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आखिर क्‍यों नहीं मिल पा रहा आपको सच्‍चा प्‍यार

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 20, 2014
लोग अकसर रिलेशन एक्सपर्ट्स से पूछते हैं कि मुझे लगता है कि शायद मैं कभी सच प्यार नहीं पा सकूंगी/सकूंगा? ऐसा क्या है कि कुछ लोगों को सच्‍चा प्‍यार नहीं मिल पाता है।
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    क्‍यों नहीं मिलता सच्‍चा प्‍यार

    हर किसी को नहीं मिलता यहां प्यार ज़िन्दगी में... ये नगमा आपने अकसर लोगों को गुनगुनाते सुना होगा। चलिये एक बार को प्यार तो मिल भी जाए, लेकिन सच्चा प्यार मिलना अकसर मुश्किल हो जाता है। लोग अमूमन रिलेशन एक्सपर्ट्स से पूछते हैं कि मुझे लगता है कि शायद मैं कभी सच प्यार नहीं पा सकूंगी/सकूंगा? कई लोगों के दोस्त अपने पहले, दूसरे यहां तक कि तीसरे रिलेशन में होते हैं, लेकिन वे तब तक एक भी साथी नहीं ढूंढ पाते। लेकिन भला ऐसा क्या है कि कुछ लोगों को सच्‍चा प्‍यार नहीं मिल पाता है? तो चलिये जानते हैं सच्‍चा प्‍यार न मिल पाने के पीछे के कुछ संभावित कारण।   
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    क्‍यों नहीं मिलता सच्‍चा प्‍यार
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    क्यों होता है प्यार?

    सच्चा प्यार न मिल पाने के कारणों को जानने से पहले ये जानना भी जरूरी है कि प्यार क्या और क्यों होता है। प्यार आमतौर पर पांच वजहों से होता है- रूप, व्यवहार, गुण, साथ और शारीरिक जरूरत। ये सभी कारण सुखदायी होते हैं। एक सुंदर चेहरा या शरीर आंखों को सुख देते हैं। अच्छे व्यवहार के कारण भी कोई एक या कई लोग आपको प्यारे लग सकते हैं। साथ रहने से भी आत्मीयता का जन्म होता है। गुण की वजह से भी प्यार हो सकता है, बशर्ते आपको उस गुण की कद्र करनी आती हो। शारीरिक जरूरत के कारण होने वाले आकर्षण से भी प्यार होता है। क्योंकि हर किसी में ये सारी खूबियां हों ऐसा जरूरी नहीं। तो प्यार इन पांच में से किसी एक या एक से अधिक कारणों से हो सकता है।
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    क्यों होता है प्यार?
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    संकेत न पहचानने की वजह से

    इस बात को समझने के लिए शुरुवात खुद से ही करें। कहीं ऐसा तो नहीं की आप फैंसला लेने में गलतियां कर रहे हों? कहीं आपने अपने दिमाग में ये तो तय नहीं कर लिया है की आपको सच्चे प्यार की तलाश है, और इस तलाश की कोशिश में आप हर काबिल इंसान को ये संकेत दे रहे हों कि, 'आओ, मुझे ढूंढ लो!' अगर कुछ ऐसा है तो ये अच्छी बात नहीं। ऐसे में शायद आप खुद को और दूसरों को आपको समझ पाने का मौका ही नहीं दे रहे हैं। हर इंसान में कहीं आप अपना 'सच्चा प्यार' तो नहीं खोज रहे? ऐसा कर आप उन्हें खुद से दूर कर रहे हैं। ऐसा करने पर वे आपको समझने कि कोशिश करने से पहले ही आपसे कन्नी काट सकते हैंI लोगों को जानना जरुरी है, लेकिन इसके लिए उनसे दोस्ती करना पहला कदम होता हैI
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    संकेत न पहचानने की वजह से
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    सही संतुलन न होना

