पैर की सूजन हो सकती है किसी बीमारी का संकेत

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 25, 2014

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आमतौर पर टखनों और पैर में सूजन चिंता की बात नहीं होती, लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं कि यह निश्चिंत हो जाने का विषय है। पैरों में लंबे समय तक सूजन रहना किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का इशारा भी हो सकता है।
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    पैर की सूजन कहीं किसी बीमारी तो नहीं!!

    टखनों और पैर में सूजन यूं तो आम बात है और आमतौर पर चिंता का कारण नहीं होता, खासकर तब, जबकि आप काफी देर तक खड़े रहे हों या बहुत चले हों। लेकिन लगातार पैर और टखने में सूजन बने रहना किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है और ऐसे में आपको डॉक्टर से मिलने की सख्त जरूरत होती है। तो चलिये जानें कि पैरों की सूजन किन चिकित्सा कारणों से हो सकती है।
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    गर्भावस्था की जटिलताएं

    टखने और पैर में सूजन गर्भावस्था के दौरान सामान्य बात है। हालांकि अचानक या अत्यधिक सूजन प्रीक्लेम्पसिया (preeclampsia) का संकेत हो सकती है। प्रीक्लेम्पसिया एक गंभीर स्थिति है जिसमें गर्भावस्था के 20 वें सप्ताह के बाद मूत्र में उच्च रक्तचाप और प्रोटीन विकसित हो जाता है। तो यदि आपको गंभीर सूजन या सूजन के साथ पेट दर्द, सिर दर्द, बार-बार पेशाब, मतली और उल्टी, या दृष्टि में परिवर्तन जैसे लक्षण हों तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
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    पैर या टखने की चोट

    पैर या टखने में चोट सूजन पैदा कर सकती है। इसका सबसे आम कारण टखने में आई मोच के कारण लिगमेंट का अपनी जगह से हट जाना होता है। पैर या टखने की चोट से आई सूजन को कम करने के लिए घायल टखने या पैर पर चलने से बचना चाहिए और पूरा आराम करना चाहिए। आइस पैक का उपयोग क रना चाहिए और पैर को पट्टी से लपेटकर स्टूल या तकिए पर पैर रख लेना चाहिए। ऐसे में त्तकाल डॉक्टरी मदद भी लेनी चाहिए।
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    वेनस इन्सुफिसिएंसी (Venous insufficiency)

    टखने और पैर की सूजन अक्सर वेनस इन्सुफिसिएंसी का एक प्रारंभिक लक्षण होता है। वेनस इन्सुफिसिएंसी एक ऐसी स्थिति जिसमें रक्त पैरों के ऊपर दिल की अपर्याप्त नसों तक चलता है। क्रोनिक वेनस इन्सुफिसिएंसी त्वचा में परिवर्तन त्वचा अल्सर, और संक्रमण पैदा कर सकता है। वेनस इन्सुफिसिएंसी का कोई भी लक्षण दिखआई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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    डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डी.वी.टी)

    अचानक एक पैर में सूजन, लाली और गर्माहट तथा चलने-फिरने पर पैर में खिंचाव जैसे लक्षण डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डी.वी.टी.) यानी टांगों की नसों में खून के कतरों का जमाव अत्यंत गंभीर स्थिति के सूचक हो सकते हैं। अक्सर लोग अज्ञानता के कारण इसे नस में खिंचाव, चोट, थकान, सामान्य संक्रमण या फाइलेरिया मान बैठते हैं और उसका इलाज कराने लगते हैं, जो गलत है। यह समस्या होने पर तुरंत किसी वैस्कुलर या कार्डियोवैस्कुलर सजर्न को दिखाना चाहिए।
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    सायटिका

    आमतौर पर सायटिका 50 वर्ष की उम्र के बाद ही देखी जाती है। किसी भी व्यक्ति के शरीर में जहां-जहां हड्डियों का जोड़ होता है, वहां एक चिकनी सतह होती है जो हड्डियों को जोड़े रखती है। जब यह चिकनी सतह घिसने लगती है तो हड्डियों पर इसका बुरा प्रभाव होता है और पैरों में सूजन और असहनीय दर्द का कारण बनता है। सायटिका की समस्या मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी व कमर की नसों से जुड़ी हुई है जिसका सीधा संबंध पैर से होता है। इसीलिए सायटिका में पैरों में सूजन और तीव्र दर्द होता है। कसरत और फिजियोथैरेपी से भी बहुत आराम मिलता है।
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    पोस्ट थ्रोम्बॉटिक सिंड्रोम

    सुबह के वक्त सूजन थोड़ी हल्की मालूम पड़ती हैं और शाम तक सूजन अपनी पुरानी अवस्था में लौट आती है। दूसरा कारण पैर की अंदरूनी वेन्स में रूकावट होना है। इस रूकावट का कारण ज्यादातर शुरूआती दिनों मे पर्याप्त इलाज के अभाव में यह खून के कतरे स्थाई रूप से पैरों की अन्दरूनी शिराओं में जमा हो जाते हैं। जिससे पैरोंं में एकत्र हुए गंदे खून के लिए ऊपर चढ़ने का मार्ग अवरूद्ध हो जाता है, जो स्थाई सूजन के रूप में परिणित हो जाता है। इसे मेडिकल भाषा में पीटीएस यानी पोस्ट थ्रोम्बॉटिक सिंड्रोम कहते हैं।
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    पल्मोनरी एम्बोलिज्म

    पैदल न चलने की आदत और ऑफिस में कम्प्यूटर के सामने घंटों बैठे रहने की मजबूरी वाले लोगों के पैरों की नसों में खून के कतरों के जमाव होने का खतरा हमेशा रहता है। नसों में खून का जमाव होने की अवस्था को डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) कहा जाता है। अगर समय रहते किसी वैस्क्युलर सर्जन से इलाज न कराया गया तो टांगों में जमे हुए खून के कतरे टूट जाते हैं और स्वतंत्र हो कर ऊपर दिल की ओर चढ़ जाते हैं और वहां से आगे जाकर फेफड़े की रक्त नली को जाम कर देते हैं। इस स्थिति को "पल्मोनरी एम्बोलिज्म" कहते हैं।
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    क्रोनिक किडनी डिजीज

    किडनी से संबधित बीमारियों के होने पर भी पैरों में सूजन होने की समस्या देखी जा सकती है। क्रोनिक किडनी डिजीज होने पर चेहरे और पैरों में सूजन आना आम लक्षण होता है। ऐसे में जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह और उचित जांच करानी चाहिए।
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    अन्य कारण

    वेन्स की बीमारी के अलावा पैरों में सूजन के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं जैसे, फील पांव यानी एलिफैन्टियेंसिस, गुर्दे व दिल का रोग, ब्लडप्रेशर की दवा (एम्लोडिपिन आदि) का सेवन। फील पांव का रोग अकसर नमी या तराई वाले इलाकों में ज्यादा होता हैं, जहां मच्छर अधिक होते हैं। सूजन के कारणों का इलाज करने से सूजन से भी छुटकारा मिल जाता है।
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