डेमेंशिया का निदान क्यों महत्वपूर्ण है

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Sep 20, 2014

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एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में डिमेन्शिया और अल्जाइमर के पीड़ितों ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जिनका इलाज नहीं हो पाता है। हालांकि गंभीरता को देखते हुए डेमेंशिया का निदान बहुत महत्वपूर्ण है।
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    डेमेंशिया का निदान

    लंदन के किंग्स कॉलेज द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में डिमेन्शिया और अल्जाइमर के पीड़ितों ऐसे लोगों की बड़ी संख्या जिनका इलाज नहीं हो पाता है। किंग्स कॉलेज की रिपोर्ट की विश्व रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में दो करोड़ 70 लाख लोग अल्जाइमर से पीड़ित हैं। इसके साथ ही भूलने की बीमारी से पीड़ित तीन करोड़ 60 लाख लोगों में अभी इस बीमारी का पता ही नहीं लग पाया है। इस लिए इस बीमारी का जल्द निदान किया जाना बेहद जरूरी हो जाता है।
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    डिमेंशिया क्या है

    डिमेंशिया एक ऐसा रोग है जिसमें व्यक्ति की याददाशत कमजोर होने लगती है। उसे कुछ याद रखने में दिक्कत होने लगती है। कोई ताजा बात याद करने में भी उसे दिमाग पर बहुत जोर डालना पड़ता है। यह रोग तब गंभीर रूप ले लेता है जब रोगी की याददाश्त बिल्कुल खत्म हो जाती है।
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    डिमेंशिया के कारण

    हालांकि अब तक इसका यथार्थ कारम पता नहीं चला है, लेकिन आमतौर पर डिमेंशिया होने के दो कारण होते हैं। पहला मस्तिष्क की कोशिकाओं का नष्ट होना और दूसरा उम्र बढ़ने के साथ मस्तिष्क की कोशिकाओं का कमजोर हो जाना। यह सिर पर कोई गंभीर चोट लगने या कोई रोग जैसे ब्रेन टुमेर अल्जाइमर आदि, जिससे कोशिकाएं नष्ट हो सकती है, के होने से पर होता है।
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    डिमेंशिया उम्र बढ़ने पर भूलने की बीमारी से अलग है

    कई लोग डिमेंशिया को “भूलने की बीमारी” कहकर टाल देते हैं। वहीं कुछ अन्य लोग कोई छोटी सी बात भूलने पर भी विचलित हो जाते हैं। उन्हें डिमेंशिया का भय घेर लेता है। जबकि सच तो यह है कि हम सब कभी न कभी कुछ न कुछ भूलते हैं, लेकिन यह हमेशा डिमेंशिया नहीं होता है। डिमेंशिया में याददाश्त की समस्याएं दूसरी तरह की होती हैं।
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    क्यों है खतरनाक

    डिमेंशिया के कारण दिमाग में होने वाले बदलाव स्थिर होते हैं। अर्थात उन्हें किसी भी तरह से पहले जैसा सामान्य नहीं किया जा सकता। कई डॉक्टरों की मान्यता है कि दिमाग के कुछ खास हिस्सों में प्रोटीन स्ट्रक्चर्स में अनियमितता इसका मुख्य कारण हो सकता है। उम्र बढ़ने पर इस तरह की परेशानी होती जाती है। वहीं डिमेंशिया ऐसे संक्रमण से भी हो सकता है, जो सीधा दिमाग पर असर करते हैं, जैसे एचआईवी। इसके अलावा पार्किसन रोग के कारण भी इसके होने की आशंका रहती है।
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    पूर्व निदान

    इंटरनेशनल कांफ्रेंस ओन अल्‍जाइमर्स डिजीज में प्रस्तुत किये गए एक नई शोध के अनुसार डिमेंशिया के पूर्व निदान से इसके निदान पर होने वाले खर्च का लगभग 30 प्रतिशत तक बचाया जा सकता है।
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    पूर्व निदान के लाभ

    • जानकारी, संसाधनों और समर्थन में आसानी होती है।
    • लोग इसे रहस्यमय नहीं रखेंगे और अपनी हालत में सुधार का प्रयास करेंगे।
    • लोग अपने जीवन की गुणवत्ता को बढ़ा पाएंगे।
    • उपचार का पूरा लाभ मिल पाएगा।

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    भविष्य के लिए बड़ा खतरा

    अल्जाइमर पर काम करने वाली संस्था अल्जाइमर इंटरनेशनल के अनुसार आने वाले 37 सालों में डिमेंशिया के मरीज तीन गुना तक ज्यादा मरीज हो जाएंगे। अल्जाइमर इंटरनेशनल की रिपोर्ट के हिसाब से यदि समय पर निदान न हो और सही कदम न उठआए गए तो 2050 तक विश्व में 13.5 करोड़ लोग डिमेंशिया से पीड़ित हो सकते हैं।
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