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कहीं बड़ी बीमारी का संकेत तो नहीं पैर सुन्‍न होना

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 23, 2016
ज्यादा देर एक ही मुद्रा में बैठे रहने के कारण कई बार पैर सुन्न हो जाते है। हम इसे सामान्य बात मान लेते है पर ये एक बीमारी का संकेत भी हो सकता है। हार्ट अटैक, ब्रेन अटैक जैसे ही लेग अटैक भी होता है। गौरतलब है कि इस बीमारी के बारे में लोग कम जानते है और ये बाकी अटैक की तुलना में ज्यादा खतरनाक है।
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    क्या होता है लेग अटैक

    क्रिटिकल लिंब इस्कीमिया (सीएलआई) या लेग अटैक की समस्या ज्यादातर मधुमेह से रोगियों में देखने को मिलती है। इसमें पैरों की उंगलियों से नसे अवरूद्ध होना शुरू हो जाती है। जिससे रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। कई बार इसकी वजह से मरीजों को अपने अंग तक कटवाने पड़ जाते हैं, जबकि संक्रमण ज्यादा फैलने की स्थिति में यह जानलेवा भी हो सकता है। सामान्यत: पुरुषों में ये समस्या महिलाओं की तुलना में ज्यादा होती है।
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    क्या होता है लेग अटैक
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    क्या होते हैं कारण

    लेग अटैक 60 वर्ष से अधिक के पुरुष व रजोनिवृत्ति के बाद की महिलाएं में ज्यादा होने का खतरा रहता है। ज्यादा धूम्रपान करने वाले, मधुमेह रोगी, उच्च कोलेस्ट्रॉल व उच्च रक्तचाप से परेशान लोगों को भी सावधान रहना चाहिए। जिन परिवार में नसों की बीमारी का पारिवारिक इतिहास हो, अत्यधिक वजन या मोटापा व अव्यवस्थित जीवनशैली रहती हो उन्हें अपनी जीवनशैली में तुंरत सुधार लाना चाहिए।
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    क्या होते हैं कारण
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    लेग अटैक के लक्षण

    इस रोग में रक्त धमनियों की भीतरी दीवारों पर वसा जम जाती है। ये हाथ-पांवों के ऊतकों में रक्त प्रवाह को रोकता है। इस रोग के प्राथमिक चरण में चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर पैरों और कूल्हों थकाना या दर्द महसूस होता है। अन्य लक्षणों में दर्द, सुन्न होना, पैर की पेशियों में भारीपन शामिल है। शारीरिक काम करते समय मांसपेशियों को अधिक रक्त प्रवाह चाहिए होता है। यदि नसें तंग हो जाएं तो पेशियों को पर्याप्त खून नहीं मिलता। आराम के वक्त रक्त प्रवाह की उतनी आवश्यकता नहीं होती, इसलिए बैठ जाने से दर्द भी चला जाता है। इसलिए शुरू में मरीज शारीरिक श्रम के वक्त दर्द की शिकायत करते हैं। फिर जैसे-जैसे मर्ज बढ़ता जाता है, मरीज को आराम के समय भी दर्द रहने लगता है।
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    लेग अटैक के लक्षण
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    एंडोवस्कुलर उपचार

    इसमें एक कैथेटर या छोटी ट्यूब मस्तिष्क की धमनी में डालते हैं। इसे जांघ के पास से वहां तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद एक सूक्ष्म कैथेटर धमनी के फूलने के स्थान पर पहुंचाया जाता है। अवरुद्ध धमनियों को खोलने के लिए कैथेटर से छोटे बैलून को धमनियों में प्रवेश कराते हुए एंजियोप्लास्टी भी की जा सकती है। बैलून को फुलाते हैं जिससे धमनियां खुल जाती हैं और रक्त का प्रवाह होने लगता है। इसके बाद धातु से बना स्टेंट नामक उपकरण प्रवेश कराया जाता है। अन्य उपचार अथ्रेक्टॉमी के तहत धमनियों के भीतर जमी परत हटाने के लिए कैथेटर के साथ घूमते हुए ब्लेड का इस्तेमाल किया जाता है।
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    एंडोवस्कुलर उपचार
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    धमनी की सर्जरी

    अगर धमनियां इस हद तक अवरुद्ध हों कि एंडोवस्कुलर चिकित्सा कारगर न हो तो सर्जरी की सलाह दी जाती है। इसके अंतर्गत प्रभावित हिस्से को हटा दिया जाता है या मरीज के ही अन्य नस या कृत्रिम प्रत्यारोपण की मदद से बाईपास सर्जरी की जाती है। कुछ मामलों में सर्जन ओपन सर्जरी का भी सहारा लेते हैं, जिसके अंतर्गत अवरोधों को बाहर निकाल वर्तमान धमनी को क्रियाशील बना दिया जाता है। अंग विच्छेदन अंतिम विकल्प के तौर पर अंगूठे, पैर के अन्य हिस्से या पूरे पैर को काटना होता है। निदान में चूक या देरी होने पर सीएलआई के 25 प्रतिशत मामलों में अंग को काट कर हटाना पड़ता है।
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    धमनी की सर्जरी
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