लव, सेक्स.. और फिर धोखा : खुद को बचाएं एमएमएस के जाल से

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 12, 2014

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पहले प्यार फिर सेक्स और फिर उसके बाद ज़िदगी बर्बाद कर देना वाला एक एमएमएस, क्या है ये लव, सेक्स और फिर एमएमएस की ये अजीब कहानी।
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    लव, सेक्स और फिर एमएमएस

    समाज में आजकल एक मुद्दा चर्चा का विषय है। लेकिन असल में चर्चा से कहीं ज्यादा यह एक चिंता का विषय है,.... 'लव, सेक्स और उसके बाद धोखा'। आए दिन अखबारों, मेग्जीन्स और टीवी चैनल्स पर किसी न किसी नए एमएमएस की सनसनी देखी जा सकती है। कुछ जानबूछ कर, मशहूर होने के लिए बनाए जाते हैं तो अधिकांश प्यार में धोखे या कुंठित मानसिकता का परिणाम होते हैं। कई बार कम उम्र की एक छोटी सी नादानी पूरी जिंदगी को बर्बाद करके रख देती है। तो चलिए समझने की कोशिश करते हैं कि लव, सेक्स और फिर एमएमएस की ये कैसी अजीब कहानी है।

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    'प्यार' जायज या नाजायज !

    समाज में प्रेम का बड़ा अलग स्थान है यानी अगर आप छुप-छुप कर जो करना चाहें कर लें, लेकिन अगर पकड़े गए तो गए काम से। यह एक ऐसा विषय है जिस पर अगर आप किसी भी अभिभावक से पूछ लें तो उनका जवाब होगा “नहीं, बिलकुल नहीं यह नाजायज है”। लेकिन अगर किसी युवा से पूछें तो यकीनन नब्बे प्रतिशत कहेंगे “हां, यह सही है”। गौरतलब है कि ये अभिभावक भी कभी युवा थे।

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    प्यार के बदलते मायने

    आजकल प्यार के मायने बदल गए हैं। युवा वर्ग एक एक बड़े तबके में प्यार को फिजिकल सेटिसफैक्शन के जरिये के तरह इस्तेमाल किया जाता है और जिसके दुखद परिणाम हमें एमएमएस आदि के रूप में मिलते हैं। जिसे चाहो उसे प्रेमी या प्रेमिका बना लो, और फिर अपना काम निकलने पर अपने-अपने रास्ते हो लो। फिर कोई नाया साथी मिल जाएगा। क्योंकि हमारे देश में भेड़ चाल चली जाती है, कुछ लोगों की वजह से सब लोगों की नजरों में प्यार की नई परिभाषा आ गई है। अब प्यार को धोखे का पर्याय माना जाने लगा है।

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    गलती किसकी

    गलती सिर्फ युवाओं या लड़के या लडकियों की नहीं है, हमने पश्चिमी देशों जैसा बनने की होड़ तो कर ली, टेक्नोलॉजी भी हाथ में थाम ली, लेकिन खुद हमने और सरकार व बुद्धिजीवियों ने अब तक उनकी अच्छी आदतों से परहेज ही रखा। हम क्यों भूल जाते हैं कि “गेहूं के साथ घुन भी पिस जाता है”। बाकी कसर मोबाइल और इंटरनेट ने गलत इस्तेमाल ने पूरी कर दी है। प्यार और सेक्स को लेकर रूढि़वादी मानसिकता और ढकोसलों के चलते सब कुछ खिचड़ी बन कर रह गया है।

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    कब लगा अभिशाप

    कुछ साल पहले आया डीपीएस एमएमएस, फिर लाजपत नगर स्कैंडल और फिर नोएडा स्टूडेंट क्लिप.... यह फेहरिस्त काफी लम्बी है, जो दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। इस तरह के बेहिसाब एमएमएस रोजाना बनाए जा रहे हैं और लोगों के बीच पहुंच भी रहे हैं। खास तौर पर युवाओं का झुकाव इस ओर तेजी से बढ़ता देखा जा सकता है। लगातार बढ़ रही पॉर्न साइटों पर अश्लील तस्वीरों और एमएमएस क्लिप की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।

