क्‍या करें अगर आपको सताये लैक्टोज असहिष्णुता

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 24, 2014

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लैक्टोज दूध के उत्‍पादों में पाया जाने वाला प्राकृतिक शुगर है। जब किसी व्‍यक्ति को दूध हजम नहीं हो पाता है तो उसे लैक्‍टोज असहिष्‍णुता की समस्‍या होती है। ऐसी स्थिति में दूध और इससे बने उत्पादों से भी परहेज करना चाहिए।
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    लैक्‍टोज असहिष्‍णुता यानी दूध की एलर्जी

    लैक्टोज दूध के उत्‍पादों में पाया जाने वाला प्राकृतिक शुगर है। यह पनीर, दही, आइसक्रीम आदि में पाया जाता है। जब किसी व्‍यक्ति को दूध हजम नहीं हो पाता है तो उसे लैक्‍टोज असहिष्‍णुता की समस्‍या होती है। लैक्टोज असहिष्णु‍ता की समस्या पेट में होती है। इसकी वजह से पेट में दर्द, सूजन, गैस, पेट के फूलने जैसी समस्‍या हो सकती है। इसके कारण उल्टी, दस्त, मिचली, खाना न पचने जैसी समस्याएं भी होती हैं। ज्यादातर यह समस्या छोटे बच्चों को होती है लेकिन बडे़ लोगों में पेट की बीमारी के उपचार के बाद यह समस्‍या होती है।
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    दूध की एलर्जी का उपचार

    इसके स्वाभाविक उपचार के लिए डाइट में लैक्टोज की मात्रा को कम किया जाता है। इस समस्या से पीड़ित अधिकतर लोग लैक्टोज की थोड़ी मात्रा को सह लेते हैं यानी उन्हें पूरी तरह दूध और दूध से बनी चीजों से परहेज करने की जरूरत नहीं पड़ती है। दूध और आइसक्रीम का परहेज ही पर्याप्‍त माना जाता है। यहां तक कि अधिकतर लोग चाय और कॉफी में भी दूध की थोड़ी मात्रा और दूध से बनी चीजों में मौजूद लैक्टोज को आसानी से पचा लेते हैं। कुछ लोग दही भी पचा सकते हैं।
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    डेयरी उत्‍पादों से दूरी

    कुछ लोगों को लैक्टोज से एलर्जी होती है। यानी उनके शरीर में एंजाइम लैक्टेज की कमी होती है। यह एंजाइम शगुर पाचन के लिए जिम्‍मेदार होता है। डेयरी से बने खाद्य उत्पादों का सेवन करने से ऐसे लोगों को पेट में सूजन, गैस, और गंभीर दर्द हो सकता है। अगर आप लैक्टोज असहिष्णु हैं, तो किसी भी डेयरी उत्पाद का सेवन करने से बचें। इससे लैक्टोज युक्त खाद्य पदार्थ खाने के बाद होने वाले पेट दर्द से बचा जा सकता है। इस बात की पुष्टि करने के लिए आप को लैक्‍टोज से एलर्जी है या नहीं, आप चिकित्सक से सहायता ले सकते हैं।
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    आहार नियमों का पालन करें

    दूध की एलर्जी की समस्‍या से ग्रस्‍त लोगों को आहार के नियमों का दृढ़ता से पालन करना चाहिए। ऐसी स्थिति में दूध और इससे बने उत्पादों से भी परहेज करना चाहिए। हालांकि दूध और दूध से बने आहार लैक्टोज के सामान्य स्रोत हैं, पर कुकीज, केक और सूखे आलू आदि में भी लैक्टोज छुपे रूप में मौजूद होता है, इनकी पहचान कर इनके सेवन से बचना चाहिए। ब्रेड और अन्य बेक्ड चीजों, प्रोसेस्ड अनाज, सूप, कैंडी स्वीट्स, बिस्कुट आदि में भी लैक्‍टोज मौजूद होता है।
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    घर के बने उत्‍पादों का प्रयोग

    लैक्‍टोज असहिष्‍णुता से ग्रस्‍त लोगों को डेयरी उत्‍पादों में तालमेल बिठाना बहुत जरूरी होता है। वह दही का सेवन कर सकते हैं, क्‍योंकि इसमें लैक्‍टोज होता है और यह आसानी से पच भी जाता है। हालांकि यह अलग-अलग व्यक्तियों पर भी निर्भर करता है। घर में बने दही में लैक्टोस की मात्रा कम होती है, इसलिए कोशिश करें कि घर में बने दही का सेवन करें। टोंड मिल्क यानी क्रीम रहित दूध से बेहतर है कि फुल क्रीम दूध का सेवन करें। फुलक्रीम में मौजूद फैट दूध में मौजूद शुगर को धीरे-धीरे पचाने में सहायता करता है, इसके कारण यह आसानी से पच जाता है। इसके अलावा पनीर का सेवन करें क्‍योंकि इसमें लैक्टोज की मात्रा कम होती है।
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    अन्‍य स्रोतों को आहार में शामिल करें

    दूध और दूध से बनी चीजें कैल्शियम और बी-कॉम्लैक्स विटामिन का अच्छा स्रोत होती हैं साथ में इसमें विटामिन डी भी भरपूर मात्रा में होता है। जबकि लैक्‍टोज असहिष्‍णुता से ग्रस्‍त लोगों में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी आमतौर पर देखने को मिलती है। इसलिए दूध में मौजूद सभी पोषक तत्वों को अन्य स्‍त्रोतों से भी हासिल किया जा सकता है जैसे मीट, सोया, मेवा, सेम। कैल्शियम हरी सब्जियों, बाजरा और रागी से मिल जाता है और विटामिन बी हरी सब्जियों में प्रचुर मात्रा में होता है।
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    कैल्शियम के सप्‍लीमेंट लें

    लंबे समय तक लैक्‍टोज असहिष्‍णुता से शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाती है, जो ओस्टियोपोरोसिस का रूप ले लेती है। इसके अलावा विटामिन डी की कमी भी होने लगती है, जो हड्डियों के रोगों को बढ़ाता है। सेहत की इन समस्याओं को कैल्शियम और विटामिन डी सप्लीमेंट्स लेकर भी हल किया जा सकता है।
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    सोया उत्‍पादों का सेवन

    सोयाबीन से बने खाद्य पदार्थों में लैक्टोज नामक शुगर भी नहीं होता है। इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उन लोगों के लिए बहुत ही उपयोगी होते हैं जो पाचन नली में लैक्टोज एन्जाइम की कमी के कारण दूध या दूध से बने खाद्य पदार्थ नहीं खा सकते हैं। सोया से बने उत्‍पाद प्रोटीन का अच्छा स्रोत होते है। इसमें शरीर के लिए जरूरी अमीनो एसिड भी पाया जाता है। सोया उत्पादों में सैचुरेटेड फैट कम मात्रा में पाया जाता है। डेयरी प्रोडक्ट्स के अलावा सोया में भी कैल्शियम और हड्डियों को मजबूती देने वाले पोषक तत्व होते हैं।
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