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आमतौर पर ये यौन संचारित रोग कर सकते हैं आपको परेशान

By:सम्‍पादकीय विभाग, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 07, 2014
यौन सं‍चारित रोग ऐसे संक्रमण हैं जो यौन संपर्क द्वारा एक व्‍यक्ति से दूसरे में फैलते हैं, भारत में यौन संचारित रोगों के मरीजों की संख्‍या बहुत अधिक है।
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    क्‍या है यौन संचारित रोग

    एसटीडीज़ यानी यौन सं‍चारित रोग ऐसे संक्रमण रोग हैं जो यौन संपर्क द्वारा एक व्‍यक्ति से दूसरे में फैलते हैं। भारत में यौन संचारित रोगों के मरीजों की संख्‍या बहुत अधिक है। यौन संचारित रोगों में एड्स एक गंभीर चिन्‍ता का विषय है। यौनसंचारित रोग तीन प्रकार के होते हैं - जीवाणुओं से होने वाले (बैक्टीरियल), विषाणुओं से होने वाले (वायरल) और परजीवियों से होने वाले (पैरसिटिक)।

    क्‍या है यौन संचारित रोग
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    क्लैमिडिया

    यह एक ऐसा यौनसंचारित रोग है जो क्लैमिडिया ट्रैकोमेटिस नामक जीवाणु से होता है। क्लैमिडिया, व्‍यक्ति की  मूत्र नली यानी यूरेथ्रा, योनि या गर्भग्रीवा के आस-पास के क्षेत्र, गुदा या आंखों को संक्रमित कर सकता है। यदि आप इसका इलाज नहीं कराते तो बांझपन हो सकता है। योनि से अधिक स्राव, योनि से पीला, चिपचिपा, मवाद जैसा स्राव होना, पेशाब करते समय दर्द होना, अधिक पेशाब आना और सेक्स करते समय दर्द होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

    क्लैमिडिया
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    गोनोरिया

    यौन सं‍क्रमित यह बीमारी निसेरिया गोनोरीए नामक बैक्टीरिया से होता है, यह बहुत तेजी से फैलता है। यह आपके गले, मूत्र नली, योनि और गुदा को संक्रमित कर सकता है। असुरक्षित यौन, गुदा या मुख मैथुन करने से गोनोरिया हो सकता है। किसी दूसरे व्यक्ति में इसको लगने के लिए वीर्यपात का होना आवश्‍यक नहीं है। कुछ मामलों में गोनोरिया, महिलाओं से उनके बच्चों को भी हो सकता है। नए साथी के साथ सेक्स करने या एक से अधिक लोगों के साथ सेक्स करने से गोनोरिया होने का जोखिम बढ़ जाता है।

    गोनोरिया
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    सिफि़लिस

    यह ऐसा यौनसंचारित रोग है जो ट्रिपोनीमा पैलीडियम नामक जीवाणु से होता है। इसे ग्रेट इमीटेटर कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षणों को दूसरी यौन संचारित रोगों से अलग पहचान करना अक्सर मुश्किल होता है। सिफि़लिस का इलाज आसानी से किया जा सकता है। लेकिन इससे ग्रस्‍त अधिकांश व्यक्तियों को पता नहीं चल पाता कि उन्हें सिफि़लिस हो गया है। सिफि़लिस के कारण अंधापन, दिमागी संतुलन बिगड़ सकता है अथवा मौत भी हो सकती है। सिफि़लिस के घाव के संपर्क में आने से यह बीमारी होती है। यह असुरक्षित मुख, योनि या गुदा मैथुन करने से होता है।

