व्‍यायाम के दौरान चोट से बचने के आठ उपाय

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 15, 2014

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सिक्‍स एब्‍स पैक बनाने के लिए लोग घंटों जिम में पसीना बहाते हैं और पूरी तरह से शरीर को आराम भी नहीं देते, जिसका असर मांसपेशियों पर पड़ता है और व्‍यायाम के दौरान चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है।
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    व्‍यायाम के दौरान चोट लगना

    वर्तमान में युवाओं में सिक्‍स एब्‍स पैक बनाने का क्रज बढ़ रहा है, लोग जल्‍दी से जल्‍दी अपनी बॉडी बनाने के लिए जिम में घंटों पसीना बहाते हैं। लेकिन वे इस बात से अनजान रहते हैं कि अधिक व्‍यायाम करने से भी शरीर में अकड़न, अधिक दर्द, मांसपेशियों में खिंचांव, सूजन और बार-बार चोटिल होने की संभावना बढ़ जाती है। व्‍यायाम के दौरान चोट लगने के कारण व्‍यायाम का रूटीन प्रभावित होता है, इसलिए सही तरीके से व्‍यायाम करके व्‍यायाम के दौरान लगने वाली चोटों से बचाव करने के उपाय खोंजे।

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    पूरे शरीर का व्‍यायाम करें

    अगर आप केवल एब्‍स या फिर बाजुओं का व्‍यायाम लगातार करेंगे तो इन अंगों में चोट और इस जगह की मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है। शरीर के एक हिस्से की लगातार एक्सरसाइज करने से चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए शरीर को मजबूत बनाने के साथ-साथ पूरे शरीर का व्‍यायाम करें न कि किसी एक हिस्‍से की।

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    ट्रेनर से निर्देश लें

    जिम में व्‍यायाम के दौरान चोट लगने की आशंका तब और होती है जब आप खुद से व्‍यायाम के उपकरण प्रयोग करने लगते हैं। जल्‍दबाजी के चक्‍कर में आप अधिक वजन उठाने का प्रयास करते हैं, और इसके कारण चोट लगती है। इसलिए ट्रेनर से निर्देश लेना बहुत जरूरी है। ट्रेनर आपको सही तरीके से व्‍यायाम करना सिखायेगा। इससे चोटों से बचाव करना संभव है।

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    वार्म-अप जरूरी है

    मांसपेशियों में खिंचाव और चोट लगने की आशंका तब और बढ़ जाती है जब आप बिना वार्म-अप के व्‍यायाम शुरू कर देते हैं। दरअसल हमारी मांसपेशियां ठंडी होती हैं और अगर स्‍ट्रेंथ ट्रेनिंग बिना वार्मअप के शुरू कर दिया जाये तो इनमें खिंचाव आ सकता है। इसके कारण दर्द और सूजन की समस्‍या हो सकती है। इसलिए व्‍यायाम शुरू करने से पहले शरीर का तापमान बढ़ाने के लिए वार्मअप करना बहुत जरूरी है।

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    हर रोज बदलें व्‍यायाम

    अगर आप हर रोज केवल एब्‍स बनाने वाले व्‍यायाम करेंगे तो पेट की मांसपेशियों में खिंचाव आ जायेगा। इसलिए कोशिश करें कि रोज अलग-अलग व्‍यायाम करें। क्‍योंकि शरीर की मांसपेशियां भी आराम चाहती हैं, इसके लिए हर रोज शरीर के अलग-अलग हिस्‍से का व्‍यायाम करना जरूरी है। एक जैसा व्‍यायाम करने से मेटा‍बालिज्‍म पर भी प्रभाव पड़ता है। इसलिए शरीर को सुडौल बनाने के लिए हर रोज व्‍यायाम में बदलाव करते रहें।

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    अपनी क्षमता का ध्‍यान रखें

    वर्कआउट करते वक्‍त अपनी क्षमता का ध्‍यान रखना बहुत जरूरी है। बॉडी बनाने के चक्‍कर में अधिक वजन उठाने से आपको ही नुकसान है, क्‍योंकि अधिक वजन उठाने से आपको चोट लग सकती है। आपने 10 साल बाद दोबारा वर्कआउट शुरू किया है तो उतनी तेजी न दिखायें जो 10 साल पहले थी, क्‍योंकि पहले की तुलना में आपके शरीर में उतनी ऊर्जा नहीं है जो पहले थी।

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    वर्कआउट के कपड़ों का ध्‍यान

    वर्कआउट के दौरान चोट लगने से बचाने में कपड़ों का अहम योगदान होता है। इसलिए कोशिश करें कि वर्कआउट के लिए उचित पोशाक ही पहनें। अगर आपने बहुत साल पहले जूता खरीदा है और उसे पहनकर दोबारा रनिंग करना चाहते हैं तो यह बिलकुल भी सही नहीं है। इससे पैरों में चोट लग सकती है। इससे पैर कमजोर भी हो सकते हैं।

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    आराम भी करें

    सप्‍ताह के सातों दिन व्‍यायाम करना भी जरूरी नहीं है। शरीर को अच्‍छे तरीके से काम करने के लिए वर्कआउट के साथ आराम भी बहुत जरूरी है। ट्रेनर भी सप्‍ताह में 5 दिन ही व्‍यायाम करने की सिफारिश करते हैं। इससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और वे अपनी मरम्‍मत भी उचित तरीके से कर लेती हैं। अगर स्‍ट्रेंथ ट्रेनिंग कर रहे हैं तो प्रत्‍येक दो दिन के बाद एक दिन आराम जरूरी है।

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    खानपान का ध्‍यान रखें

    व्‍यायाम के साथ अगर खानपान का सही ध्‍यान न रखा जाये तो शरीर कमजोर होने लगता है, इससे चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए व्‍यायाम के साथ खानपान पर विशेष ध्‍यान दीजिए। व्‍यायाम के समय शरीर से निकलने वाले पसीने के कारण पानी की मात्रा कम होती है। ऐसे में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए खूब पानी पिएं। नियमित रूप से ऐसी डाइट लें, जिसमें पोषक तत्वों के साथ फाइबर की अधिकता हो और वसा की मात्रा कम हो। आपके आहार में विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में मौजूद हों।

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