वॉटर प्‍यूरीफायर से जुड़े इन मिथक को जानें

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 18, 2015

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नए जमाने की जल जनित बीमारियों का मुकाबला करने के लिए हालांकि वॉटरफिकेशन कंपनियां लगातार नए प्रोडक्‍ट और सुपीरियर टेक्नोलॉजी को लेकर आ रही है। लेकिन अपने घर के लिए सही प्‍यूरीफायर चुनने की बात आने पर अक्‍सर हम गुमराह हो जाते हैं।
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    शरीर के लिए पानी की जरूरत

    पानी, हमारे शरीर की संरचना के 70 प्रतिशत से अधिक का निर्माण करता है। पानी हमारे शरीर के लिए अत्‍यंत प्रभावशाली और महत्‍वपूर्ण है। यह शरीर को शक्ति और अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य को बनाये रखने की क्षमता प्रदान करता है। हालांकि, पानी की गुणवत्‍ता हाल के वर्षों में काफी खराब हो गई है और इसलिए पानी प्रदूषण से जुड़ी कई समस्‍याएं भी बहुत बढ़ गई है।
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    वॉटर प्‍यूरीफायर से जुड़े मिथक

    इन समस्‍याओं के समाधान के लिए वॉटरफिकेशन कंपनियां नए जमाने की जल जनित बीमारियों का मुकाबला करने के लिए लगातार नए प्रोडक्‍ट और सुपीरियर टेक्नोलॉजी को लेकर आ रही है। नतीजतन, जब उपभोक्‍ताओं को अपने घरों के लिए सही प्‍यूरीफायर चुनने की बात आती है, तो वह अक्‍सर गुमराह हो जाते हैं। बहुत से ऐसे मिथक है, जिनके चलते वह सही तरह का वॉटर प्‍यूरीफायर चुनने में असमर्थ होते हैं।
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    मिथक # 1 रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) नवीनतम तकनीक है।

    अधिक संख्‍या में लोग आरओ को सबसे अच्‍छा और नवीनतम तकनीक मानते हैं। यही कारण है कि लोग आरओ को सबसे ज्‍यादा चुनते हैं। भारत में पानी की स्थिति 17 अलग-अलग प्रकार की होती है, और कोई भी सभी के लिए ऐसी फिट टेक्‍नोलॉजी नहीं है, जिसे पानी को शुद्ध करने के लिए अपनाया जा सकें। पानी की गुणवत्ता की जांच भौगोलिक के बीच ही नहीं बल्कि दिये हुए रेडियस में होनी चाहिए।
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    आरओ से बॉडी पर प्रभाव

    दूसरा, अगर आरओ वॉटर प्‍यूरीफिकेशन का उपयोग एरिया में करता है, जहां यह आवश्‍यक नहीं है, तो डिमिनरलाइज्ड पानी बन जाता है और इसमें पानी अपव्‍यय मिल जाते हैं। डिमिनरलाइज्ड या लो मिनरल वॉटर में आवश्‍यक मिनरल की कमी पाई जाती है और इसे पीने का आदर्श पानी नहीं माना जाता है और इसलिए इसके नियमित इस्‍तेमाल से बॉडी को शारीरिक विकास के लिए आवश्‍यक पोषक तत्‍व पर्याप्‍त मात्रा में नहीं मिल पाते।
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    मिथक # 2 वॉटर प्‍यूरीफायर आवश्यक मिनरल बनाए नहीं रखते।

    यह बात सच नही है, क्‍योंकि कुछ मात्रा में कैल्शियम, मैग्‍नीशियम और नमक पहले से ही पानी में मौजूद होता है। लेकिन माना जाता है कि सभी तरह के वॉटर प्‍यूरीफायर आवश्‍यक मिनरल को दूर कर देते हैं। पानी का टीडीएस 200ppm से नीचे होने पर आरओ प्‍यूरीफायर प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। टीडीएस 200ppm से नीचे होने पर गलत तरीके के प्‍यूरीफिकेशन तकनीक का इस्‍तेमाल स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि प्‍यूरीफिकेशन के लिए आप सही तकनीक का इस्‍तेमाल करें, ताकी पानी में मौजूद सभी आवश्‍यक मिनरल को रखा जा सकें।
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    मिथक # 3 प्‍यूरीफायर के लिए पानी उबालना पर्याप्‍त है।

    यह सबसे आम मिथकों में से एक है। लेकिन तथ्‍य यह है कि पानी को उबलने से जल जनित बैक्‍टीरिया और वायरस से तो मुक्‍त किया जा सकता है, लेकिन इसका क्‍लो‍रीन सामग्री और अल्‍सर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता, और यह गंदगी और कार्बनिक और अकार्बनिक अशुद्धियों को दूर नहीं कर पाता। इसके अलावा, प्रभावी ढंग से रोग के कारण यानी सूक्ष्‍म जीवों को मारने के लिए पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालना चाहिए। दूसरा, ज्‍यादातर लोग इस बात से अनजान है कि पानी को ठंडा करने के लिए कंटेनर में रखने से, कुछ बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा फिर से हो सकता है।
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    मिथक # 4 पेट की बीमारियों से बचाता है आरओ

    यह माना जाता है कि आरओ हमे पेट संबंधी बीमारियों से बचाता है, लेकिन यह बात सही नहीं है। कंज्यूमर एजुकेशन एंड रिसर्च सेंटर ने आरओ और पानी को शुद्ध करने वाले विभिन्न उपकरणों की जांच की है। इस दौरान देश के विभिन्न शहरों में आरओ का प्रयोग करने वाले और न करने वाले घरों में बीमार पड़ने वालों का अनुपात 50:50 देखा गया। पानी को शुद्ध करने वाले उपकरणों में खास तरह की मेंब्रेन काम करती है, जो बुरे के साथ-साथ अच्छे जीवाणुओं को भी अवशोषित कर लेती है। इससे पानी में पाए जाने वाले मिनरल, शरीर में नहीं पहुंच पाते। यही जीवाणु हमें पेट संबंधी बीमारियों से बचाते हैं।
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    मिथक # 5 सभी घरों में वॉटर प्‍यूरीफायर होना चाहिए।

    यह बात बिल्‍कुल सही नहीं है। दरअसल अलग-अगल जगहों के पानी में टीडीएस का स्तर अलग-अगल होता है। इसके मानक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तैयार किए हैं। उसने 100 से 150 स्तर के टीडीएस को ठीक बताया है। इसलिए अगर आप अपने घर में आरओ या यूवी सिस्टम लगवा रहे हैं तो म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन से पानी की जांच करा लीजिए। अगर टीडीएस सामान्य से अधिक हो, तभी आरओ या यूवी लगवाना चाहिए।
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