सेप्सिस या ब्‍लड पॉइजनिंग के लिए प्राकृतिक उपचार

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 16, 2015

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ब्‍लड में बैक्‍टीरिया के संक्रमण से फैलने वाली बीमारी है सेप्सिस, शुरूआती अवस्था में ही इसका उपचार करना बेहतर नहीं तो यह घातक बन सकती है, इसके संक्रमण को रोकने में ये प्राकृतिक उपाय आपकी मदद करेंगे।
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    क्‍या है सेप्सिस या ब्‍लड पॉइजनिंग

    वैसे तो सभी प्रकार के संक्रामक रोग घातक होते हैं लेकिन ब्‍लड में बैक्‍टीरिया के संक्रमण द्वारा फैली बीमारी यानी सेप्सिस जानलेवा भी साबित हो सकती है। ब्‍लड में होने वाले सेप्सिस नाम के संक्रमण में प्रार‍ंभिक लक्षण जैसे दिल की धड़कन बढ़ना, तेजी से सांस चलना आदि दिखाई देती है। इस संक्रमण में व्यक्ति के रक्त में श्वेत रक्त कणिकाओं की संख्या बहुत अधिक बढ़ जाती है, जिससे अंततः व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। इसके उपचार के लिए प्राकृतिक तरीकों को आजमायें।
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    प्राकृतिक उपचार से सेप्सिस पर रोक

    सेप्सिस एक ऐसी बीमारी है जिसमें इंसान का खून बैक्टीरिया से लड़ने के लिए सेंसिटिव हो जाता है। शरीर में एंटी-बैक्टीरियल हार्मोन इतने अधिक बनने लगते हैं कि वह अपने ही शरीर को नुकसान पहुंचाने लगता है। इसके इलाज के लिए संक्रमण की शुरूआत में एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं और कोशिश की जाती है कि संक्रमित अंग को आसानी से संक्रमण मुक्त कर सके। सेप्सिस संक्रमण का सबसे अच्छा इलाज है कि शुरूआती अवस्था में ही इसका पता लगाकर संक्रमण को रोक देना चाहिए। इसके अलावा कुछ प्राकृतिक उपायों से भी आप इसे होने से रोक सकते हैं। आइए ऐसे ही कुछ प्राकृतिक उपायों की जानकारी लेते हैं हमारे इस स्‍लाइड शो में।   
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    विटामिन बी का सेवन

    विटामिन बी जिसमें बी-6 और बी-12 भी शामिल हैं। लीवर के कार्यों को अच्‍छे तरह से करने और रेड ब्‍लड सेल की तेजी में वृद्धि में मदद करता है। जिससे सेप्सिस से  तेजी से रिकवरी होती है। दूध, दही, पनीर भी विटामिन बी 12 के बेहतरीन स्रोत हैं। और विटामिन बी 6 के बेहतरीन स्रोतों में मांस, साबुत अनाज, मशरूम, पालक, शलजम, लहसुन, फूलगोभी, पत्तागोभी, मछली, हरी फलियां, टमाटर, सरसों के साग, ब्रोकली, गाजर, आलू, शकरकंद, केला, अंगूर, अंजीर, अंडे, अखरोट शामिल है।
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    एचिनासा

    एचिनासा प्रतिरक्षा प्रणाली रक्षक के रूप में जाना जाता है, और यह सेप्सिस के लिए भी बहुत अच्‍छा घरेलू उपाय है। यह आपको आसानी से चाय के रूप में उपलब्‍ध हो जाती है और अमेरिका में रोगियों द्वारा इस्‍तेमाल की जाने वाली दस प्राकृतिक उत्‍पादों की सूची में आती है। एचिनासा से बना काढ़ा इम्‍यूनिटी बढ़ाने में मददगार होता है। दो चम्‍मच एचिनासा को एक कप उबलते पानी में मिलाकर मिश्रण बना लें और इस मिश्रण को दिन में दो से तीन बार लें।
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    ग्रीन टी

    ग्रीन टी को कैमेलिया साइनेन्सिस नामक पौधे की पत्तियों से बनायी जाता है। इसके बनाने की प्रक्रिया में ऑक्सीकरण न्यूनतम होता है। इसके सेवन के काफी लाभ होते हैं। हाल ही में हुए एक नये अध्‍ययन से पता चला है कि ग्रीन टी सेप्सिसीमिया के लिए एक चमत्‍कार इलाज के रूप में जाना जाता है। इसमें मौजूद चिकित्‍सकीय गुणों के कारण यह सेप्सिस के घातक प्रभावों को उल्‍टा करने में सक्षम बनाता है।
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    लहसुन

    लहसुन सेप्सिस के इलाज का एक और प्रभावी उपचार है। इसमें हर्ब में मौजूद एलिसीन नामक तत्‍व पूरे शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता है। यह संक्रमण से लड़ने और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में भी मदद करता है। इस उपाय को करने के लिए लहसुन की एक कली को छीलकर काट लें और इसे शहद के एक चम्‍मच के साथ मिलाये। इस मिश्रण का सेवन हर सुबह करने से शरीर की संक्रमण से लड़ने क्षमता और सेप्सिस के इलाज में मदद मिलती है।
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    शहद

    मलाया यूनिवर्सिटी द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, शहद सेप्सिस के उपचार का महत्वपूर्ण विकल्प है। रिसर्च से पता चला है कि शहद एक इम्‍यूनोमोड्यूलेटर के रूप में काम करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को व्यवस्थित करता है, जिससे सेप्सिस के उपचार में सुधार होता है। दिन में दो बार शहद के दो बड़े चम्‍मच ले और अच्‍छे परिणाम पाने के लिए एक दिन में कम से कम एक बार प्रभावित घाव पर शहद का लेप लगाये।
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    हल्दी

    2012 में ओरेगन स्‍टेट यूनिवर्सिटी द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में महत्‍वपूर्ण खोज प्रस्‍तुत की गई इसके अनुसार नियमित रूप से हल्‍दी के सेवन और इसमें पाये जाने वाले महत्‍वपूर्ण कुरकुरमीन नामक तत्‍व के कारण, रक्‍त में प्रोटीन के स्‍तर में वृद्धि पाई जाती है। जब आपके रक्‍त में प्रोटीन अधिक से अधिक मात्रा में होता है तब संक्रमण से लड़ने और रोकने बहुत मदद मिलती है, इस तरह से हल्‍दी सेप्सिस के इलाज का कारगर विकल्‍प है। इसके अलावा हल्दी एंटीबायोटिक दवाओं की तरह लालिमा, सूजन और दर्द को कम करने में मदद करती है।
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