    सिफि़लिस
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    जेनिटल वार्ट्स

    यह बीमारी अलग-अलग तरह के हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस से होता है। यह ठंड के कारण हुए छालों या फफोलों की तरह दिखते हैं। जिन लोगों को यह विषाणु तेजी से फैलता है, उनमें से अधिकांश को छाले नहीं पड़ते हैं। यदि आप जेनिटल हर्पीज से संक्रमित हैं तो आपके लिंग, योनि या गुदा के आस-पास छाले हो सकते हैं। जब छाले फूटते हैं तो वहां घाव बन जाते हैं। ये छाले कुछ हफ्तों या महीनों के अंतर पर फिर से निकल सकते हैं। एक बार यदि आप एचएसवी-1 या एचएसवी-2 से संक्रमित हो जाते हैं, तो इसका संक्रमण पूरे जीवन के लिए हो सकता है। अभी तक इसका कोई इलाज नहीं है, केवल छालों को दबाया जा सकता है या उनका निकलना कम किया जा सकता है।

    जेनिटल वार्ट्स
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    वाटर वार्ट्स

    वाटर वाटर्स, मोलस्कम कान्टेजिओसम नामक विषाणु से होते हैं। यह एक आम विषाणु संक्रमण है जो त्‍वचा पर बुरा असर डालता है। इसका संक्रमण होने के बाद त्‍वचा पर द्रव या पानी से भरे फफोले निकल आते हैं। आमतौर पर पानी वाले छाले अपने-आप ठीक हो जाते हैं। यह बीमारी त्वचा के किसी दूसरे की त्वचा से सीधे संपर्क में आने से हो सकती है। साथ ही किसी संक्रमित व्यक्ति के तौलिए का प्रयोग करने, उनके साथ नहाने या उनके कपड़े पहनने से भी आप इस बीमारी के श्किार हो सकते हैं।

    वाटर वार्ट्स
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    एचआईवी

    एचआईवी, ह्यूमन इम्यूनोडेफिसिएन्सी वायरस का एक संक्षिप्त रूप है, जिसके कारण एड्स होता है। यह ऐसा यौन संचारित रोग है जो रोगी की प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर देता है। एचआईवी व्‍यक्ति के इम्‍यून सिस्‍टम को इतना अधिक नुकसान पहुंचा देता है कि व्‍यक्ति दूसरे संक्रमण से निपटने में असमर्थ हो जाता है। एचआईवी संक्रमण की अंतिम अवस्था में ही एड्स होता है। अब तक एचआईवी एक लाइलाज रोग बना हुआ है। हालांकि एड्स होने से पहले आपको लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने के लिए इलाज मौजूद हैं। आजकल जो व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित हैं और इसका इलाज करा रहे हैं वह एड्स होने से पहले 20 वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।

    एचआईवी
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    हेपिटाइटिस-बी

    यह लीवर का एक ऐसा संक्रामक रोग है जो हेपिटाइटिस बी वायरस के संक्रमण के कारण होता है। अधिकांश व्यक्तियों का शरीर बिना किसी इलाज के हेपिटाइटिस-बी के संक्रमण से लड़ सकता है। लेकिन जो लोग वायरस से नहीं निपट पाते हैं उन्हें पूरे जीवन भर के लिए संक्रमण यानी क्रोनिक हेपिटाइटिस-बी हो जाता है। इन लोगों का लीवर हमेशा के लिए खराब हो सकता है और यहां तक कि उनकी मृत्यु भी हो सकती है। यह रोग संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित मुख, योनि या गुदा मैथुन करने से हो सकता है।

    हेपिटाइटिस-बी
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    एसटीडीज़ की रोकथाम

    यौन संचारित रोग ज्‍यादातर यौन संपर्क से एक व्‍यक्ति से दूसरे में फैलता है। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन का अनुमान है कि विश्‍वभर में प्र‍त्‍येक दिन ठीक हो सकने योग्‍य लगभग दस लाख से अधिक यौन संचारित संक्रमण के नए मामले सामने आते हैं। इस बीमारी के ज्‍यादातर शिकार किशोर और युवा होते हैं। एसटीडीज का अगर इलाज न किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अत: जब भी आपको यह शंका हो कि आप यौन संचारित रोग से ग्रस्‍त हैं तो तुरंत एसटीडी की जांच करवाएं।

    एसटीडीज़ की रोकथाम
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