पिंपल्‍स ही नहीं दूसरी समस्‍याओं में भी फायदेमंद है बरगद का पेड़

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 23, 2015

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बरगद को वट वृक्ष भी कहा जाता है, इस पेड़ के पत्‍ते और जड़ का प्रयोग सर्दी जुकाम और बुखार से लेकर डायबिटीज और पिंपल्‍स जैसे त्वचा रोगों में भी फायदेमंद होता है, इससे होने वाले फायदों के बारे में अधिक जानने के लिए ये स्‍लाइडशो पढ़ें।
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    सेहत और सौंदर्य के लिए बरगद

    बरगद भारत का राष्ट्रीय वृक्ष है। बरगद को वट वृक्ष भी कहा जाता है, क्योंकि यह पेड कभी नष्ट नहीं होता है। बरगद का वृक्ष घना एवं फैला हुआ होता है। वट वृक्ष हमारे धर्म में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। साथ ही यह पर्यावरण की दृष्टी से भी महत्वपूर्ण है। इसकी जड़ें मिटटी को पकड़ के रखती है और पत्तियां हवा को शुद्ध करती है। बरगद की तासीर ठंडी होती है जो कफ, पित्त की समस्या को दूर कर रोगों का नाश करती है। सर्दी जुकाम और बुखार से लेकर यह डायबिटीज और त्वचा रोगों तक के लिए वट वृक्ष के पत्तों और जड़ों का प्रयोग फायदेमंद होता है।
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    उम्र के असर को करें बेअसर

    बरगद की जड़ों में सबसे अधिक मात्रा में एंटी-ऑक्‍सीडेंट गुण पाये जाते हैं। इन गुणों के कारण यह चेहरे पर बढ़ती उम्र की ओर ले जाने वाले कारकों के दूर करने में मदद करता है। चेहरे की झुर्रियों को दूर करने के लिए बरगद की ताजी जड़ों के सिरों को काटकर पानी में कुचल लें। फिर इसके रस को चेहरे पर लगाये।
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    दांतों और मसूड़ों के लिए फायदेमंद

    बरगद में मौजूद एंटीबैक्‍टीरियल और एस्‍ट्रीजेंट गुणों के कारण इसकी जड़ों का प्रयोग ओरल समस्‍याओं के उपचार का बहुत ही प्राचीन तरीका है। बरगद की जड़ों को खाने या चबाने से दांतों संबंधी रोग जैसे मसूड़ों की बीमारी, दांतों का गिरना, मसूड़ों से खून आना दूर होने के साथ यह दांतों को साफ करने में भी मदद करता है। यह एक प्राकृतिक टूथपेस्‍ट है और सांसों की दुर्गंध को दूर करने में मदद करता है।
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    त्वचा के लिए बरगद

    इसके कोपलों से बने पेस्‍ट को लगाने से बलगम झिल्ली के इलाज, सूजन और दर्द को दूर करने में अच्‍छी तरह से काम करता है। मुंहासों को दूर करने में भी मदद करता है। साथ ही वट की कोपलें चेहरे की कांति बढ़ाने का काम करती हैं। इसके पत्तों को तवे पर सेककर सहने योग्य स्थिति में फोड़ों या पिंपल्स के ऊपर बांधने से लाभ मिलता है।  
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    डायरिया की समस्‍या से बचाये

    छोटे ताजे पत्‍तों को पानी में भिगोकर लेने से डायरिया, पेचिश, गैस और पेट में जलन की समस्‍या को दूर किया जा सकता है। इसमें मौजूद शक्तिशाली एस्ट्रिजेंट गुणों के कारण ऐसा होता है। डायरिया की समस्‍या होने पर बरगद के ताजे पत्‍तों में गुड़ और हरे धनिया के पत्‍तों को मिलाकर चबाने से फायदा होता है।
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    इम्‍यूनिटी बढ़ाने के गुण

    अच्‍छी इम्‍यूनिटी स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत जरूरी है, क्‍योंकि इससे बीमारियों को दूर रखने में मदद मिलती है। बरगद के पेड़ की छाल में इम्‍यूनिटी बढ़ाने वाले गुण होते हैं। इसके सेवन से आपको बीमारियों को रोकने में मदद मिलती है। बड़ की छाल का काढा बनाकर प्रतिदिन एक कप मात्रा में पीने से आपकी इम्‍यूनिटी स्‍ट्रोंग होती है।
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    सर्दी जुकाम में लाभकारी

    बरगद के छाल और पत्तियां में बहुत मजबूत एंटीऑक्‍सीडेंट होते हैं। यह सर्दी जुकाम और अन्‍य बीमारियों को रोकने में मदद करते हैं। बरगद के कोमल पत्तों को छाया में सुखाकर कूट कर पीस लें। आधा लीटर पानी में एक चम्मच चूर्ण डालकर उबालें। जब चौथाई पानी शेष बचे तब उतारकर छान लें और पीसी मिश्री मिलाकर कुनकुना करके पियें। यह सर्दी जुकाम ठीक करने में मदद करता है।
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    जोड़ों के लिए लाभकारी

    अध्‍ययन के अनुसार, बरगद के पत्‍तों का दूधिया रस एक अच्‍छा एंटी-इंफ्लेमेटरी है। आधुनिक स्टेरॉयड दवाओं के दुष्प्रभावों के बिना है यह गठिया, जोड़ों का दर्द, सूजन और लालिमा को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा बरगद के ताजे पत्तों को गर्म करके घावों पर लेप करने से घाव जल्द सूख जाते हैं।
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