तन और मन के बेहतर संतुलन के लिए करें ये 2 योगासन

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 04, 2015

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कई बार शरीर के अनुसार मन काम नहीं करता और कई बार मन की शरीर नहीं सुनता, ऐेसे में दोनों के बीच तालमेल नहीं हो पाता और तनाव होता है, लेकिन अगर आप इन 2 योगासन का नियमित अभ्‍यास करें तो दोनों के बीच बेहतर तालमेल होगा।
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    मानसि‍क और शारीरिक संतुलन के लिए योग

    आज के व्‍यस्‍त जीवन में, जहां दौड़-भाग जीवन का हिस्‍सा बन गया है। वहां खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से स्‍वस्‍थ और संतुलित रखने की कोशिश करने का समय बहुत सीमित हो गया है। तो बजाय आपको यह कहने के कि आप अपने व्‍यस्‍त जीवन में एक और चीज को जोड़े हम आपको बतायेगें कि कठोर नहीं बल्कि होशियार तरीके से आप मानसिक और शारीरिक संतुलन को कैसे बना सकते है।  
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    मालासन और उत्तानासन

    जी हां, दो योग इसमें आपकी मदद कर सकते हैं- इन योग आसन को आप तब कर सकते हैं जब आप कुछ और नहीं कर रहें; यह योग आसन हिरन से भी तेज बना सकते हैं। भविष्यवक्ताओं का कहना है कि इस की मदद से आप जमीन पर असानी से बैठ और बिना किसी सहायता के तेजी से खड़े हो सकते हैं। मालासन और उत्तानासन इन महत्‍वूपर्ण शारीरिक गतिविधियों का अभ्‍यास करने का सबसे अच्‍छा तरीका है।
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    योग के फायदे

    योगाभ्यास एक ऐसी क्रिया है जो किसी भी व्‍यक्ति को स्वस्थ और निरोग रखने में पूरी तरह से मदद करता है। इन योग के द्वारा आप कई तरह की बीमारियों के मूल को ठीक कर सकते हैं, साथ ही यह आपको शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर स्वस्थ रहने में मदद करता है। योग केवल शारीरिक अभ्यास का नाम नहीं है, बल्कि यह शरीर को प्रकृति के साथ संतुलन बैठाने की ऐसी अद्भुत क्रिया है, जो मानसिक तनाव या दवाब से शरीर में उत्पन्न होने वाले हानिकारक केमिकल से होने वाले विकारों से बचाकर मानव के शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं के सर्वागीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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    मालासन

    मालासन हिप जोड़ों में लचीलापन बनाये रखने में मदद करता है। यह लचीलापन हम सभी को जन्‍म के समय मिलता है, लेकिन उम्र के साथ इसमें कमी आने लगती है। हिप जोड़ों को भावनाओं के धारक के नाम से बुलाया जाता है। अगर हिप जोड़ लचीला और आसानी से मूव होता है, तो बजाय कि भावनाओं को शरीर के भीतर गैर-लाभकारी ऊर्जावान पैटर्न में बंद करने के, आप इनको जारी करने में सक्षम होते हैं।   
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    मालासन के फायदे

    इसके अलावा, चलने और खड़े होने के दौरान हमारे शरीर के कोमल हिप जोड़ में उचित संरेखण महत्‍वपूर्ण होता है। आज के समय में हम अपना ज्‍यादातर समय कुर्सी, कार और आगे झुकाव देकर बिताते हैं। यह मुद्राएं हमारे पैर, कंधों, गर्दन और पीठ की मांसपेशियों में कसाव लाती है। ऊपरी पीठ और गर्दन में अकड़न सीधे रूप से सिरदर्द, तेजी से उम्र बढ़ना और हड्डी गिरावट से संबंधित हो सकता है। लेकिन मालासन को करने से आपको पीठ दर्द से राहत मिलेगी, आपकी जांघों और पेट से चर्बी कम होगी।
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    मालासन की विधि

    आप स्क्वाटिंग पोजिशन में बैठ जाइए, यानी की अपने शरीर का सारा वजन टांगों और पैरों पर डालकर बैठ जाएं। आपके पैर सामने की तरफ नहीं, बल्कि दाएं पैर को दाहिनी ओर घुमा लें और बाएं पैर को बाईं तरफ। इस पोजिशन में बैठने के लिए हाथों को अपने सामने जमीन पर जमा लें। आपके दोनों हाथों में भी 2 फीट का गैप होना चाहिए।
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    उत्तानासन

    उत्तानासन के नियमित अभ्यास से शरीर के पिछले भागों का सम्पूर्ण व्यायाम हो जाता है और इन भागों में मौजूद तनाव दूर होता है। यह पैरों के पार्श्व भागों को लचीला और मजबूत बनाने वाली योग मुद्रा है। इस आसन से रीढ़ की हड्डियों में पर्याप्त खींचाव होता है। गर्दन और मस्तिष्क को रिलैक्स मिलता है। मानसिक तनाव कम होता है और आपको शांति मिलती है।
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    उत्तानासन की विधि

    उत्तानासन का अभ्यास करते समय सीधा खड़े हो जाएं। सांस लेते हुए हाथों को सिर के ऊपर ले जाएं और शरीर को ऊपर छत की ओर खींचे। इस स्थिति में कंधों को रिलैक्स रखना चाहिए। हिप्स से शरीर को आगे की ओर झुकाएं। इस अवस्था में पैरों को जमीन पर दृढ़ता के साथ टिकाए रखना चाहिए। सिर और गर्दन को आराम की मुद्रा में जमीन की ओर रखें और हिप्स को छत की तरफ उठाएं। हथेलियों को पैरो के दोनों ओर रखें। फिर सांस छोड़ते हुए पार्श्व भाग को आगे ले जाएं और तलवों को जमीन की ओर दबाएं। इस मुद्रा में 10 सेकेण्ड से 1 मिनट तक बने रहें।
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