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जानें एडीएचडी से ग्रस्‍त बच्‍चों का कैसा हो आहार

By:Devendra Tiwari , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 29, 2016
एडएचडी से ग्रस्‍त बच्‍चों के आहार में इन चीजों को शामिल करें। इन आहारों के सेवन से बच्चों की एडीएचडी की समस्या ठीक हो जाएगी।
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    एडएचडी ग्रस्‍त बच्‍चा और उसका आहार

    अटेंशन डिफिसिट डिसऑर्डर यानी एडीएचडी एक प्रकार की मानसिक बीमारी है। इस बीमारी को नियंत्रित रखने में आहार की भूमिका बहुत अहम होती है। कई शोधों में इस बात का पता चलता है एडीएचडी से ग्रस्‍त बच्‍चों के खानपान पर अगर ध्‍यान दिया जाये तो स्थ्‍िाति बदतर नहीं होती है। इसके लिए उनके आहार में प्रोटीन, निम्‍न-शुगर, मछली का तेल और जिंक आदि का होना बहुत जरूरी है। आहार के जरिये बच्‍चे के उग्र व्‍यवहार को नियंत्रित रखा जा सकता है। इस स्‍लाइडशो में हम आपको बता रहे हैं एडीएचडी से ग्रस्‍त बच्‍चों को किस तरह का आहार देना चाहिए।

    एडएचडी ग्रस्‍त बच्‍चा और उसका आहार
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    प्रोटीन युक्‍त आहार दें

    प्रोटीन युक्‍त आहार जैसे - लीन मीट, मछली, अंडे, बींस, नट्स, सोया, और निम्‍न वसायुक्‍त डेयरी उत्‍पाद इस स्थिति को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। दरअसल दिमागी कोशिकाओं से जुड़ी कोशिकायें एक-दूसरे से संपर्क साधती हैं और उनके अनुसार ही इंसान का व्‍यवहार सामान्‍य और उग्र होता है। लेकिन प्रोटीन युक्‍त आहार ब्‍लड शुगर के जरिये दिमाग को शांत रखने में मदद करता है। प्रोटीन की खास बात यह है कि दवाओं के अभाव में या दवा न देने पर भी यह बच्‍चे के व्‍यवहार को सामान्‍य रखने में मदद करता है।

    प्रोटीन युक्‍त आहार दें
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    मछली के तेल का सेवन करायें

    एडीएचडी और फिश ऑयल दोनों का संबं‍ध बहुत ही अहम है। क्‍योंकि ओमेगा-3 एडीएचडी को सामान्‍य रखने में मदद करता है और ओमेगा-3 सबसे अधिक मछली के तेल में पाया जाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड दिमागी गतिविधियों को निय‍ंत्रित रखने में मदद करता है। चूंकि एडीएचडी से ग्रस्‍त बच्‍चों के शरीर में ओमेगा-3 फैटी एसिड सामान्‍य बच्‍चों की तुलना में कम हो जाता है, इसलिए इस बीमारी से ग्रस्‍त बच्‍चों को ओमेगा-3 फैटी एसिड की अधिक जरूरत होती है। 2009 में स्‍वीडन में हुए शोध में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है। प्रतिदिन बच्‍चे को 700-1000 मिग्रा ओमेगा-3 फैटी एसिड देना चाहिए।

    मछली के तेल का सेवन करायें
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    आयरन के स्‍तर का ध्‍यान रखें

    यह देखा गया है कि एडीएचडी से ग्रस्‍त बच्‍चों के पैरेंट्स आयरन के स्‍तर पर ध्‍यान नहीं देते हैं, जबकि इसकी भूमिका बच्‍चों के व्‍यवहार को सामान्‍य रखने में बहुत अहम होती है। 2004 में हुए एक शोध की मानें तो सामान्‍य बच्‍चों में आयरन के स्‍तर (44) की तुलना में एडीएचडी ग्रस्‍त बच्‍चों में आयरन का स्‍तर (22) आधा होता है। हालांकि बच्‍चों को अधिक आयरन देना सही नहीं है, इसलिए पीडियाट्रिसियन से आयरन के स्‍तर की जांच पहले करायें। अगर आयरन का स्‍तर 35 से कम हो तो इसके बारे में चिकित्‍सक से सलाह लें। आयरन रेड मीट, चिकन और बींस में बहुतायत मात्रा में होता है।

    आयरन के स्‍तर का ध्‍यान रखें
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    जिंक और मैग्‍नीशियम

    एडीएचडी को सामान्‍य रखने में दो मिनरल की भूमिका बहुत महत्‍वपूर्ण होती है और ये हैं- जिंक और मैग्‍नीशियम। जिंक डोपामाइन को नियंत्रित रखता है और दिमाग को मजबूत बनाता है। वहीं दूसरी तरफ मैग्‍नीशियम दिमाग को शांत (एडीएचडी ग्रस्‍त बच्‍चों का व्‍यवहार उग्र होता है) और एकाग्रचित्‍त रखने में मदद करता है। अगर बच्‍चे में इसका स्‍तर 25 प्रतिशत से कम है तो इन मिनरल को बढ़ायें।

    जिंक और मैग्‍नीशियम
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    इनका भी ध्‍यान रखें

    कई शोध में यह देखा गया है कि एडीएचडी से ग्रस्‍त बच्‍चे कई सामान्‍य आहार के प्रति भी संवेदनशील होते हैं। और अगर आप इन आहार की पहचान नहीं कर पायेंगे तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। ये सामान्य आहार डेयरी उत्‍पाद, गेहूं और सोया हैं। इसलिए इस बात की पुष्टि कर लें कि इन आहारों से बच्‍चे को एलर्जी तो नहीं है और अगर एलर्जी है तो इन आहारों को उसे बिलकुल न दें। इसके अलावा बच्‍चे का लालन-पालन सही तरीके से करें और ज्‍यादातर वक्‍त बच्‍चे के साथ रहें।

    इनका भी ध्‍यान रखें
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