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फेफड़ों के कैंसर से जुड़े सात तथ्‍य

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 04, 2014
धूम्रपान करने वालों की संख्‍या बढ़ने के कारण फेफड़ों के कैंसर के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं, यह पुरुष और महिलाओं को समान रूप से प्रभावित करता है, इससे जुड़े कुछ तथ्‍यों को जानना भी जरूरी है।
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    फेफडों का कैंसर

    फेफड़ों का कैंसर यानी लंग कैंसर कैंसर का दूसरा सबसे सामान्‍य प्रकार है जो पुरुषों और महिलाओं में समान रूप से पाया जाता है। धूम्रपान करने वालों की संख्‍या बढ़ने के कारण ही लंग कैंसर के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। धूम्रपान अधिक करना, गंदगी में अधिक समय बिताना, खानपान में अनियमिता आदि कैंसर के इस प्रकार के प्रमुख कारण हैं। लेकिन फेफड़ों के कैसर से जुड़े कुछ तथ्‍य भी हैं जिन्‍हें भी जानना जरूरी है।

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    फेफडों का कैंसर
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    धुम्रपान ही इसकी प्रमुख वजह है

    फेफड़ों में कैसर के लिए सबसे अधिक जिम्‍मेदार कारक धूम्रपान ही है। लंग कैंसर के 87 प्रतिशत मामलों के पीछे प्रमुख कारक धूम्रपान ही होता है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि किस उम्र के बाद मरीज ने धूम्रपान शुरू किया और रोज वह तंबाकू से बने कितनें उत्‍पादों का सेवन करता है।

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    धुम्रपान ही इसकी प्रमुख वजह है
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    धूम्रपान न करने वाले भी इसकी चपेट में आ सकते हैं

    अगर आपको लगता है कि जो व्‍यक्ति धूम्रपान नहीं करता है उसे फेफड़ों के कैंसर होने का खतरा बिलकुल भी नहीं होता है, तो आप गलत हैं। अप्रत्‍यक्ष रूप (जो लोग धूम्रपान करने के वालों के कारण धुयें के संपर्क में आते हैं) से धूम्रपान करने वालों को भी लंग कैंसर हो सकता है। लगभग 10-15 प्रतिशत मामले उन लोगों में भी दिखे हैं जो धूम्रपान नहीं करते हैं।

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    धूम्रपान न करने वाले भी इसकी चपेट में आ सकते हैं
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    फेफड़ों के कैंसर के दो प्रकार हैं

    फेफडों के कैसर के दो प्रकार होते हैं। जिसमें से 85-90 प्रतिशत मामले नॉन-स्‍मॉल सेल की तरह होते हैं। कैंसर का यह प्रकार बहुत धीरे-धीरे फैलता है और शरीर के अन्‍य अंगों को प्रभावित नहीं करता है। जबकि स्‍मॉल सेल कार्सिनोमा तेजी से फैलता और दूसरे अंग भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।

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    फेफड़ों के कैंसर के दो प्रकार हैं
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    चेतावनी के लक्षणों को भी जानें

    पुरुषों और महिलाओं में एक ही कारण से फेफड़ों का कैंसर होता है, इसलिए इसके प्रति चेतावनी देने वाले प्रमुख कारकों को भी जानना जरूरी है। हालांकि ये लक्षण सामान्‍य हो सकते हैं, लेकिन इन्‍हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित रूप से खांसी आना, सांस लेने में समस्‍या, भूख न लगना, बिना किसी कारण वजन घटना, खांसते वक्‍त खून निकलना, आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।

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    चेतावनी के लक्षणों को भी जानें
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    सीटी स्‍क्रीनिंग से बचाई जा सकती है जान

    हालांकि फेफड़ों के कैसर की पहचान करना अभी भी उतना आसान नहीं है, लेकिन अगर इसके लक्षणों के आधार पर समय रहते स्‍क्रीनिंग कराई जाये तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। हालांकि स्‍क्रीनिंग की सिफारिश 55 से 74 साल के बीच के व्‍यक्ति के लिए ही की जाती है। इसके अलावा जिन लोगो ने 30 साल तक सिगरेट की एक पैकेट रोज खत्‍म किया है उन्‍हें भी स्‍क्रीनिंग कराने की सिफारिश की जाती है।

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    सीटी स्‍क्रीनिंग से बचाई जा सकती है जान
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    उपचार के नये तरीके हैं भरोसेमंद

    कैंसर का उपचार बहुत ही कष्‍टकारक होता है और कैंसर ग्रस्‍त होने पर जीवन बचने की संभावना भी कम होती है। लेकिन विकसित होती तकनीक के कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का उपचार आसान हो गया है। लंग कैंसर के उपचार के लिए कई तकनीक जैसे - कीमोथेरेपी, सर्जरी और रेडियेशन थेरेपी की सहायता ली जा सकती है।

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    उपचार के नये तरीके हैं भरोसेमंद
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    धूम्रपान छोड़ना फायदेमंद

    अगर आप फेफड़ों के कैंसर से बचाव करना चाहते हैं तो धूम्रपान करने से बचें। धूम्रपान करने वाले यह सोचते हैं कि उन्‍होंने इतना धूम्रपान कर लिया है कि अब बहुत देर हो चुकी है, तो ऐसा नहीं है। वास्‍तव में आप जब भी चाहें धू्म्रपान करना छोड़ दें, इससे दिल के दौरे और लंग कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।

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    धूम्रपान छोड़ना फायदेमंद
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