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बिना पछताये किसी चीज को छोड़ने के लिए ये टिप्स आजमाएं

By:Devendra Tiwari , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 01, 2016
पश्चाताप होना स्वाभाविक है, लेकिन कई बार हमें कुछ चीजों को छोड़ना पड़ता है, ऐसे में पश्चाताप न हो, उसके लिए यह स्लाइडशो पढ़ें।
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    क्यों होता है पश्चाताप

    ‘पश्चाताप’ ऐसा शब्द है जो इंसान को उसके द्वारा की गई गलती की समीक्षा करने पर मजबूर कर देता है। पछतावा हर कदम पर आपको सीख देता है और आपके इरादों को मजबूत बनाता है। इसके कारण ही आप गलतियों को बार-बार नहीं दोहराते हैं। पछतावा तब होता है जब आप गलत होते हैं। कई बार परिस्थिति के हाथों मजबूर होकर आपको ऐेसे निर्णय लेने पड़ते हैं जिसके बाद पश्चाताप होना स्वाभाविक है। लेकिन कई बार इंसान सही निर्णय लेने के बाद भी पछताता है। ऐसे में अगर आप किसी चीज को छोड़ना चाहते हैं तो भी नहीं छोड़ पाते, खासकर रिश्तों को। इस स्लाइडशो में हम आपको बता रहे हैं कि बिना पश्चाताप किये किस तरह किसी चीज को छोड़ें।

    क्यों होता है पश्चाताप
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    समय की मांग है

    कई बार इंसान के हाथ में कुछ नहीं होता और वह समय के हाथों ऐसा मजबूर हो जाता है कि उसकी वजह से उसे ऐसे निर्णय लेने होते हैं जिससे बाद में पछताना पड़ता है। लेकिन वक्त पर किसका जोर चला है। अगर उस वक्त कोई चीज या इंसान आपसे अलग होगा तो होगा, इसमें पछताने से क्या फायदा। ऐसी चीजों को वक्त के हाथों ही छोड़ देना चाहिए। क्या पता आने वाले समय में दोबारा वह आपके पास और आपके साथ हो।

    समय की मांग है
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    दिमाग को समझायें

    दरअसल पश्चाताप बहुत ही मजबूत भावना है। यह यूं ही किसी से जुदा नहीं हो सकती है। ऐसे में अगर आपको पछतावा हो रहा है तो इसके बारे में हमेशा सोचना भी गलत है। ऐसे में सबसे पहले अपने दिमाग को समझायें। क्योंकि यह एक नकारात्मक भावना है जिसका साथी दुख, दर्द, क्रोध, आदि हैं। इससे जितनी जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना ही बेहतर है।

    दिमाग को समझायें
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    स्वीकार करें

    किसी बात को स्वीकारने से न केवल पश्चाताप की भावना दूर होती है बल्कि दूसरों की नजर में आपका दर्जा थोड़ा ऊंचा हो जाता है। ऐसे में अगर आपने कोई निर्णय लिया है तो सबसे पहले उसे स्वीकार कीजिए। कई बार आपकी इच्छाएं आपके ऊपर हावी हो जाती हैं और आप ऐसे निर्णय लेते हैं जिसका पश्चाताप बाद में होता है। लेकिन इन चीजों को स्वीकार करने से पश्चाताप की भावना दूर हो जाती है।

    स्वीकार करें
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    सीख मिलती है

    हम गलतियों से ही सीखते हैं। लेकिन पश्चाताप ऐसी भावना है जिसका साथी नकारात्मकता है। लेकिन गलतियां न दोहरायें इसका मतलब यह भी नहीं कि हम सब कुछ स्वीकार कर लें। कई बार हमें बेहतर भविष्य के लिए ऐसे निर्णय लेने होते हैं जिससे दूसरों को दुख और दर्द होता है। ऐसे में आपका विकास जरूरी है न कि आपकी भावनायें। इसलिए हर कदम पर मिलने वाली शिक्षा पर ध्यान दें और गलतियों को दोहराने से बचें।

    सीख मिलती है
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    समीक्षा करें

    कई बार सही निर्णय भी गलत हो जाते हैं और गलत निर्णय भी सही हो जाते हैं। ऐसे में यह देखने की जरूरत है कि आपके लिए कौन से निर्णय सही साबित हुए गलत वाला या सही वाला। लेकिन कई बार लोग जब भी गलत निर्णय लेते हैं तब बिना उसकी समीक्षा किये पश्चाताप करने लगते हैं। जबकि कई बार उस निर्णय से उनका फायदा भी होता है। इसलिए जब भी कोई कार्य करें उसकी समीक्षा जरूरी है, क्या पता यही आपके लिए सही है।

    समीक्षा करें
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