'कर्मा' के इन नियमों से पाएं जीवन का स्पष्ट दृष्टिकोण

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 15, 2016

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माना जाता है अपने कर्मों का फल इस जीवन में ही मनुष्य को भोगना होता है, और सभी के कर्म घूम-फिरकर, कभी ना कभी सामने आ खड़े होते हैं। चलिये आज कर्म उर्फ 'कर्मा' के इन नियमों को युवाओं की भाषा में सीखते हैं।
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    कठोर किंतु सत्य हैं 'कर्मा' के नियम

    'कर्म' जिसे स्टाइलिश तरीके से 'कर्मा' पुकारा जाता है, निर्दयी किंतु व्यवहारिक जीवन का सत्य है। माना जाता है अपने कर्मों का फल इस जीवन में ही मनुष्य को भोगना होता है, और सभी के कर्म घुम-फिर कर, कभी ना कभी सामने आ खड़े होते हैं। कर्म किसी खडूस अध्यापक से कम नहीं... वो हर गलत काम पर करारी चोट देता है। बाकी सभी चीज़ों की ही तरह कर्म के भी कुछ नियम होते हैं, चलिये आज कर्म उर्फ 'कर्मा' के इन नियमों को युवाओं की भाषा में सीखते हैं -

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    'कर्मा' का महान नियम

    "जो तुम करोगे, वो तुम ही भरोगे"
    यह 'कर्मा' का सबसे महत्वपूर्ण और सच्चा नियम है, और जीवन के अहम फैसले लेने के दौरान आपको इसे ज़हन में जरूर रखना चाहिये। उदाहरण के लिए, अगर आज हम अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करते हैं, तो ये 'कर्मा' तब हमारे पास वापस आएगा जब हमारे बच्चे हमें बेइज्ज़त करेंगे। यही है 'कर्मा' का नियम। तो अगर खुश रहना चाहते हो तो, इज्‍ज़त कमाओ और खुश रहो। खुशियां बांटो और शांति में जियो।

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    सृजन का नियम

    “जीवन यूं हीं नहीं चलता, इसे हमारी भागीदारी की ज़रूरत होती है”
    आप करोड़पति बनना चाहते हैं, और आप इस सपने को पूरा करने के लिये दीवाने हैं। आप जब भी मार्क ज़करबर्ग को देखते हैं तो एक लंबी सी सांस भर कर अपने सपने को बल देते हैं। लेकिन इसके अलावा अपने सपने के लिये आप क्या करते हैं? क्या आप मार्क ज़करबर्ग की तरह अपने सपने को पूरा करने के लिये मेहनत करते हैं? पलक झपकते करोड़पति फिल्मों में ही बन सकते हैं, असलियत में आपका सपना सफल होने के लिये पसीना और शिद्दत मांगता है। चमत्कार भी बैठे रहने से नहीं होते, इसके लिये बाहर निकलना पड़ता है, उपनी क्षमताओं को तराशना और अनकी हद तक परखना होता है।

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    विनम्रता का नियम

    "आप जिस सच्चाई को मानने से इनकार करते हैं, वो पीछा करती है"
    उदाहरण के लिये, आपको किसी पर क्रश है (पहली नज़र वाला तीव्र आकर्षण)। एक तीव्र, पागलपन से भला लेकिन नि:स्वार्थ क्रश। हालांकि जिस इंसान पर आपको क्रश है, वो आपके लिये ऐसा नहीं सोचता और महसूस करता है। आप उस इंसान को अपनी भावनाओं के बारे में बताते हैं, लेकिन वो इंसान कहता है कि, वो आपके लिये ऐसा नहीं सोचता, लेकिन आप फिर भी उसे मनाने की कोशिश करते हैं, सच्चे मन से उसे बताते हैं कि आप उसे कितना प्यार और सम्मान देंगे। लेकिन इस पर भी वो आपकी बात से संतु्ट नहीं हो पाता। आप क्या करेंगे? क्या आप खुद को मार लेंगे?... लेकिन ऐसा करने के बाद भी सच्चाई नहीं बदलेगी। आपको समझना होगा कि आप सब कुछ काबू नहीं कर सकते हैं, सच को स्‍वीकार कर आगे बढ़ जाना ही आपका सच्चा कर्मा है। उस वक्त के लिये, इससे बेहतर कोई और उपाय नहीं। और कर्मा का ये नियम अधिकांश परिस्थितियों पर लागू होता है।