    एक दूसरी परिस्थिति ये भी हो सकती है कि आपने अपने आप को इतना अलग-थलग सा रखा हुआ है कि कोई आपको ढूंढ ही नहीं पा रहा। आपने कभी सच्चे मन से दोस्त बनाने कि, लोगों से मिलने कि, उन्हें जानने कि कोशिश ही नहीं की है। दुनिया के फैलाव से हमारी ज़िंदगियां कई मायनो में सिमट सी गयी हैं। इसलिए यह ज़रूरी है कि आप इस माने में ही जिएं। छोटी-मोटी कोशिश करें, लेकिन किसी के पीछे पड़ने का कोई मतलब नहीं बनता है। जरूरत है तो बस इन दोनों बातों के बीच का संतुलन ढूंढने की।
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    सही संतुलन न होना
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    सही जगह

    बार या किसी पब जैसी जगहों पर प्यार ढूंढने वालों को प्यार मुश्किल से मिलता है। बार में तो शराब मिलती है, प्यार मिलने की यहां कोई गारंटी नहीं होती। आरे! आपके कॉलेज के दोस्त, पुराने स्कूल के साथी ये सब लोग कहां हैं? कोई ऐसा पुराना साथी जिसे आप कभी पसंद किया करते थे या फिर शायद आपको कोई तब पसंद करता हो, जिसके साथ आप अब मुलाकात कर सकते हों।  
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    सही जगह
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    खुद की निंदा करना बंद करें

    कई बार हम किसी अपराध से अभिभूत सा व शर्म और आत्म-आलोचना जैसा महसूस करते हैं। ये भावनाएं हमें रुलाने के अलावा कुछ खास नहीं करती। तो किसी रिश्ते में जाने के बाद इन चीजों को भूलें और खुशी का आनंद लें। जब तक आप खुद को कमतर और गलत समझते रहेंगे, किसी भी रिश्ते में खुश रह पाना संभव नहीं होगा। बेहतरी की दिशा में बदलाव करते हुए बढ़ते जाने का नाम ही जीवन है।  
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    खुद की निंदा करना बंद करें
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    पहचानें कि आपने खुद ही अपने शरीर को चुना है

    कई लोग अपने शरीर और सूरत को लेकर दुविधा और ग्लानी में जीते हैं। लेकिन आपने अपने शरीर में पैदा होने के लिए खुद को स्वयं चुना है। कुछ लोग इस काम के पीछे एक ईश्वरतुल्य शक्ति, जिसे वे अलग-अलग नामों जैसे भगवान, खुदा, गौड आदि से संबोधित करते हैं, को जिम्मेदार मानते हैं। लेकिन ये ईश्वरतुल्य शक्ति आपके भीतर ही हैं और इस निर्माता ने ही किसी एक विशेष कारण के लिए विशेष रूप से आपको इस शरीर के लिए चुना है। जब आप ये समझ जाएंगे तो ये आपमें महान सशक्तिकरण का एक बीज रोपित करेगा जोकि आपको आत्म आलोचना से मुक्त करेगा और आप सच्चे प्यार को समझ और पा सकेंगे।  
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    पहचानें कि आपने खुद ही अपने शरीर को चुना है
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    प्यार आपको खुद ढूंढ लेगा

    एक कहावत है, कि प्यार अपना रास्ता बनाकर हमें किसी न किसी तरह खुद-ब-खुद ढूंढ ही लेता हैI इसलिए फ़िक्र छोड़ो और जल्दबाज़ी करना बंद करो। प्यार कोई जबरदस्ती की जाने वाली चीज नहीं। ये जब होता है तो रोके नहीं रुकता। तो जाइये मौज मस्ती कीजिए, खुश रहिए! खुश-खुश रहेंगे तो आपके इर्द-गिर्द अपने आप अच्छे लोग आएंगे और उनमे से कोई एक वो 'ख़ास' साथी भी ज़रूर होगा।
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    प्यार आपको खुद ढूंढ लेगा
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