8 कारणों से तिल के तेल को खाना पकाने में करें शामिल

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 13, 2015

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तिल के तेल को काले और सफेद तिल के बीज से निकाला जाता है। यह तेल मैग्नीशियम, कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और लेसिथिन का बहुत अच्छा स्रोत है। तिल का तेल स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। आइए और किन कारणों से आपको खाना पकाने के लिए तिल के तेल का इस्‍तेमाल करना चाहिए।
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    तिल का तेल

    तिल के तेल को काले और सफेद तिल के बीज से निकाला जाता है। यह तेल मैग्नीशियम, कैल्शियम, प्रोटीन, फास्फोरस और लेसिथिन का बहुत अच्छा स्रोत है। तिल का तेल स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। यह आपके दिल पर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को संतुलित बनाये रखने में मदद करता है इसलिए तिल के तेल को हृदय रोगियों को लेने की सलाह दी जाती है। साथ ही यह उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करता है। आइए और किन कारणों से आपको खाना पकाने के लिए तिल के तेल का इस्‍तेमाल करना चाहिए।  
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    खाना पकाने के लिए तिल का तेल

    तेल के तिल में असंतृप्त वसा अम्ल बहुत अधिक होने के बावजूद इसमें ओमेगा-6 भरपूर मात्रा में होता है। साथ ही इसमें उच्चमात्रा में धुंआ होने के बावजूद, खाना पकाने के सभी तेलों में से इसका उपयोग से दुर्गन्ध होने की सम्भावना बहुत कम रहती है। ऐसा इस तेल में मौजूद प्राकृतिक ऑक्सीकरण रोधकों के कारण होता  है। हल्के तिल के तेल में एक उच्च धूम्र बिंदु होता है और यह डीप फ्राइंग के लिए उपयुक्त होता है।
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    विटामिन और मिनरल से भरपूर

    तिल का तेल विटामिन ई का एक स्रोत है। विटामिन ई एक ऑक्सीकरण-रोधी है और यह कोलेस्ट्रॉल स्तर कम करने में मददगार होता है। इसके साथ ही तिल के तेल में मैग्नीशियम, तांबा, कैल्शियम, आयरन, जिंक और विटामिन बी 6 भी मौजूद होता हैं। कॉपर गठिया में होने वाले दर्द से राहत प्रदान करता है। मैग्नीशियम नाड़ी और श्वसन स्वास्थ्य के लिए अच्‍छा होता है। कैल्शियम, कैंसर, ऑस्टियोपोरोसिस, माइग्रेन और पीएमएस सिंड्रोम जैसी बीमारी को रोकने में मदद करता है। और जिंक हड्डियों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।
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    उम्र के असर को करें बेअसर

    तिल के तेल में मौजूद विभिन्न घटकों में ऑक्सीकरण-रोधी और अवसाद-विरोधी गुण होते हैं। इसलिए इसका उपाय बुढ़ापे के कारण होने वाले परिवर्तनों से लड़ने और बेहतर अनुभव करने की भावना को बढ़ाने में मदद करने के लिए करने की सलाह दी जाती हैं।
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    दिल की बीमारियों से बचाव

    तिल का तेल का प्रयोग न केवल भारत में होता है बल्कि इसका प्रयोग लगभग पूरी एशिया में होता है। इसका प्रयोग करने के बाद खाने का स्‍वाद बदल जाता है, यानी यह बेहतर स्‍वाद के लिए भी जाना जाता है। इस तेल में एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-इन्फ्लेमेंटरी यौगिक होते हैं जो दिल की बीमारियों से लड़ने में सहायक होते हैं।
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    डायबिटीज में फायदेमंद

    2011 में हुए एक अध्‍ययन के अनुसार, तिल का तेल डायबिटीज रोगियों, विशेष रूप से टाइप 2 डायबीटीज से पीडि़त लोगों के लिए दवा का काम करता है। इसलिए अगर आप डायबिटीज को कंट्रोल में करना चाहते हैं तो अपने आहार में तिल के तेल को शामिल करें।
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    सोडियम की मात्रा कम करें

    उच्‍च ब्‍लड प्रेशर का सबसे बड़ा कारण शरीर में सोडियम का बढ़ना हैं। लेकिन तिल के तेल को अपने आहार में शामिल कर आप ब्‍लड प्रेशर को कम करने के साथ-साथ शरीर में सोडियम की मात्रा को भी कम करने में बहुत असरदार होता है।
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    मानसिक दुर्बलता दूर करें

    तिल के तेल को बुद्धिवर्धक भी कहा जाता है। तिल में प्रोटीन, कैल्शियम और बी कॉम्प्लेक्स बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता है। प्रतिदिन लगभग पचास ग्राम तिल नियमित रूप से खाने से कैल्शियम की आवश्यकता पूरी होती है। और आप मानसिक दुर्बलता, तनाव, थकान, अनिंद्रा जैसी परेशानियां ठीक होंगी।
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    कैंसर से बचाव

    तिल के तेल में एंटी-ऑक्‍सीडेंट तथा मजबूत प्राकृतिक पदार्थ होते है जो कि कैंसर विरोधी होता है। इससे शरीर में कैंसर सेल की ग्रोथ नही हो पाती। इसलिए कैंसर से  बचने के लिए भी अपने आहार में लिए तिल के तेल को शामिल करें।
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