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अपने बच्चे को सजा देने के लिए कभी न करें ये 5 चीजें

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 27, 2015
उंची आवाज में बात करना या बच्चे को डांट-डपट कर उनकी भलाई के लिए ऐसा व्यवहार सही समझना माता-पिता की गलतफहमी होती है। अंजाने में कुछ बातें मां-बाप अपने बच्चों को कह देते हैं, जो उनपर आगे चल कर बुरा असर डाल सकती हैं। इन्हीं बातों का ध्यान रखना हमारे लिए अति आवश्यक है।
  • 1

    बच्चे को सजा

    बच्चों को सभ्यता और शिष्टाचार सिखाने के लिए उनपर चिल्‍लाना, मारना-पीटना और दुर्व्‍यवहार करना बहुत ही आम है। और आपको लगता है कि बच्चों पर जितनी सख्ती होगी वह उतना ही संगठित जीवन जीने के आदी होंगे। इसलिए माता पिता बच्चों को डांटने के अलावा मारने पीटने में भी संकोच नहीं करते और समझते हैं कि इस से बच्चे सुधर जाएंगे। हालांकि सजा आपके बच्‍चे को गलत से सही सीखने में मदद करने के लिए आवश्‍यक होता है, लेकिन जरूरत से ज्‍यादा सजा आपके बच्‍चे पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव हो सकता है। यहां ऐसी ही आम पांच प्रकार की सजा के बारे में बताया है जो अक्‍सर माता-पिता उपयोग करते हैं, लेकिन उन्‍हें अपने इन कार्यों पर अंकुश लगाने की जरूरत है।
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    बच्चे को सजा
  • 2

    पिटाई

    हालांकि पश्चिमी संस्कृति के विपरीत, भारतीय संस्‍कृति में पिटाई को अपराध नहीं माना जाता है। लेकिन पिटाई करते समय माता-पिता को पता ही नहीं होता कि उन्‍हें कहां रुकना है। कभी-कभी सिर्फ कुछ शब्‍दों का प्रयोग जैसे एक थपर पड़ेगा, आपके बच्‍चों को सही ट्रैक पर लाने के लिए काफी होता है। बार-बार पिटाई करना बेकार सजा है और यह आपके बच्‍चे को आपसे अलग कर सकती हैं। और उसके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य पर बुरा असर करती है।
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    पिटाई
  • 3

    बात-बात पर चिल्‍लाना

    कितने लोगों को इस बात का एहसास होता है, की ऊंची आवाज में बात करना अच्छी बात नही होती? हम अपने बच्चों को तो कम आवाज में बात करने का ज्ञान देते हैं परंतु कई बार खुद ही इस बात पर चलना भूल जाते हैं। और कुछ बातों को डांट लगाकर या चिल्‍लाकर बच्चों को कहने लगते हैं। चिल्‍लाना अक्‍सर इस बात की ओर इशारा करता है कि माता-पिता बच्चे के व्यवहार पर नियंत्रण प्राप्त करने में असमर्थ है। इसके अलावा इससे ना केवल घर में अशांति फैलती है बल्‍कि बच्‍चों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है और वह इस माहौल में अच्‍छे से बढ़ नहीं पाते।
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    बात-बात पर चिल्‍लाना
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    अंधेरे कमरे में बंद करना

    अपने बच्‍चे को सजा के रूप में कमरे में बंद करना आपको शारीरिक रूप से चोट पहुंचाए बिना एक साधारण सजा लग सकती है। लेकिन यह आपके बच्‍चे को भावनात्‍मक रूप से कमजोर कर सकती है। बच्‍चे का मन बहुत ही कोमल होता है। वह इस सजा से बुरी तरह से डर जाते हैं। अंधेरे कमरे या बॉथरूम में बंद करने से बच्‍चे में सतत अलगाव या किशोरावस्था में आत्महत्या की प्रवृत्ति पैदा हो सकती है। दुर्लभ मामलों में मादक पदार्थों के सेवन, चुनौतियां लेने से डर और जीवन के प्रति एक नकारात्मक दृष्टिकोण होने का डर भी रहता है।
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    अंधेरे कमरे में बंद करना
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    धमकी देना

    यह दंडित करने का सबसे आसान तरीका माना जाता है। आप अपने बच्‍चे को अनुशासन में रखने का सही और समझदार तरीका सोचना नहीं चाहते, तभी आप धमकी का सहारा लेते है। और बच्‍चों को कोसने के लिए बोर्डिंग स्‍कूल में भेजने या रिश्‍तेदार के पास भेजने की धमकी देते हैं। बच्‍चों को समझ नहीं आता कि उनके पेरेंट्स उसके प्रति इतने क्रूर और सख्‍त क्‍यों है। जिससे आपके और आपके बच्‍चों के संबंध बिगड़ जाते हैं।
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    धमकी देना
  • 6

    नकारात्‍मक बोलना

    कई माता पिता अपने बच्‍चे को आलसी या कामचोर कह कर पुकारते हैं। इससे बच्‍चे के अंदर नकारात्‍मकता भर जाती है। पैरेंट्स को इस बात का ध्‍यान रखना चाहिये कि वह अपने बच्‍चे को क्‍या बोल रहे हैं। ऐसा नहीं करने पर आगे चल कर उनके बच्‍चे वैसे ही बन सकते हैं।
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    नकारात्‍मक बोलना
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    दूसरों के साथ तुलना

    घर में कोई मेहमान आया नहीं कि लगे अपने बच्‍चे की तुलना पड़ोसी के बच्‍चे से करने। अपने बच्‍चे की बाहर के किसी बच्‍चे के साथ तुलना करना बहुत ही आम होता है। लेकिन आप जानते हैं कि ऐसा करने से बच्‍चा हमेशा धोखा महसूस करता है। माता पिता को लगता है कि तुलना बच्‍चे को प्रेरित करती है लेकिन होता इससे विपरीत है। तुलना बच्‍चे को इतनी गहराई से ठेस पहुंचाती है कि वह कमजोर और आत्‍म-सम्‍मान कम होने लगता है। इसके अलावा यह उच्‍च लक्ष्‍य पाने के लिए बच्‍चे को रोकता है।
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    दूसरों के साथ तुलना
  • 8

    अपने बच्‍चे की उसी के भाई या बहन से तुलना

    सबसे खराब बात है कि आप अपने बच्‍चे को उसी के भाई बहन से तुलना कर रहे होते हैं। या अपने एक बच्‍चे से दूसरे बच्‍चे को डांटने के लिए कहते हैं। ऐसा करने से  बच्‍चों के बीच प्रतियोगिता का भाव बना जाता है। और वह सोचते हैं कि वह एक न हो कर अलग-अलग हैं।
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    अपने बच्‍चे की उसी के भाई या बहन से तुलना
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