अपनी नकारात्‍मक भावनाओं को क्‍यों करें स्‍वीकार

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 18, 2014

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जीवन को खुशहाल और स्‍वस्‍थ बनाने के लिए नकारात्‍मकता को स्‍वीकार करना बहुत जरूरी है, क्‍योंकि यह आपकी कमियों को दूर कर अच्‍छाई लाने का बेहतर प्रयास है।
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    नकारात्‍मक भावनाओं को स्‍वीकारें

    सफलता के लिए सकारात्‍मक भावना का होना बहुत जरूरी है, और ऐसा माना जाता है कि बिना सकारात्‍मक सोच के व्‍यक्ति आगे नहीं बढ़ सकता है। लेकिन शायद यह भी सच है कि सकारात्‍मकता और नकारात्‍मकता एक साथ चलती हैं। अगर आप जीवन के हर पहलू को सकारात्‍मक तरीके से सोचेंगे तो कहीं न कहीं आपको मुश्किल का सामना करना पड़ेगा। इसलिए मन में आने वाली नकारात्‍मक भावनाओं को नजरअंदाज किये बगैर इसे स्‍वीकार कीजिए। इससे मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से फायदा होता है।
    छाया आभार - गेटी इमेज

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    लक्ष्‍य पाने में आसानी

    जीवन सभी व्‍यक्ति के जीवन का उद्देश्‍य होता है और अपने उद्देश्‍य के साथ ही व्‍यक्ति अपने लक्ष्‍य की तरफ बढ़ता है। लेकिन लक्ष्‍य को पाना उतना असान नहीं है, इसके लिए बहुत मेहनत की जरूरत होती है। जीवन के कई उतार-चढ़ाव का सामना भी करना पड़ता है। सकारात्‍मक भावना के साथ आप आगे बढ़ सकते हैं लेकिन नकारात्‍मक भी होना जरूरी है। क्‍योंकि आप पूर्ण नहीं हैं, आपके अंदर कई खामियां हैं और उन्‍हें दूर किये बिना आप किसी भी लक्ष्‍य को पाने में सफल नहीं हो पायेंगे।
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    खुद का अवलोकन होता है

    अपने आसपास के वातावरण के साथ अपने आसपास मौजूद लोगों के बारे में जानकर और उनकी मानसिकता को समझकर ही आप अपने आसपास का माहौल अपने अनुकूल बना सकते है। लेकिन दूसरों के बारे में सोचने के बजाय अपने अंदर का मुल्‍यांकन कीजिए। जब आप अपना मूल्‍यांकन करेंगे तो आपको अपनी खामियों के बारे में पता चलेगा। अपनी खामियों और अपने नकारात्‍मक पहलू को जानकर दूसरों से आप अच्‍छे तरीके से व्‍यवहार कर सकते हैं।
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    दिनचर्या को सुधारे

    एक्‍सपेरिमेंट सोशल साइकोलॉजी में छपे एक शोध की मानें तो जो लोग अपने जीवन में नकारात्‍मकता को स्‍वीकार करते हैं उनकी दिनचर्या में सुधार होता है। इस शोध की मानें तो अगर आप अपने जीवन से संबंधित नकारात्‍मक बातों के बारे में जानकर उन्‍हें स्‍वीकार कर लेंगे तो उसे दूर करने के प्रयास भी करेंगे। इससे धीरे-धीरे आपकी बुरी और खराब आदतें दूर होती जायेंगी और आपकी दिनचर्या में सुधार हो जायेगा।
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    उत्‍साह बढ़ता है

    अगर आप चीजों को अच्‍छे तरीके से करना चाहते हैं तो अपने अंदर की नकारात्‍मकता की पहचान कीजिए। नकारात्‍मक भावनाओं और नकारात्‍मक विचारों को जानने के बाद अगर व्‍यक्ति कोई काम करता है तो वह अधिक उत्‍साही हो जाता है। अगर आपको पता है कि आपके अंदर नकारात्‍मकता और आपको बेहतर करना है तो आप अधिक उत्‍साह और जोश के साथ काम को अंजाम देंगे ताकि आप कम गलतियां करें और आपका प्रदर्शन दूसरों से बेहतर होता है।
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    उलझनों से बचाव

    जीवन इतना आसान नहीं है, जीवन के हर कदम पर मुसीबतें और उलझनें हैं। उलझनें और बढ़ जाती हैं जब आपके अंदर दिखावा अधिक होता है। आप दूसरों के सामने दिखावा करते हैं। इसके कारण आपसे लोगों की आकांक्षायें बढ़ जाती हैं और आप हमेशा उलझनों में फंसे रहते हैं। अगर आप दिखावा नहीं करेंगे बल्कि अपनी हकीकत से लोगों को रूबरू करायेंगे तो इस तरह की समस्‍यायें नहीं होंगी। क्‍योंकि लोगों को आपकी वास्‍तवकता पता होगी और आपसे उसी तरह की आंकाक्षायें भी होंगी।
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    प्रसन्‍नता मिलती है

    आपको खुशी तभी मिलेगी जब आपको अंपने खूबियों का पता चल जायेगा। खूबियों को जानने के लिए जरूरी है आपके अंदर के नकारात्‍मक विचार आपसे दूर हो जायें। ऐसा तभी संभव है जब आप नकारात्‍मकता को स्‍वीकार कर लेंगे। नकारात्‍मकता स्‍वीकार करने के बाद दुख, निराशा, हीनभावना खुद-ब-खुद आपसे दूर होते जायेंगे। आपके अंदर क्रोध और वैमनस्‍य की जगह खुशी और प्रसन्‍नता वाली भावनाये विकसित होंगी। इसलिए प्रसन्‍न रहने के लिए नकारात्‍मकता को स्‍वीकार कीजिए।
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    आत्‍म-जागरुकता के लिए

    जीवन को खुशहाल बनाना हो, लक्ष्‍य को पाना हो, जीवन में संतुलन बनाना हो, लोगों को अपनी क्षमता का बोध आदि के लिए आत्‍म-जागरुकता की बहुत जरूरत होती है। क्‍योंकि इन सभी जगहों पर आप तभी सफल हो सकते हैं जब आप अपने बारें में जानते हों। और आप तभी अपने बारे में अच्‍छे से जान पायेंगे जब आपको अपने अंदर की अच्‍छाई और बुराई दोनों के बारे में पता होगा। इसलिए जीवन को सरल और साधारण बनाने के लिए नकारात्‍मकता को स्‍वीकार करना बहुत जरूरी है।
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