इन पोषक तत्वों की कमी से हो सकता है डिप्रेशन

By:Shabnam Khan , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 17, 2014

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कुछ ऐसे पोषक तत्व होते हैं जिनकी कमी से डिप्रेशन होने की आशंका होती है।
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    सिर्फ मनोरोग नहीं है डिप्रेशन

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया में आज डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। भारत में मानसिक रोगियों की मौजूदा संख्या करीब 24 करोड़ है। इनमें से कम से कम 20 पर्सेंट लोग डिप्रेशन की चपेट में हैं। डिप्रेशन सिर्फ दिमागी बीमारी नहीं है। शरीर में कई और कमियां होने की वजह से भी डिप्रेशन होता है। जिसमें प्रमुख है पोषण की कमी से। आइये जानते हैं कुछ ऐसे ही कारणों के बारे में।

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  • 2

    विटामिन डी

    विटामिन डी की कमी का संबंध डिप्रेशन, डीमेंटिया और ऑटिज्म से है। सर्दियों के महीनों में खासतौर पर हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाती है। इसका कारण ये है कि इस समय सूर्य का प्रकाश नहीं मिल पाता, जो कि विटामिन डी का प्रमुख स्रोत है। इस कमी से बचने के लिए हमें विटामिन डी के विकल्प अपनाने की जरूरत है। कॉड लीवर ऑयल, अंडों और फैटी फिश में भी विटामिन डी भरपूर मात्रा में होता है। यह दूध में भी पाया जाता है।

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  • 3

    विटामिन बी समूह

    विटामिन बी समूह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के सही से काम करने में मदद करता है। यह ब्रेन, स्पाइनल कोर्ड और नसों के कुछ तत्वों की रचना में भी सहायक होते हैं। विटामिन बी समूह की शरीर में अगर कमी हो जाए तो स्मरण शक्ति कमजोर हो सकती है। आप अचानक थकान महसूस कर सकते हैं, डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं।

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  • 4

    मैग्नीशियम

    मैग्नीशियम एक रासायनिक तत्व है जो हमारे लिए बहुत उपयोगी है। शरीर का आधे से ज्यादा मैग्नीशियम हमारी हड्डियों में पाया जाता है जबकि बाकी शरीर में हाने वाली जैविक कियाओं में सहयोग करता है। मैग्नीशियम मस्तिष्क सहित शरीर के अनेक ऊतकों के सही ढंग से काम करने के लिए अनिवार्य है। मैग्‍नीशियम की भरपूर मात्रा न लेने से सिरदर्द, अनिद्रा, तनाव आदि की शिकायत हो सकती है। इ‍सलिये डिप्रेशन और अवसाद से बचने के लिए मैग्‍नीशियम का भरपूर सेवन करना चाहिए।

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    ओमेगा-3 फैटी ऐसिड

    ओमेगा-3 फैटी ऐसिड दिमाग के सुचारू रूप से काम करने में बहुत खास भूमिका निभाता है। इस पोषक तत्व पर हमारी याद्दाश्त के साथ साथ मिजाज (मूड) भी निर्भर करता है। शरीर अपने आप इस तत्व का निर्माण नहीं करता इसलिए आपको या तो इसे खाने की जरूरत है या फिर सप्लीमेंट्स लेने की।

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  • 6

    आयरन

    आयरन की कमी की समस्या महिलाओं में आम है। लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं, और 50 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को आयरन की कमी होती है। वहीं केवल तीन प्रतिशत पुरूषों में ये कमी पाई जाती है। आयरन की कमी से ऐनीमिया हो जाता है। इसके लक्षण डिप्रैशन के लक्षणों की तरह ही हैं - थकान, चिड़चिड़ापन, दिमागी धुंधलापन।

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    जिंक

    ज़िंक बायोकैमिकल रिएक्शन से बचाता है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और श्वेत रुधिर कणिकाओं की संख्या बढ़ाकर एंटीबॉडीज़ के उत्पादन को सुगम बनाता है। ज़िंक की कोइ दैनिक खुराक तय नहीं है, और मीट, समुद्री भेजन और दूध-मेवे इसके प्रमुख स्रोत हैं।

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    फोलेट

    जिन लोगों में फोलेट का स्तर निम्न होता है उन पर डिप्रेशन की दवाओं का केवल 7 प्रतिशत असर होता है। इस वजह से काफी मनोचिकित्सक डिप्रेशन के इलाज और डिप्रेशन की दवा का असर बढ़ाने के लिए, डेप्लिन नाम की फोलेट की दवा खाने की सलाह देते हैं। अगर आप इस समस्या से बचना चाहते हैं तो गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां, बींस, सिट्रस फल व जूस लें।

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  • 9

    ऐमीनो ऐसिड्स

    प्रोटीन के बिल्डिंग ब्लॉक्स आपके दिमाक को सही ढंग से काम करने में मदद करते हैं। ऐमीनो ऐसिड्स की कमी से सुस्ती, एकाग्रता की कमी व डिप्रेशन जैसी समस्याएं पैदा हो जाती हैं। ऐमीनो ऐसिड्स के अच्छे स्रोत बीफ, अंडे, मछली, बींस, सीड्स और नट्स हैं। रोजमर्रा की डाइट में इन्हें शामिल करने से शरीर में ऐमीनो ऐसिड्स की कमी धीरे धीरे दूर हो जाती है।

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