मानसून में गर्भवती महिलाओं को बरतनी चाहिए सावधानी

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 06, 2015

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मानसून गर्भवती के लिए खतरनाक हो सकता है, क्‍योंकि मानसून अपने साथ कई प्रकार के संक्रमण और बीमारियां लेकर आता है। इसलिए गर्भवती को इस मौसम में विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।
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    मानसून में गर्भवती बरतें सावधानी

    गर्मी से बेहाल लोगों के लिए मानसून की फुहारें राहत लाती है, लेकिन यह मौसम गर्भवती के लिए खतरनाक हो सकता है, क्‍योंकि मानसून अपने साथ कई प्रकार के संक्रमण और बीमारियां लेकर आता है। इस मौसम में वातावरण में नमी की वजह से कीटाणु गतिशील हो जाते हैं, जिसकी वजह से डेंगू, मलेरिया, जुकाम, फ्लू, बुखार, त्वचा संक्रमण, फंगस संक्रमण, खाद्य संक्रमण और पानी से होने वाले संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त पेट संक्रमण, डिहाइड्रेशन आदि भी पानी से होने वाले रोगों में से एक हैं। इससे मां और गर्भ में पल रहे बच्‍चे के लिए खतरा बढ़ा जाता है। इसलिए गर्भवती को इस मौसम में विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। अगर इन छोटी-छोटी बातों का वे ध्यान रखेंगी तो बिना किसी मुश्किल के मानसून का पूरा आनंद उठा पायेंगी और स्वस्थ भी रह पायेंगी।
    Image Source : grandnews.in

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    स्‍वच्‍छ भोजन करें

    लेप्टोस्पाइरोसिस एक ऐसा रोग है जो बैक्टीरिया से फैलता है और सामान्य दिनो की अपेक्षा इस रोग के होने की संभावना बारिश के मौसम में सबसे ज्यादा होती है। तभी इसका सबसे ज्यादा संक्रमण फैलता है। यह रोग ऐसा है जो खुद ही कई और रोगों को पैदा करने का कारण भी हो सकता है। लेप्टोस्पाइरोसिस, एक जीवाणु के द्वारा पनपता है जो इंसान या जानवर किसी के भी द्वारा गर्भवती महिला के गर्भ तक पहुंच सकता है। लेप्टोस्पाइरोसिस संक्रमण गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए जानलेवा भी हो सकता है। संक्रमित भोजन, पानी या त्वचा के संपर्क से भी यह बीमारी फैलती है। इसलिए गर्भवती को स्‍वच्‍छ भोजन और पानी पीना चाहिए।
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    पानी की पर्याप्‍त मात्रा

    मानसून में आमतौर पर पानी का सेवन कम हो जाता है। पानी से बचने से आप डिहाइड्रेट हो सकते हैं। इसलिए गर्भवती को खुद को डिहाइड्रेशन से बचाना के लिए भरपूर मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा साफ व कीटाणु मुक्‍त पानी पीयें।
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    जंक फूड से बचें

    वैसे तो जंक फूड गर्भवती शरीर के लिए किसी भी मौसम में अच्‍छा नहीं होता, लेकिन मानसून में गर्भवती की पाचन क्रिया धीमी होने के कारण यह शरीर के लिए बहुत हानिकारक होता है। कमजोर पाचन होने पर भारी भोजन करने से पचाने में कठिनाई होती है और जंक फूड खाने से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए गर्भवती को हानिकारक (जंक) खाद्य और पैकेजिंग वाले खाने से दूर रहना चाहिए, खासतौर पर मानसून के दौरान।
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    विटामिन सी का सेवन

    गर्भवती को मानूसन में उन खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए, जिनमें प्रचूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है। जैसे मौसमी, नींबू, संतरा, टमाटर, आंवला। विटामिन सी गर्भवती की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जो मानसून में बहुत जरूरी है। इसके अलावा यह शिशु की मांसपेशियों व कोशिकाओं के विकास में मदद करता है।
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    बाहर खाने से बचें

    बेहतर है कि आप सड़क किनारे मिलने वाले खाने से परहेज करें। माना कि गर्भवती चाट-पापड़ी, गोलगप्पे और टिक्की देखकर खुद पर काबू नहीं रख पातीं, लेकिन यकीन जानिए ये सब आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं है। अगर यह सब खाने का बहुत मन कर ही रहा है तो ऐसी जगह तलाशें जहां स्वच्छता का खास खयाल रखा जाता हो। लेकिन मानसून में दही और उससे बनी चाट का परहेज करना बेहतर रहेगा।
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    खाना पकाने से पहले सावधानी

    खाना पकाने से पहले बर्तनों, सब्जियों और दालों को भी धोने के लिए साफ पानी का ही इस्तेमाल करें। वैसे तो इस मौसम में हरी पत्‍तेदार सब्जियों से परहेज करना चाहिए। लेकिन अगर खानी हैं तो हरी पत्तेदार सब्जियों को साफ करने में खास सावधानी बरतें। इन्हें उबले हुए पानी से अच्छे से कई बार धोएं। साथ ही इन हरी पत्तेदार सब्जियों को गर्म पानी में एक चम्मच नमक डालकर 10-15 मिनट के लिए भिगोकर रख दें। इसके बाद बचा हुआ पानी गिरा दें। ऐसा करने से इनमें मौजूद कीटाणु समाप्त हो जाएंगे।
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    स्वच्छता का खयाल रखें

    नहाने के बाद अपने बदन को अच्छे से सुखाएं। नंगे पैर घर से बाहर न निकलें, भले ही यह घर का आंगन या लॉन ही क्यों न हो। लॉन में बरसात के गंदे पानी से आपको इंफेक्‍शन हो सकता है। इसके साथ ही पैर में कुछ चुभ भी सकता है। अपने हाथ-पैरों को गुनगुने पानी में साबुन से धोते रहें। खासतौर पर बाहर से घर लौटने पर। बरसात में इस्तेमाल करने वाले अपने सामान, छाता, रेनकोट, जुराबें, जूते और कपड़ों आदि की सफाई पर भी पूरा ध्यान दें। इनमें कीटाणु रहने पर आपकी सेहत को नुकसान हो सकता है।
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