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अपने बच्‍चे के साथ कैसे करें स्‍वस्‍थ जीवन की बात

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 06, 2014
हम सब अपने बच्‍चों को अच्‍छी आदतें सिखाना चाहते हैं। हम उन्‍हें अच्‍छे नैतिक मूल्‍य सिखाते हैं ताकि वे जीवन में अच्‍छे इनसान बन सकें।
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    बच्‍चों के साथ बातचीत

    हम सब अपने बच्‍चों को अच्‍छी आदतें सिखाना चाहते हैं। हम उन्‍हें अच्‍छे नैतिक मूल्‍य सिखाते हैं ताकि वे जीवन में अच्‍छे इनसान बन सकें। लेकिन, इसके साथ ही अपने बच्‍चों को खानपान की स्‍वस्‍थ और अच्‍छी आदतें भी सिखानी जरूरी हैं। खानपान की इन आदतों का आपके बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य पर लंबा और गहरा असर पड़ता है।

    बच्‍चों के साथ बातचीत
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    गर्भ से ही सीखते हैं आदतें

    गर्भ से ही खानपान की आदतों का सफर शुरू हो जाता है। बचपन में खानपान की जो आदतें बनती है, उनका हमारी सेहत पर काफी लंबे समय तक प्रभाव रहता है। इसलिाए माता-पिता के लिए यह बेहद जरूरी हो जाता है कि वे अपने बच्‍चों में खानपान की स्‍वस्‍थ व अच्‍छी आदतें डालें, क्‍योंकि इन्‍हीं पर निर्भर करता है आपके बच्‍चे का स्‍वास्‍थ्‍य।

    गर्भ से ही सीखते हैं आदतें
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    माहौल हो खुशनुमा

    दिन में कम से कम एक बार पूरा परिवार एक साथ भोजन करे। इससे माहौल खुशुनमा रहता है और बच्‍चा खाने का पूरा आनंद उठा पाता है। अपने बच्‍चे को धीरे खाने के लिए प्रोत्‍साहित करें। मस्तिष्‍क को यह अहसास होने में कि वह भर चुका है बीस मिनट का समय लगता है। इसके साथ ही जब आप धीरे भोजन करते हैं तो स्‍वाद आ असली आनंद उठा पाते हैं। अपने बच्‍चे के सामने कभी जल्‍दबाजी में न खायें। बच्‍चा अपने खानपान की कई आदतें आप से ही सीखता है।

    माहौल हो खुशनुमा
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    शॉपिंग में करें शामिल

    घर की रसोई के लिए खरीदारी करते समय अपने बच्‍चे को साथ ले जाएं। आपको फल और सब्जियों की खरीदारी अधिक करनी चाहिए। इससे बच्‍चे को भी इन आदतों से सीखते हैं। यह अच्‍छा अवसर होता है जब आप अपने बच्‍चे को खाद्य पदार्थों के पैकेट पर लिखे पोषक तत्‍वों के बारे में बताकर समझा सकते हैं कि कौन सा आहार उनके लिए फायदेमंद है और किस प्रकार के भोजन से उन्‍हें दूर रहना चाहिए।

    शॉपिंग में करें शामिल
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    मजा नहीं तो बचपन क्‍या

    अनुशासन के दबाव में बच्‍चों से बचपन का आनंद मत छीनिये। आखिर बचपन का मतलब ही मजा करना है। आप बच्‍चों में खानपान की स्‍वस्‍थ आदतें डालना चाहते हैं, लेकिन कभी-कभार बच्‍चों के साथ बच्‍चा बनने में कोई बुराई नहीं।

    मजा नहीं तो बचपन क्‍या
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    बच्‍चों पर न डालें जोर

    हम अकसर अपने बच्‍चों को अधिक खाने का जोर डालते हैं। हमें लगता है कि कहीं हमारे बच्‍चे सेहत और पोषण के मामले में पिछड़े न रह जाएं। लेकिन, ऐसा करके हम उनका भला नहीं करते। कभी-कभी यदि आपका बच्‍चा कम खाना चाहे, तो उस पर दबाव डालकर अधिक न खिलायें। आपके समर्थन और शिक्षा से बच्‍चा धीरे-धीरे खुद सीख जाता है कि आखिर उसके लिए क्‍या और कितना जरूरी है। उसके फैसलों का सम्‍मान करें। उसे अलग-अलग रंगों की अधिक से अधिक सब्जियां खिलायें। साथ ही उसे डेयरी उत्‍पाद व दालें इत्‍यादि भी दें। ओवरइटिंग न करने की यह आदत काफी लंबे समय तक साथ रहती है।

    बच्‍चों पर न डालें जोर
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    विज्ञापन नहीं ज्ञान है जरूरी

    आजकल हर चीज विज्ञापन के आधार पर ही बिकती है। बच्‍चों पर विज्ञापन का गहरा असर पड़ता है। वे उसी चीज को खरीदना चाहते हैं, जो वे टीवी पर देखते हैं। कंपनियां भी बच्‍चों को ध्‍यान में रखकर ही उत्‍पाद बनाती हैं। ऐसे में माता-पिता की जिम्‍मेदारी है कि वे अपने बच्‍चों को पौष्टिकता के बारे में समझायें और बतायें कि क्‍या उनकी सेहत के लिए जरूरी है और क्‍या नहीं।

    विज्ञापन नहीं ज्ञान है जरूरी
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    टीवी से रखें दूर

    आजकल के बच्‍चे दिन का काफी वक्‍त टीवी और इंटरनेट पर बिता देते हैं। इससे उनके दिन का काफी समय यूं ही बैठे-बैठे गुजर जाता है। इसके साथ ही वे काफी मात्रा में जंक फूड का सेवन भी करते हैं। इसका असर उनकी पाचन क्रिया पर पड़ता है और साथ ही वे मोटापे के शिकार भी हो सकते हैं। तो, उनके टीवी देखने के समय पर नियंत्रण लगाइए और साथ ही इस बात पर भी नजर रखिये कि वे किस प्रकार का भोजन कर रहे हैं।

     टीवी से रखें दूर
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    कुछ नया करें

    बच्‍चों के जीवन में रोमांच बनाये रखने के लिए उन्‍हें कुछ नया‍ सिखाते रहें। आप अपने बच्‍चे को कुकिंग में शामिल कर सकते हैं। इससे वे अलग-अलग पौष्टिक तत्‍वों और उनकी महत्‍ता के बारे में जानेंगे। यह जानकारी जीवन में उन्‍हें बहुत काम आएगी।

    कुछ नया करें
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    खेल के लिए करें प्रोत्‍साहित

    अपने बच्‍चे को आउटडोर गतिविधि के लिए प्रेरित करें। रोजाना कम से कम एक घंटा उसे बाहर खेलने के लिए कहें। उनके साथ पार्क में आ जाएं। यदि कुछ और संभव न हो तो तेज चाल अथवा जॉगिंग जैसे गतिविधियों में ही बच्‍चे को संलग्‍न करें। इसके अलावा आप बच्‍चे को डांस अथवा उसके पसंदीदा खेल में भी भेज सकते हैं। बचपन में बनी यह खेल की आदत जवानी के दौर तक चलती रहेगी। इससे वे तनावमुक्‍त रहेंगे और उनकी सेहत भी अच्‍छी रहेगी।

    खेल के लिए करें प्रोत्‍साहित
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