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    विकास का नियम

    “आत्मीय विकास के लिये परिवर्तन की जरूरत हमें हैं, लोगों, स्थानों या अन्य चीजों को बदलने की नहीं” 
    'आत्मीय विकास' का मतलब है, ऐसी उन्नति जो हम आत्मा से करते हैं। ऐसे सदगुण और आभा जो हामारी वास्तविकता को संदर्भित करती है, और लोगों को आकर्षित व प्रभावित करती है। वास्‍तवीकरण (खुद को ईमानदारी से पहचानना), संतुष्टि की कुंजी है। आप लोगों को नहीं बदल सकते हैं, और न ही अपने परिवेश को बदल पाना ही आपके बस में है। ये जीवन का जमीन से जुड़ा सत्य और नियम है।

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    जिम्मेदारी का नियम

    “हमारे जीवन में जो है, हमें उसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए”
    हम जिम्मेदारियों से भाग नहीं सकते। अगर हम ऐसा करते हैं, तो हमारा जीवन एक कायर के जैसा होगा जो न खुद के लिये कुछ करता है और न ही अपने समाज के लिये। आदत की तरह, जिम्मेदारियां भी किसी को हाड-मांस के पुतले से पुरुष बनाती है। इसलिये, अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लें और गलत को सही करें।

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    कनेक्शन का नियम

    “यदि कुछ महत्वहीन लगे तब भी, इसे करना ज़रूरी है, क्योंकि इस ब्रह्मांड में सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है”
    याद करें कि कैसे स्टीव जॉब्स को हस्तलिपि की कक्षाएं (calligraphy lessons) महत्वहीन लगी थीं, लेकिन इन्हीं कक्षाओं के सीखे हुनर ने स्टीव ने दस साल बाद फॉन्ट डिजाइन (मैक कम्प्यूटर के) के बारे में काफी मदद की। ठीक इसी तरह, आप आज जो कुछ भी कर रहे हैं(जो आपको बेकार लग रहा है), वो ज़ाया नहीं जाएगा, क्योंकि आज नहीं तो कल ये आपको बहुत कुछ देकर जाएगा। इससे एक और चीज़ सीखने को मिलती है कि, कोई भी काम छोटा या बेकार नहीं होता है।

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    फोकस का नियम

    “एक समय में आप दो चीज़ों के बारे में नहीं सोच सकते हैं”
    मल्टीटास्किंग निश्चित रूप से एक महान कौशल है, हालांकि इसे करते समय खामियों की संभावना अधिक होती है। इसे कर आपका काम तो पूरा हो जाएगा, लेकिन काम संतोषजनक होगा, असाधारण नहीं। इसलिये यह जरूरी है कि एक समय में एक ही चीज़ पर ध्यान केंद्रित किया जाए और उसमें अपना बेस्ट दिया जाए।

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    परिवर्तन का नियम

    “इतिहास दौहराया जाता है, जब तक हम सीख नहीं लेते कि हमें अब अपना रास्ता बदलना है”
    गलतियों से सीखना एक महत्वपूर्ण कौशल है, जिसे हमें गलती करते ही तुरंत सीख लेने की जरूरत होती है। अन्यथा, हम गलतियां दौहराते रहेंगे और जीवन नरक हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर, अन्य लोगों की गलतियों से सीखना भी एक कमाल का गुण है। हमें बस निरीक्षण करना होता है और उन गलतियों को करने से बचने की जरूरत होती है, जो बाकी लोगों ने की होती हैं।

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    धैर्य और फिर इसके अच्छे फल का नियम

    “अच्छे परिणामों के लिये धैर्य और स्थायित्व की जरूरत होती है”
    आज की तत्कालिक दुनिया में, परिणामों की उम्मिद तुरंत मशीन से मिल जाने वाली कॉफी की गति से मिलने की उम्मीद की जाती है। हालांकि, आगर आप लंबे समय तक लाभान्वित करने वाले परिणाम चाहते हैं, तो आपको लंबे समय काम करना होगा और फिर धैर्यपूर्वक इंतजार करना होगा। जल्दबाजी आपको दूरगामी परिणाम नहीं दे सकती।

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