब और अन्‍य साइट्स पर वक्‍त बिताने की सलाह दी गयी। इसके बाद सभी प्रतिभागियों से एक बार फिर क्‍वेश्‍चनेयर भरने को कहा गया। इस बार उनके फेसबुक इस्‍तेमाल और उनके आहार व्‍यवहार संबंधी सवाल पूछे गए।

    किया गया दूसरा शोध
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    चौंकाने वाले आए नतीजे

    शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं में ईटिंग डिस्‍ऑर्डर की आशंका अधिक पायी गई, वे अपने फेसबुक कमेंट और फोटो पर अकमेंट और लाइक पाने को अधिक महत्‍ता देती थीं। इसके साथ ही वे महिलायें खुद को अनटैग करने और अपने दोस्‍तों के साथ अपनी तस्‍वीरों की तुलना करने में अधिक समय बिताती थीं।

    चौंकाने वाले आए नतीजे
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    खुल गया राज

    बीस मिनट बाद दोनों ग्रुप की छात्राओं में अपने वजन और शरीर के आकार को लेकर कम बेचैनी देखी गयी, लेकिन फेसबुक के इतर समय बिताने वाली छात्राओं में यह बेचैनी अधिक कम थी। यानी फेसबुक पर समय बिताने और खाने की आदतों में काफी गहरा संबंध है।

    खुल गया राज
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    पुरुषों पर नहीं किया गया शोध

    इस शोध की अपनी कुछ सीमायें भी हैं। जैसे इस शोध में पुरुषों को शामिल नहीं किया गया। इससे यह बात पता नहीं चलती कि उन पर इसका क्‍या असर पड़ता है। इसके साथ ही इसमें इस बात की भी पड़ताल नहीं की गयी अन्‍य सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ईटिंग डिस्‍ऑर्डर में कोई संबंध है अथवा नहीं।

    पुरुषों पर नहीं किया गया शोध
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