इन 7 कारणों से क्रॉस लेग बैठने की आदत छोड़ना ही बेहतर

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 17, 2015

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क्रॉस लेग बैठने से भले ही आपको कुछ समय के लिए सुकून मिलता हो, लेकिन वास्‍तविकता यह है कि इसके कारण आपके स्‍वास्थ्‍य पर बुरा असर पड़ता है, इसलिए इस आदत को तुरंत छोड़ना ही बेहतर है।
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    क्रॉस लेग बैठने का स्‍वास्‍थ्‍य पर असर

    क्‍या डेस्‍क पर काम करते समय या खाने के बाद या दूसरे मौकों पर आप अपना ज्‍यादातर समय क्रॉस लेग बैठकर बिताते हैं। कुछ स्थिति में तो आप क्रॉस लेग को मॉडेस्टी का संकेत भी मानते हैं। बिना इस बात का एहसास किए कि ऐसा आप कई सालों से कर रहे हैं। हालांकि कुछ लोगों को ऐसे बैठने से आराम मिल सकता है। लेकिन इससे पैर और टांग में दबाव कम हो जाता है। जिससे आपके स्‍वास्‍थ्‍य पर बुरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का भी कहना है कि आपको इस आदत पर पुनर्विचार करने की जरूर है, क्‍योंकि लेग को क्रॉस करके बैठने से वास्‍तव में आपके स्‍वास्‍थ्‍य पर कुछ नकारात्‍मक प्रभाव हो सकते हैं। आगे की स्‍लाइड में जानिये इसके कारण होने वाले नकारात्‍मक प्रभाव के बारे में।
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    पीठ और गर्दन में दर्द

    ऑर्थोपेडिक फिजिकल थेरेपिस्ट विवियन एइसेन्सटेड्ट के अनुसार, क्रॉस लेग बैठने से आपके पीठ और गर्दन में दर्द की समस्‍या हो सकती है। उनके अनुसार, क्रॉस लेग में बैठने से आपके हिप्‍स टॉर्क की स्थिति में आ जाता है, जिससे आपकी पेल्विक बोन में से एक के रोटेशन प्रभावित होता है। जबकि आपकी पेल्विक रीढ़ की हड्डी के समर्थन का आधार होती है, और इसको घुमाने और अस्थिर रहने से आपकी गर्दन और पीठ के निचले और मध्‍यम भाग पर अनावश्‍क दबाव आने लगता है। और बहुत अधिक देर तक ऐसे बैठने से आपके रीढ़ की हड्डी पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे उसमें दर्द होने लगता है।
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    स्‍पाइडर वेन की समस्‍या

    यूएस डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विस के अनुसार, कोई भी नहीं चाहता कि उसको स्‍पाइडर वेन की समस्‍या हो लेकिन ऐसा होता है, अमेरिका में लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं और 45 प्रतिशत पुरुष इस समस्‍या से ग्रस्‍त है। क्रॉस लेग करके बैठने से आपके नसों पर दबाव बढ़ता है, जिससे रक्‍त वापस दिल की लौटने लगता है। एक पैर के ऊपर दूसरे पैर के दबाव रक्‍त प्रवाह में बाधा उत्‍पन्‍न करने लगता है जिससे आपके पैरों की नसें कमजोर या नुकसान होने लगता है। नसों के क्षतिग्रस्त या कमजोर होने पर ब्‍लड में रिसाव होता है और वह वहां जमा हो जाती है। इसे ही स्‍पाइडर वेन की समस्‍या कहते हैं।
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    उच्‍च रक्तचाप की समस्‍या

    यह आश्‍चर्यजनक, लेकिन सच है। घुटने से पैर पर पैर चढ़ाकर बैठने से अस्‍थायी रूप से आपका रक्‍तचाप बढ़ने लगता है। ऐसा पैरों से रक्‍त दिल को वापस पंप होने के कारण होता है। यह आपके शरीर के लिए बहुत कठिन काम की तरह होता है क्‍योंकि जब आप क्रॉस लेग के साथ बैठते हैं तो रक्‍त के प्रवाह का प्रतिरोध बढ़ जाता है। इससे परिणामस्‍वरूप दिल को वापस रक्‍त पुश करने के लिए आपके शरीर का ब्‍लड प्रेशर बढ़ जाता है। हालांकि रक्‍तचाप के बढ़ने पर आमतौर पर किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस नहीं होते, लेकिन बार-बार ऐसा होने से आपको भविष्‍य में कई प्रकार की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं हो सकती है। इसलिए जब भी आप लंबे समय तक बैठने की योजना बना रहे हो तो लेग को क्रॉस करने से बचें।
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    पैरों की नसों में खराबी

    क्रॉस लेग करके बैठने से रक्‍त दिल तक वापस जाने के साथ-साथ आपकी टांगों और पैरों की नसों और तंत्रिकाओं को भी प्रभावित करता है। घुटने से लेग को क्रॉस करने से आपके पेरोनेाल नर्व पर दबाव पड़ता है, पेरोनोल आपके पैर में प्रमुख नर्व होती है जो घुटने के नीचे और पैर के बाहर से गुजरती है। यह दबाव टांग और पैर की कुछ मांसपेशियों में अकड़न और अस्‍थासी पैरालिसिस का कारण बन सकता है।
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    हृदय रोग का खतरा

    हालांकि इस बारे में कोई सबूत नहीं है लेकिन फिर भी माना जाता है कि अक्‍सर पैरों को क्रॉस करके बैठने से रक्‍तचाप बढ़ने से हृदय रोग का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए अगर आप रक्‍तचाप से साथ हृदय रोग से भी बचना चाहते हैं तो लंबे समय तक पैरों को क्रॉस करके बैठने से बचें।
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    पुरुषों के शुक्राणुओं पर असर

    पुरुष में पेंट पहनने के बाद टांगों को क्रॉस करके बैठने से कमर के नीचे का तापमान बढ़ जाता है। और नियमित रूप से कई घंटों तक ऐसे बैठने से पुरुषों की शुक्राणुओं की संख्‍या पर असर पड़ने लगता है। इसलिए पुरुषों को भी टांगों को क्रॉस करके बैठने से मना किया जाता है।
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    चोटों का खतरा

    पैरों को क्रॉस करके बैठने से पीठ के निचले हिस्‍से की मांसपेशियों पर तनाव बढ़ने लगता है। इस आदत के चलते एक विशेष प्रकार के पैर को लगातार ऊपर रखने से पीठ में दर्द, बेचैनी और चोट का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। इसलिए इस पॉजीशन में ज्‍यादा देर बैठने से बचें अगर आपको ऐसा बैठना अच्‍छा लगता है तो 10 से 15 मिनट से ज्‍यादा इस पॉजीशन में न बैठें।
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