इन कारणों से लोग खुद को कर लेते हैं चोटिल

By:Devendra Tiwari , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 21, 2015

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जब दिमाग सही तरीके से काम नहीं कर पाता तो सामान्य जीवन यापन करने वाला इंसान भी खुद को चो‍ट पहुंचाने लगता है, इस स्लाडशो में जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है और लोग खुद को ही क्यों चोटिल करते हैं।
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    खुद को चोट पहुंचाना

    खुद को चोट पहुंचाने से आशय है कि जब कोई किसी बीमारी या अवस्था के कारण खुद किसी भी तरीके चोटिल जैसे – खुद को चलाना, घायल करना या नुकसान पहुंचाना, आदि करते है। ऐसी स्थिति तब आती है जब किसी को किसी प्रकार की मानसिक बीमारी, अवसाद, या मूड में बदलाव होता है। जब दिमाग सही तरीके से काम नहीं कर पाता तो सामान्य जीवन यापन करने वाला इंसान भी खुद को चो‍ट पहुंचाने लगता है, जब इसकी अति हो जाती है तब वह आत्महत्या भी कर लेता है। इस स्लाडशो में जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है और लोग खुद को ही क्यों चोटिल करते हैं।

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    तनाव के कारण

    लोग खुद को चोटिल इस कारण से भी करते हैं, और उनको लगता है कि ऐसा करने से वो इस स्थिति को नियंत्रित कर लेंगे। जैसे कि कोई इंसान किसी भयावह स्थिति या माहौल से गुजर चुका है और इसके दर्द को याद करने मात्र से ही वह सिहर जाता है, उस स्थिति में वह खुद को चोट पहुंचाता है। इससे उससे उसे यह लगता है कि उसका पुराना दर्द (जो कि इस छोटी चोट से कहीं अधिक बड़ा है) इस तरह दूर हो जायेगा। बलात्कार पीडि़तों के साथ यह स्थिति बार-बार देखी जाती है। क्योंकि उस भयानक एहसास से यह छोटी सी चोट बहुत ही कम दर्दनाक होती है।

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    बीमारी के कारण

    बीमारी के कारण भी लोग खुद को चोटिल करते हैं। स्मिथ मैगेनिस सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है जिससे ग्रस्त मरीज खुद को चोटिल करता है। इस बीमारी में शरीर में एक क्रोमोसोम होता है जिससे दर्द का एहसास बिलकुल नहीं होता है। ऐसे में जब वह खुद को चोटिल करता है तो उसे इसका दर्द महसूस नहीं होता है। सिर को दीवार पर मारना, खुद को पीटना, मुंह से त्वचा को काटना, बाल नोचना, जैसी हरकतें मरीज करता है।

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    सदमें से बाहर निकलना

    सदमा तभी लगता है जब उसका एहसास बहुत बुरा होता है। सदमे से ग्रस्त व्यक्ति कई बार अपना आवेश खो देता है। ऐसी स्थिति में उसका दिमाग भावशून्य हो जाता है और वह समझ नहीं पाता है कि वह क्या कर रहा है। ऐसे में जब वह खुद को चोटिल करने वाले काम करता है तो इसका जुड़ाव उसके पुराने मानसिक घाव से होता है। यानी यह ऐसी स्थिति है जिसमें इंसान खुद को अकेला पाता है और उससे उबरने के लिए खुद को यातना, वेदना और दर्द देता है।

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    ठीक से संचार न कर पाना

    कभी-कभी लोग खुद को इस कारण भी चोटिल करते हैं क्यों कि वे किसी कार्य में निपुण नहीं होते। उनके अंदर जो भी ज्ञान या कौशल होता है लोगों के सामने वे ठीक ढंग से बयां नहीं कर पाते। इसके कारण वे कुंठाग्रस्त हो जाते हैं और खुद को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जो भी वे सीखते हैं उसे दुनिया के सामने रख नहीं पाते हैं और अंदर ही अंदर कुढ़ते रहते हैं। इसके कारण ही वे अनायास ही खुद को चोटिल करते रहते हैं।

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    खुद को दंड देना

    ‘लंदन ड्रीम्सं’, ‘गैंग्सक ऑफ वॉसेपुर’ अगर आपने ये दोनों फिल्में देखी हैं तो आपको याद होगा कि इसमें कलाकार खुद को दंड देते हैं। ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उनको लगता है कि उनसे कहीं गलती हो रही है या फिर उनके कारण गलत काम हो रहे हैं। यह सिर्फ फिल्म की कहानी नहीं बल्कि सच्चाई भी है। जब इंसान बाहरी दुनिया की गतिविधि में खुद को लगा देता है और उसे लगता है कि उसके कारण ही बुरे काम हो रहे हैं तो वह खुद को चोटिल करने वाला कदम उठाता है। अपने लक्ष्य को न पाना, हर जगह असफल होना, आदि कारणों से भी लोग खुद को चोटिल करते हैं।
    Image Source : Getty

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