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रूट कैनाल ट्रीटमेंट को विस्तार से जानें

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Sep 09, 2014
रूट कैनाल एक ऐसा इलाज है जसमें क्षतिग्रस्त या संक्रमित दांत को निकालने के जगह उसकी मरम्मत और साफ-सफाई की जाती है और फिर उन पर कैप लगाया जाता है।
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    रूट कैनाल ट्रीटमेंट

    दांत के संक्रमण के लिए रूट कैनाल सबसे सही इलाज है। दंत चिकित्सा विज्ञान का प्रयास होता है प्राकृतिक दांतों को जहां तक संभव हो सुरक्षित रखा जाए। पहले दांतों में कीड़ा लगने पर धातुओं से उन्हें भरा जाता था या फिर बहुत खराब हो जाने पर दांत को ही निकाल दिया जाता था। लेकिन अब कीड़ा लगे दांतों को बचाने में रूट कैनाल ट्रीटमेंट बहुत कारगर इलाज के रूप सामने आया है। तो चलिये जानें रूट कैनाल पद्धति से जुड़ी जरूरी जानकारियां....
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    रूट कैनाल ट्रीटमेंट
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    रूट कैनाल पद्धति मे क्या होता है?

    रूट कैनाल एक ऐसा इलाज है जसमें क्षतिग्रस्त या संक्रमित दांत को निकालने के जगह उसकी मरम्मत की जाती है। शब्द "रूट कैनाल" दांत की जड़ के अंदर की कैनाल्स (canals) की सफाई से आता है। दशकों पहले, रूट कैनाल उपचार अक्सर दर्दनाक होता था। लेकिन अब नई तकनीक और लोकल एनेस्थेटिक्स की मदद से लोगों को दर्द कम ही होता है।
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    रूट कैनाल पद्धति मे क्या होता है?
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    रूट कैनाल और रूट कैनाल ट्रीटमेंट को समझें

    दांत के 3 भाग होते हैं, बाहरी भाग इनेमल, फिर दांत का मुख्य भाग डेंटीन और फिर दांतों का नर्म गूदा। नस एवं रक्त वाहिकाएं दांतों की जड़ (एपेक्स) के पास से अंदर जाती है और फिर जड़ के कैनाल से होते हुए पल्प चैंबर तक पहुंचती है। दांतों का दिखाई देने वाला मुकुट (क्राउन), के भीतर पल्प चैंबर होता है। रूट कैनाल उपचार में दांत के सूजे या संक्रमित पल्प को हटा दिया जाता है। रोग ग्रस्त (संक्रमित) पल्प को हटाने के बाद उस खाली जगह को साफ किया जाता है, और फिर उसे सही आकार देकर भरा जाता है। रूट कैनाल उपचार आने से पहले रोगग्रस्त दांत को निकाल दिया जाता था, लेकिन अब दांत निकालने की जरूरत नहीं पड़ती।
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    रूट कैनाल और रूट कैनाल ट्रीटमेंट को समझें
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    पल्प में सूजन के कारण व इसके लक्षण

    दांतों में कीड़ा लगना (डीप केविटी), चोट लगना, दांत की सतह का बहुत अधिक घिस जाने आदि के कारण पल्प में सूजन या संक्रमण होता है। इसके लक्षणों में दांतों में असहनीय दर्द, ठंडा या गर्म खाने पर दर्द होना, सोते समय दांत में दर्द होना, दांत के कारण कान या सर में दर्द तथा मसूड़ों में सूजन एवं मवाद निकलना आदि शामिल होते हैं।
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    पल्प में सूजन के कारण व इसके लक्षण
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    कितना समय लगता है

    शुरुआती अवस्था में इलाज कराने पर एक अथवा दो सिटिंग में ही इलाज पूरा किया जा सकता है। अमूमन पहली सिटिंग में ट्रीटमेंट का समय 30 से 40 मिनट तक लग सकता है। लेकिन यदि किसी लापरवाह के चलते वहां संक्रमण हो जाए तो 4 से 5 सिटिंग और लग सकती हैं।
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    कितना समय लगता है
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    आधुनिक उपकरण

    समय के साथ दंत चिकित्सा विज्ञान के आधुनिक उपकरणों ने जहां एक ओर मरीजों की पीड़ा को कम किया है वहीं दंत चिकित्सक का काम भी बेहद आसान बना दिया है। वायरलेस डिजिटल एक्स-रे जैसे उन्नत उपकरणों की मदद से रूट कैनाल ट्रीटमेंट अधिक कुशलतापूर्वक और कम समय में किया जा सकता है। एक्स-रे को कंप्यूटर पर दिखाया जा सकता है, जहां दांत का आकार भी बड़ा और स्पष्ट दिखाई देता है।
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    आधुनिक उपकरण
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    क्या बहुत होता है दर्द?

    दंत चिकित्सा के समय मरीज को कितना दर्द होता है, यह बेहद महत्वपूर्ण होता है। यही नहीं लगभग सभी मरीज रूट कैनाल ट्रीटमेंट में होने वाले दर्द के बारे में जानना चाहते हैं। मरीज को सबसे पहले एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं ताकि संक्रमण का जोखिम कम हो जाए।  यदि मरीज को बहुत अधिक दर्द होता है तो लोकल एनेस्थेसिया दिया जाता है। यदि इससे भी दर्द न मिटे तो पल्प डिवाइटालाइजर का प्रयोग किया जाता है। इससे मरीज को बिलकुल दर्द महसूस नहीं होता।
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    क्या बहुत होता है दर्द?
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    रूट केनाल उपचार के बाद दांत कितने समय तक टिकेगा?

    यदि दांतों का उचित ख्याल रखा जाए तो रूट कैनाल उपचार के बाद दांत जीवन भर साथ दे सकता है। लेकिन रूट केनाल उपचार के बाद भी आपके दांत में सड़न हो सकती है या छेद भी हो सकता है। तो यदि आप अपने दांत की उम्र बढ़ाना चाहते हैं तो उनकी उचित देखभाल और मौखिक स्वच्छता रखनी होगी। फ्लोराइड युक्त टूथ पेस्ट रोजाना दो बार ब्रश और फ्लोस अवश्य करें। साथ हीं साथ नियमित रूप से अपने दांतों का चेकअप एवं उसकी सफाई करवाएं।
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     रूट केनाल उपचार के बाद दांत कितने समय तक टिकेगा?
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    इलाज के दौरान एवं बाद की सावधानियां

    यदि रूट केनाल उपचार का सही लाभ लेना चाहते हैं तो सबसे जरूरी बात की उपचार अधूरा नहीं छोड़ें, चिकित्सक द्वारा दिए गए समय पर अवश्य जाएं (टलाएं नहीं), चिकित्सक की सलाह के अनुसार फिलिंग या कैप अवश्य लगवाएं और साफ साफाई का पूरा ध्यान रखें। यदि चिकित्सक द्वारा कोई एंटिबायोटिक दवा दी गई है तो बताए गये समय तक उसे लें।
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    इलाज के दौरान एवं बाद की सावधानियां
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