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    क्या हैं कारण

    मोबाइल कैमरे के गलत इस्तेमाल पर पहले ही काफी बहस की जा चुकी है। सेक्स पर भी अक्सर बात होती ही रहती है। लेकिन युवाओं में बढ़ते इस नए ट्रेंड पर शायद ही ज्यादा लोगों का ध्यान गया हो। कुछ सालों पहले जब डीपीएस की छात्रा का सेक्स एमएमएस लोगों को बीच आया था, तो लोगों को काफी हैरानी हुई थी। लेकिन अब तो ऐसे एमएमएस की भरमार है। तकनीक का असर कहें या रिश्तों का बिगड़ता रूप, अब यह युवाओं के लिए पैशन बनता नजर आता है। पॉर्न साइटों तक आसान पहुंच इसे और बढ़ावा दे रही है।

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    क्यों बनते हैं अश्लील एमएमएस

    लोग किसी लड़की (खासतौर पर अपनी गर्लफ्रेंड) का अश्लील एमएमएस क्यों बनाते हैं? यह सवाल तब और भी बड़ा हो जाता है, जब यह पूछा जाए कि भला निहायत निजी इस्तेमाल के लिए बनाए गए ये एमएमएस पब्लिक के बीच कैसे पहुंच जाते हैं? दरअसल इसके पीछे एक नहीं बल्कि कई कारण हैं। और ये हैं वो कारण.........

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    सेक्स फैंटसी

    सेक्स हर शख्स की जिंदगी से जुड़ा होता है और उससे जुड़ी होती है फैंटसी। और ये पीढ़ियां बदलने पर भी नहीं बदलती, हां इसका तरीका जरूर बदल जाता है। आज से 20-30 साल पहले यह कुछ और था और आज कुछ और है। इसी लिहाज से मोबाइल पर अपने सेक्स के विडियो क्लिप बनाना भी फैंटसी का नया रूप है। इंटरनेट, मैसेंजर आदि से लैस मोबाइल कैमरे का इस्तेमाल फैशन बन गया है। लोग राह चलते अपने फ्रेंड्स, फैमिली और यहां तक कि अनजान लोगों की तस्वीरें खींचते हैं। बात साफ है, बिंदास जेनरेशन को खुलापन चाहिए। हां, परेशानी की बात तब है, जब वे अपनी सेक्स लाइफ को पब्लिक कर देते हैं।

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    प्रॉफिट का मार्केट

    इंटरनेट पर पॉर्न साइट्स की संख्या और मांग दोनो तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। 'गंदा है, पर धंधा है' और धंधा भी ऐसा जो धड्ल्ले से चलता है। ऐसी ज्यादातर साइटों का रजिस्ट्रेशन भी फर्जी होता है, इसलिए इन पर लगाम लगाना काफी मुश्किल है। ये इंटनेट के अधिपत्य क्षेत्र में आने वाली कुछ जटिलताएं हैं। इन साइटों पर कई युवा अपने या दूसरों के सेक्स एमएमएस अपलोड करते रहते हैं। दूसरे लोग जब इन्हीं क्लिप को डाउनलोड करते हैं तो अन्हें इसका पैसा मिलता है। साइटें डायरेक्ट पेमेंट या विज्ञापनों के जरिए भारी कमाई करती हैं। साइबर एक्सपर्ट कहते हैं कि तकनीकी रूप से इन साइटों को रोक बेहद मुश्किल है। कड़े कानून बनाकर व जागरूकता लाकर ही युवाओं को इनसे दूर रखा जा सकता है।

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    समाज भी है दोषी

    पोर्न साइट्स ई-कॉमर्स के लिए फायदेमंद होती हैं। और काफी बड़ी संख्या में लोग इंटरनेट पर अश्लालता को ही देखना या पढ़ना चाहते हैं। परेशानी की बात यह है कि अश्लीलता के मुद्दे पर समाज भी दो तबकों में बंट जाता है, एक में खुलेपन के हिमायती तो दूसरे में संस्कारों की अजीब सी लड़ाई चलती है। जिसके कारण समस्या का समाधान तो दूर, बल्कि इसमें वृद्धि हो रही है। इसके लिए समाज में कोई-न-कोई कॉमन व्यू तो जरूर बनना चाहिए। कम-से-कम खुलेपन की एक सीमा तो तय की ही जा सकती है, लेकिन वह सीमा क्‍या हो इस पर भी बहस हो सकती है।

