क्यों आपके ग्रैंडपेरेंट्स हैं बेस्ट जानिये 10 कारण

By:Shabnam Khan , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 19, 2015

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आपके दादा-दादी, नाना-नानी आपके लिए ऐसा अहसास बन जाते हैं जो भले ही आपसे दूर रहते हों, लेकिन उनकी यादें हमेशा आपके साथ रहती हैं।
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    अहम होते हैं दादा-दादी, नाना-नानी

    वो लोग खुशकिस्तम होते हैं जिन्होंने अपने बुजुर्गों को देखा होता है, और उनके साथ वक्त गुजारा होता है। आपके दादा-दादी, नाना-नानी आपके लिए ऐसा अहसास बन जाते हैं जो भले ही आपसे दूर रहते हों, लेकिन उनकी यादें हमेशा आपके साथ रहती हैं। इसी वजह से हर बच्चे-बड़े को अपने ग्रैंडपेरेंट्स बेस्ट लगते हैं। आइये जानें, कौन सी बातें उन्हें बेस्ट बनाती हैं।

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    मम्मी-पापा के गुस्से से बचाने वाले

    बचपन में कितनी बार मम्मी या पापा की पिटाई से बचने के लिए आप अपने दादा या दादी के पीछे छिपे हैं? आपने उनसे मदद मांगी है? चाहे कितनी भी बड़ी गलती आपसे क्यों न हुई हो, मम्मी-पापा की डांट से आपके ग्रैंडपेरेंट्स ने हमेशा आपको बचाया है। खास बात ये है कि ये जानते हुए भी कि आप गलत हैं, वो आपकी साइड लेते हैं और फिर बाद में बैठाकर प्यार से समझाते हैं।

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    मौज-मस्ती के साथी

    अपने समर वेकेशन का इंतजार आपको इसलिए सबसे ज्यादा रहता था क्योंकि यही वो वक्त था जब आप अपनी नानी के यहां जाते थे। कौन ऐसा बच्चा होगा जिसने नाना-नानी के घर जाकर ढेर सारी मस्ती न की हो, खूब ऊधम न मचाया हो। सबसे ज्यादा मजा तो तब आता था जब मम्मी कुछ भी नहीं कह पाती थीं बस आंखें दिखाती रहती थीं। आपके नाना भी आपकी मस्ती में खूब आपका साथ देते थे, तो भला मम्मी कर भी क्या लेतीं।

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    मम्मी के हाथ के खाने से भी बेहतर स्वाद

    वैसे तो जब खाने की बात होती है तो लोग आमतौर पर अपनी मां के हाथ का खाना याद करते हैं लेकिन जरा सोच के देखिये, एक और हाथ का स्वाद आपकी मां के हाथ के स्वाद को भी बीट कर देता है। जी हां, वो स्वाद होता है, दादी/नानी के हाथ के खाने का। उनके पास दो खास चीजें होती हैं- एक, डबल एक्सपीरियंस और दूसरा, ढेर सारा लाड़ और दुलार। अब ऐसे में स्वाद तो बढ़ेगा ही।

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    आपकी सारी बातें ध्यान से सुनते हैं

    चाहे शिकायत आपकी टीचर के बहुत ज्यादा होमवर्क देने की हो या फिर पापा की कम पॉकेटमनी देने की, आपके ग्रैंडपेरेंट्स ही हैं, जो आपकी सारी शिकायतों को ध्यान से सुनते हैं। थोड़े बड़े हो जाने पर आपके पहले क्रश से लेकर पहले प्यार तक सारी प्रॉब्लम्स भी सुन लेते हैं। इतना इंट्रस्ट लेकर और कौन आपकी ये बातें सुनेगा?

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    किस्से-कहानियों का खजाना

    किस्से कहानियां तो इनके पास इतने होते हैं कि क्या कहें। परियों की कहानियां, भूतों की कहानियां, अपने बचपन के किस्से, क्या नहीं है इनके पास बताने को। ग्रैंडपेरेंट्स की कहानिया सुनते सुनते, उनके हाथ को तकिया बनाकर सोना... वाह! इससे अच्छी कोई रात हो सकती है क्या?

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    अच्छी सलाह देते हैं

    आप अपने ग्रैंडपेरेंट्स से बेहिचक हर बात कर सकते हैं। अपनी कोई भी समस्या उन्हें बताएं तो वो न सिर्फ आपको सुनते हैं बल्कि आपके लिए जो सबसे अच्छी हो सकती है वही सलाह देते हैं। ग्रैंडपेरेंट्स से अच्छा काउंसलर आपको कहीं नहीं मिलेगा!

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    बहुत कुछ होता है सिखाने के लिए

    एक वक्त ऐसा आता है जब हमें लगता है कि हम सब इतने बड़े हो चुके हैं कि हमें अब अपने से बड़ों की सलाह और सीख की कोई जरूरत नहीं है। हम भूल जाते हैं कि उन्होंने हमसे ज्यादा दुनिया देखी है। उन्हें हमसे कहीं ज्यादा अनुभव है। अगर हम उन्हें सुनें तो कई ऐसी समस्याएं चुटकियों में हल कर सकते हैं जो आगे जाकर बहुत बड़ी मुसीबत बन जाती हैं।

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    सीक्रेट को सीक्रेट बनाए रखने वाले

    आपकी पहली शरारत से लेकर आपके क्रश तक, आप उन्हें कुछ भी बताइए, बात कभी तीसरे के कानों तक नहीं जाएगी। वे आपके बेस्ट फ्रेंड से भी ज्यादा लॉयल हो सकते हैं। आपके सीक्रेट को सीक्रेट बनाये रखते हैं।

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    आपके लिए निस्वार्थ

    कहते हैं कि बुजुर्गों को असल से ज्यादा सूद, यानी अपने बच्चों से ज्यादा उनके बच्चे प्यारे होते हैं। उन्होंने अपनी जिंदगी में जो कुछ सहा है, उसे सुनने से कई महत्वपूर्ण चीजें सीख सकते हैं आप। आपको प्यार देने के बदले में वे कभी आपसे कुछ नहीं मांगते। निस्वार्थ प्रेम दरअसल यहीं से आता है।

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    बस यादें रह जाती हैं पास

    यह एक कड़वा सच है कि वक्त के साथ-साथ बढ़ती उम्र हमें उनसे दूर, और दूर करती चली जाएगी। हममें से कुछ के ग्रैंड पैरंट्स तो शायद अब रहे भी नहीं। लेकिन उनके जाने के बावजूद भी उनकी यादें जाने का नाम ही नहीं लेतीं। उनके साथ खेलना, कूदना, उनकी गोद में सोना, ऐसा लगता है जैसे हमारे बूढ़े होने के बावजूद भी हम यह नहीं भूल पाएंगे।

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