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जानें क्या है आपके दिमाग के सोचने की हद

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 29, 2016
वैज्ञानिक अंतरिक्ष और ब्रह्मांड के रहस्यों तक तो पहुंच गए लेकिन कुछ ऐसा है जो अभी भी छुटा हुआ है। समलन इंसान का दिमाग, उसका व्यवहार। आज इंसानी दिमाग से जुड़ी कुछ ऐसी ही चीज़ों के बारे में बात करते हैं।
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    दिमाग के सोचने की हद


    इंसानी दिमाग को सबसे ज्यादा रहस्यमय माना जाता है, लेकिन क्या आपको दिमाग की हद पता है? वैज्ञानिक अंतरिक्ष और ब्रह्मांड के रहस्यों तक तो पहुंच गए लेकिन कुछ ऐसा है जो अभी भी छुटा हुआ है। समलन इंसान का दिमाग, उसका व्यवहार। चलिये आज इंसानी दिमाग से जुड़ी कुछ ऐसी ही कुछ चीज़ों के बारें बात करते हैं, जो शायद अभी भी दिमाग की हद से बाहर हैं।  
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    दिमाग के सोचने की हद
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    छोटी लाइन पढ़ना और शॉर्ट टर्म मेमोरी


    हम हमेशा छोटी-छोटी लाइनों को पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। लेकिन मनोवैज्ञानिकों की मानें तो चौड़े और लंबे पैरा मानव मस्तिष्क तेजी से पढ़ और समझ पाता है। क्योंकि देखने में ये ज्यादा सरल और स्पष्ट होता है। मनोविज्ञान के मुताबिक इंसानी दिमाग चाहे कितनी भी सूचनाएं एकत्रित कर ले, जानकारी के छोटे अंशों की बात करें तो उसकी शॉर्ट टर्म मेमोरी में वह 5 से लेकर 10 भागों को ही याद रख पाता है।
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    छोटी लाइन पढ़ना और शॉर्ट टर्म मेमोरी
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    अवचेतन मन


    आपको शायद यह बात थोड़ी हैरान करने वाली लगे, किंतु मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी मसले पर आप चाहे कितना ही विचार-विमर्श कर लें, और कितनी भी मंथन कर लें, आखिर में आप अपने अवचेतन मन से ही निर्णय लेते हैं। कहने का मतलब है कि ज्यादातर मामलों में आपके निर्णय अकस्मात ही होते हैं।
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    अवचेतन मन
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    मल्टी टास्कर


    कई लोग खुद को मल्टी टास्कर मानते हैं, लेकिन सच तो यह है कि कोई भी व्यक्ति मल्टी टास्किंग सटीकता से कर ही नहीं पाता। कम से कम उस तरह से तो नहीं जिस तरह मल्टी टास्कर को समझा गया है। उदाहरण के तौर पर आप वॉक करते हुए अपने दोस्त से बात कर सकते हैं, लेकिन आपका दिमाग इन दोनों में से एक ही चीज को अधिक तरजीह देता है, इसका सीधा सा आर्थ है कि एक ही बार में आप दो चीजों पर उतनी सटीकता से ध्यान नहीं दे सकते हैं।
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    मल्टी टास्कर
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    कई तरह की समस्याएं और भटकाव


    शायद आपको कभी इस बात का एहसास ना हो, किंतु दिन का लगभग 30 प्रतिशत समय आपका मस्तिष्क इधर-उधर भटकने में ही लगा देता है। हमेशा  मस्तिष्क का भटकना गलत भी नहीं, क्योंकि वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि इसी भटकाव के कारण हमारा मस्तिष्क कई तरह की समस्याओं को भी सुलझा देता है।
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    कई तरह की समस्याएं और भटकाव
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    चयन प्रक्रिया और लाल और नीला रंग



    अकसर लोग विकल्पों की अधिकता के बारे में सोचते हैं, लेकिन मनोवैज्ञानिकों के अनुसार चयन करने की स्थिति में हम कम विकल्पों वाली टेबल पर ही जाते हैं, क्योंकि वहां से पसंद करना आसान होता है। वहीं यदि आप कभी ध्यान दें तो देखेंगे कि आपकी आंखों को सबसे ज्यादा लाल और नीला रंग ही आकर्षित करता है। ऐसा हमारी आंखों में मौजूद क्रोमोस्टीरियोप्सिस के कारण होता है, जो इन दोनों रंगों को उभार कर अन्य रंगों को फीका कर देती है।
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    चयन प्रक्रिया और लाल और नीला रंग
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