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    छोटी सी नादानी

    कई बार एमएमएस लड़कियों को पता होते हुए बनाए जाते हैं। और शायद उन्हें अहसास भी नहीं होता होगा कि उनका 'प्यार' ऐसा कर सकता है। प्यार का यही अंधापन न सिर्फ लड़कियों को अंधेरे की तरफ ले जाता है, बल्कि लड़को का जीवन भी बर्बाद कर देता है। अगर हम सेक्स के खुलेपन, कैमरे से फैंटसी की बहस में न पड़ें तो इतना जरूर कह सकते हैं कि थोड़ा अलर्ट तो रहा ही जा सकता है। खासकर तब, जब कि इस तरह के मामले आए दिन सामने आ रहे हों। रिश्ता कितना भी मजबूत और पुराना हो, लड़कियों को ध्यान रखना चाहिए कि उन खास पलों के दौरान कैमरे कभी बीच न आए।

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    डिलीट कर देना समाधान नहीं

    अगर आप सिर्फ मजे के लिए अपने उन खास पलों को रिकॉर्ड कर रहे हैं तो खबरदार हो जाएं। भले ही आप बाद में मोबाइल या कैमरे से उन तस्वीरें या विडियो को डिलीट कर दें, फिर भी उन्हें दोबारा निकाला जा सकता है। डेटा रिकवरी से डिलीटेड या लॉस्ट डेटा को वापस लाया जा सकता है। मेमरी कार्ड या हार्ड डिस्क से डिलीट की जा चुकी चीजों को रिट्रीव किया जा सकता है। बशर्ते डेटा ओवरराइट न हुआ हो। यानी अगर 1 जीबी मेमरी कार्ड है और उसे फॉरमैट करके आपने 300 एमबी का डेटा डाल दिया है तो 700 एमबी का डिलीटेड डेटा तब भी दोबारा प्राप्त किया जा सकता है। फोन, कैमरा या मेमरी कर्ड खो जाने पर कोई भी उसका गलत उपयोग कर सकता है।

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    क्या हैं समाधान

    'ये मेरी लाइफ है' और 'आई नीड स्पेस' आज की जनरेशन का नारा है। अक्सर इस तरह एमएमएस बनाना और देखना अनके लिए मजे का हिस्सा होता है। मनोचिकित्सक सुनील मित्तल बताते हैं कि अब लोगों के लिए वासना सबसे ऊपर होती जा रही है। युवाओं के लिए किसी से भी सेक्सुअल रिलेशन बनामा आम होता जा रहा है। केवल लड़कियों को अलर्ट रहने की हिदायत देना भर काफी नहीं है। लड़का, लड़की बराबर होते हैं और दोनों को ही इसे समझना चाहिए। एजुकेशन सिस्टम में बदलाव और परिवार की सोच को बदलकर भी इस तरह की समस्याएं रोकी जा सकती हैं। साथ ही इसे जुड़े कानूनों का भी कड़ा और मजबूत बनाना होगा।

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    इसके लिए कानून

    साइबर एक्सपर्ट बताते हैं कि अश्लील एमएमएस या तस्वीरें रखना, किसी को भेजना, किसी से लेना, इंटरनेट से डाउनलोड करना, अपलोड करना या फिर इन्हें देखना एक दंडनीय अपराध है। यदि कोई खुद अपना एमएमएस बनाता है या किसी और का, यह दोनों ही क्राइम हैं। आईटी एक्ट 2000 के मुताबिक, इस तरह की अश्लील सामग्री रखने पर धारा 67 के तहत तीन साल तक की सजा और पांच लाख रुपये तक का जुर्माने का प्रवधान है। साथ ही अश्लील सीडी-डीवीडी, लैपटॉप या पीसी में पोर्न सामिग्री होना या मोबाइल और कैमरे में ऐसी तस्वीरें या विडियो होना भी क्राइम होता है।

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