इंसुलिन संवेदनशीलता का प्रबंधन करने के तरीके

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 07, 2014

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घंटों कमर तोड़ व्यायाम करने तथा संतुलित आहार योजना का पालन करने के बाद भी यदि आपको अच्छे परिणाम नहीं मिल रहे हैं, तो हो सकता है कि आप इंसुलिन के प्रति संवेदनशील हों। हालांकि इस समस्या से बचा जा सकता है।
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    इंसुलिन संवेदनशीलता

    आप नियमित एक्सरसाइज कर रहे हैं। डाइट को भी नियंत्रित किये हुए हैं। लेकिन इसके बाद भी आपको वजन और इनसुलिन के मामले में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे, तो संभव है कि आप आप 'लो इंसुलिन सेंसिटिविटी' (इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता) से पीड़ित हों। हालांकि कुछ ट्रिक्स की मदद से आप इंसुलिन संवेदनशीलता के प्रभाव को पलट कर स्वास्थ्य से जुड़े जोखिम को कम कर सकते हैं।
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    कब होती है इंसुलिन संवेदनशीलता

    बहुत ज्‍यादा शर्करा का सेवन करने से शरीर इन तत्‍वों को पचाने और पोषक तत्‍वों को अवशोषित करने का प्रतिरोधी बन जाता है। इससे भी खराब स्थिति तो तब होती है जब अग्न्याशय रक्त में शर्करा की मात्रा को संतुलित करने की कोशिश में इंसुलिन की अधिक मात्रा का उत्पादन करने लगता है। अधिकांशतः ऐसा टाइप 2 मधुमेह और थायराइड समस्याओं के शुरुआती चरण में होता है।
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    सरल कार्बोहाइड्रेट की मात्रा करें कम

    इसका अर्थ यह नहीं कि आप फौरन कम कार्बोहाइड्रेट आहार योजना पर चले जाएं। इसके स्‍थान पर बेहतर है कि आप सिंपल और प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट (खास तौर वे जिनमें सिंपल शुगर अच्च हो) का सेवन कर दें। आप ताजे कार्बोहाइड्रेट (जैसे, फल और सब्जियां) तथा प्रकृति में जटिल (जैसे, साबुत अनाज, क्विनोआ, ब्राउन राइस और पास्ता आदि) ले सकते हैं।
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    धीमी गति से पाचन बढ़ाएं

    जब शरीर भोजन को पचाता है तो इंसुलिन भोजन में मौजूद पोषक तत्वों को मांसपेशियों के ईंधन के रूप में परिवर्तित कर देती है। इनसुलिन की मात्रा कम करने के लिए आपको ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिये जो पचने में ज्‍यादा समय लेते हों। वसायुक्त मछली, कच्चे नट्स, रेशेदार साबुत अनाज, और लीन प्रोटीन आदि पचने में अधिक वक्‍त लेते हैं। और ये आहार आपके लिए फायदेमंद होते हैं।
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    दालचीनी

    दालचीनी ऐसा मसाला है जिसका सेवन आप कई चीजों के साथ कर सकते हैं। सुबह नाश्ते की ब्रेड, बेक्ड फूड यहां तक की कॉफी के साथ भी इसका सेवन किया जा सकता है। हालांकि, यह खुशबूदार मसाला इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकता है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की में पोषणविद्‍ (न्यूट्रिशनिस्ट) पॉल डेविस के शोधानुसार दालचीनी फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज को 5 प्रतिशत तक कम करने में मदद कर सकती है। डेविस के अनुसार यह (बुरा) एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को भी कम करती है।  
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    नींद पूरी करें

    टेक्सास विश्वविद्यालय का 'डायबिटीज मेडिकल सेंटर' यह दावा करता है कि डायबटीज और नींद की कमी का गहरा नाता है। नींद की कमी के कारण हार्मोन में खतरनाक उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। इसलिए रात में कम से कम सात से आठ घंटे की नींद लें। इससे इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता से बचा जा सकता है।
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    व्होल ग्रेन फूड

    साबुत अनाज का संतुलित मात्रा में सेवन करना, इंसुलिन सेंसिटिविटी को नियंत्रित करने का सबसे बेहतरीन विकल्प होता है। इसलिए डॉक्टर आपको साबुत अनाज, फलों और सब्जियों से भरपूर ताजे खाद्य पदार्थ खाने की सलाह देते हैं। इतना ही नहीं फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट में उच्च तथा कम सिंपल शर्करा और स्टार्च वाले आहार लेना भी आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।
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    नियमित व्यायाम

    आप शारीरिक गतिविधि और व्यायाम को दैनिक जीवन का एक हिस्सा बनाकर इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता का बेहतर ढ़ंग से प्रबंधन कर सकते हैं। इसका मतलब रोजाना मैराथन करना नहीं है। छोटी-छोटी गतिविधियां जैसे डांसिंग, तैराकी, साइकल चलाना, कुत्ते को टहलाने ले जाना आदि ही इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता को कम करने तथा शरीरिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए काफी है।
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    तनाव प्रबंधन

    तनाव आपके रक्त में शर्करा की मात्रा को  नुकसानदेह ढ़ंग से बढ़ा सकता है। इसलिए इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि लंबे समय तक तनाव होने पर यह इंसुलिन संवेदनशीलता, प्रतिरोध, पेट बढ़ना तथा टाइप 2 मधुमेह के विकास का कारण बन सकता है। इसलिए अपने तनाव को दूर करने के तरीके अपनाएं, जैसे ध्यान, योग, मालिश, विश्राम, और स्पा आदि।
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    अतिरिक्त वजन करें कम

    मोटापा कई बीमारियों की जड़ है, जिनमें से एक इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता भी है। इसे कम करने के लिए नियमित व्यायाम करें, शरीरिक गतिविधियों से जी न चुराएं, बेहतर और लो फैट डाइट लें। तनाव कम करें और पूरी नींद लें।  
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