अगरबत्‍ती का धुआं आपके लिए हो सकता है जानलेवा

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 15, 2015

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अगरबत्‍ती और धूपबत्‍ती का प्रयोग लगभग सभी भारतीय घरों में होता है और लोगों का ऐसा मानना भी है कि इसके कारण घर का वातावरण शुद्द होता है, जबकि सच्‍चाई यह है कि यह आपके लिए जानलेवा भी हो सकता है।
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    नुकसानदेह है अगरबत्‍ती

    अगरबत्‍ती को भले ही आस्‍था और धर्म से जोड़ा जाता है। लेकिन सच्‍चाई यह है कि यह हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ही खतरनाक है और इसके कारण कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के होने का खतरा भी रहता है। एक शोध की मानें तो अगरबत्ती एवं धूपबत्ती के धुएं में पाए जाने वाले पॉलीएरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (पीएएच) की वजह से अस्थमा, कैंसर, सरदर्द एवं खांसी की संभावना बढ़ जाती है। खुशबूदार अगरबत्‍ती को घर के अंदर जलाने से वायु प्रदूषण होता है विशेष रूप से कार्बन मोनोऑक्साइड फैलता है। इसलिए अब अपने बंद कमरे में अधिक अगरबत्‍ती और धूपबत्‍ती जलाने से बचें।

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    कफ की समस्‍या

    अगरबत्‍ती के संपर्क में अधिक देर तक रहने से कफ और छींकने की समस्‍या होती है। अगरबत्‍ती के धुएं से निकलने वाले कार्बन मोनोऑक्साइड के कारण फेफड़ों की कोशिकाओं में सूजन आ सकती है और श्वसन से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए जब भी श्‍वांस के साथ आवश्यकता से अधिक मात्रा में धुआं शरीर के अंदर जाता है तो कफ और सांस की समस्‍या होती है।

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    अस्‍थमा की संभावना

    अगरबत्‍ती और धूपबत्‍ती में सल्‍फर डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन और फॉर्मल्डेहाईड मौजूद होते हैं, ये कण और गैस के रूप में मौजूद होते हैं। इनके संपर्क में अधिक समय तक रहने से अस्‍थमा और सीओपीडी जैसी श्‍वसन संबंधी समस्‍या हो सकती है।

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    त्‍वचा और आंखों के लिए नुकसानदेह

    अगर आप अधिक समय तक धूपबत्‍ती और अगरबत्‍ती के संपर्क में रहते हैं तो इसके कारण त्‍वचा और आंखों को समस्‍या हो सकती है। इसके कारण आंखों में जलन होती है। धुएं में मौजूद केमिकल के संपर्क में आने से त्‍वचा में जलन और खुजली महसूस होती है।

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    मस्तिष्‍क के लिए नुकसानदेह

    अगरबत्‍ती से निकलने वाला धुआं तंत्रिका को प्रभावित करता है। इसके कारण सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने में समस्या होना और विस्मृति आदि समस्‍यायें भी होती हैं। इसके कारण खून में जानलेवा गैसों की मात्रा बढ़ने से मस्तिष्क की कोशिकायें प्रभावित होती हैं जिसके कारण तंत्रिका से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।

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    श्‍वसन कैंसर हो सकता है

    इसके कारण श्वसन कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है। दरअसल लंबे समय तक अगरबत्ती का उपयोग करने से ऊपरी श्वांस नलिका का कैंसर होने का ख़तरा बढ़ जाता है। सल्‍फर डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन जैसे केमिकल श्‍वांस मार्ग को नुकसान पहुंचाकर संक्रमित कर देते हैं, इसके कारण ही कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।

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    शरीर में जमा होते हैं विषाक्‍त पदार्थ

    अध्ययनों से पता चला है कि जब अगरबत्ती को जलाया जाता है तो इसके कारण विषाक्त धुंआ निकलता है जिसमें लेड (सीसा), आयरन और मैग्नीशियम जैसे नुकसानदेह तत्‍व होते हैं। इनके कारण शरीर में विषाक्त पदार्थों की मात्रा बढ़ती है। अगरबत्ती लगाने से जो धुंआ निकलता है उसके कारण रक्‍त विकार बढ़ता है और शरीर में टॉक्सिक पदार्थ बढ़ने लगते हैं।

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    दिल के लिए भी नुकसानदेह

    स्‍वस्‍थ दिल रहेगा तभी आपका शरीर भी स्‍वस्‍थ रहेगा। लेकिन लम्बे समय तक अगरबत्तियों का उपयोग करने से हृदय रोग से होने वाली मृत्यु की दर 10-12 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इसका मुख्य कारण अगरबत्ती जलाने पर श्वसन के द्वारा अंदर जाने वाला धुंआ है, क्‍योंकि इसमें मौजूद वाष्पशील कार्बनिक यौगिक और कणिका तत्व रक्त वाहिकाओं की सूजन बढ़ा देते हैं और इससे दिल की बीमारियां होने लगती हैं।

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