यौवनावस्‍था के दौरान लड़कों के शरीर में होने वाले बदलाव

By:Pradeep Saxena, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 12, 2014

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बचपन के बाद किशोरावस्‍था की शुरूआत होती है और इसको ही यौवनावस्‍था भी कहा जाता है, इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं।
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    यौवनावस्‍था की शुरूआत

    बचपन के बाद किशोरावस्‍था की शुरूआत होती है और इसको ही यौवनावस्‍था भी कहा जाता है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन ने 13 से 19 के बीच के आयु को किशोरावस्‍था माना है, जिसमें शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। यह स्थिति लड़को और लड़कियों दोनों में आती है। लेकिन वर्तमान में लाइफस्‍टाइल के कारण समय से पहले ही लड़कों में यौवन का आभास होने लगता है और इसके कारण उनके व्‍यवहार में बदलाव होने लगता है।

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    यौवनावस्‍था की उम्र

    वैज्ञानिक के नजरिये से यौवन को ऐसे समय के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जब लड़कों की जननग्रन्थी, अन्य जननांग और यौन लक्षणों में विकास के साथ ही लड़कों में प्रजनन की क्षमता भी आ जाती है। 10 से 16 साल के बीच के बाद लड़कों में यौवनावस्‍था की शुरूआत होती है। लेकिन चंडीगढ़ के परास्नातक चिकित्सा विज्ञान शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) द्वारा कराये गये एक शोध के अुनसार 8 से 10 साल के बीच ही लड़कों में जल्‍द यौवन आने के लक्षण दिखने लगते हैं।

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    हार्मोन में बदलाव

    यौवनावस्‍था में लड़कों के शरीर में तेजी से हार्मोन का बदलाव होता है। इसके कारण ही उसके मनोभाव बदलते हैं। इसके कारण ही लड़कों को जवानी का एहसास होता है। यदि इस दौरान लड़कों में हार्मोन का संतुलन ठीक न हो तो इसके कारण विकास प्रभावित होता है। वास्‍तव में हार्मोन ही ऐसे कारक हैं जिनके कारण ही लड़के अपने अंदर होने वाले बदलाव को महसूस कर सकते हैं।

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    अंडकोष में बदलाव

    यौवनावस्‍था में लड़कों के अंडकोष में बदलाव होने लगता है। वास्‍तव में 13 से 14 साल में लड़कों में वीर्य बनना शुरू हो जाता है। टेस्‍टोस्‍टेरॉन हार्मोन के कारण ही वीर्य बनने की शुरूआत होती है। इस दौरान ही वीर्य को संरक्षित करना चाहिए नहीं तो शरीर कमजोर हो जाता है। यदि आपने 23 से 23 साल तक वीर्य की रक्षा की तो 50 से 55 साल तक भी आपका शरीर मजबूत रहता है।

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    लंबाई का बढ़ना

    यौवनावस्‍था में ही लड़कों की लंबाई लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ती है। यौवन का विकास होने के साथ ही लड़कों की लंबाई में अचानक बदलाव दिखते हैं और उनकी लंबाई तेजी से बढ़ने लगती है। देखती ही देखते यौवनावस्‍था में युवक का कद लंबा हो जाता है। ऐसा हार्मोंस में बदलाव के कारण होता है, क्‍योंकि इस दौरान सबसे ज्‍यादा हार्मोंस में परिवर्तन होता है।

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    मांसपेशियों में बदलाव

    हार्मोन के कारण लड़कों के शरीर में यौवनावस्‍था के समय मांसपेशियों में भी बदलाव होने लगता है। इस दौरान सबसे ज्‍यादा कंधों और सीने के पास मांसपेशियों का निर्माण होता है। मांसपेशियों के बनने के पीछे भी टेस्‍टोस्‍टेरॉन हार्मोन होता है।

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    गुप्‍तांगों पर बाल

    यौवन के दौरान लड़कों के जननांगों पर बाल निकलने लगते हैं। इस दौरान लड़के के जननांगों के साथ-साथ सीने पर हाथों में, दाढ़ी में, भुजाओं पर, और पैरों में भी बाल उगने लगते हैं। यह भी हार्मोन के कारण होता है।

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    स्‍खलन होना

    यौवनावस्‍था में लड़कों में स्‍‍खलन होता है। ज्‍यादातर ऐसा रात में सोते समय होता है। स्‍खलन कोई बीमारी नहीं है, इसके पीछे वीर्य का अधिक बनना होता है। जब लड़़कों के शरीर में अधिक वीर्य बनने लगता है तब वह स्‍खलन के जरिये बाहर निकलते हैं। स्‍खलन यानी इजैकुलेशन ज्‍यादातर रात में सोते समय होता है, इसे 'वेट ड्रीम' भी कहते हैं।

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    एक्‍ने निकलना

    लड़कों में यौवनावस्‍था के समय शरीर में तेल और पसीना उत्‍पन्‍न करने वाली ग्रंथियों भी विकसित होती हैं जिसके कारण लड़कों के चेहरे पर एक्‍ने की शिकायत भी होने लगती है। यह भी कोई बीमारी नहीं है बल्कि इस दौरान होने वाले हार्मोन में बदलाव का नतीजा है। त्‍वचा को सूखा रखकर इस समस्‍या से कुछ हद तक बचाव किया जा सकता है। आप अपने चेहरे को दिन में कम से कम दो बार धुलें।

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    कामोत्‍तेजना

    यौवनावस्‍था के समय लड़कों में कामोत्‍तेजना भी उत्‍पन्‍न होने लगती है। इस दौरान लड़कों और लड़कियों के भावावेश में बहकने की संभावना भी अधिक होती है। कई बार तो वे अपने भावों को छुपा नहीं पाते जिसके कारण गलत तरीके से यौन संबंध भी बना लेते हैं। लेकिन इस तरह से आप यौन संबंधति बीमारी के शिकार हो सकते हैं। इसलिए जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ेगी आप इसके आदी हो जायेंगे और यह आपको उतना नहीं सतायेगी।

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    आवाज में बदलाव

    इस दौरान लड़कों के आवाज में भी बदलाव होता है। कुछ लड़कों की आवाज गहरी हो जाती है, और कुछ की बोलते वक्‍त आवाज में भारीपन भी आ जाता है। हालांकि यह प्रक्रिया बहुत धीरे-धीरे होती है फिर भी कोई आवाज फटने जैसा भी अनुभव कर सकता है। यह एक स्वाभाविक और प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसमें चिन्ता की कोई बात नहीं होती।

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