हिस्‍टेरेक्‍टॉमी से जुड़ी इन दस बातों को डॉक्‍टर आपको नहीं बताते

By:Nachiketa Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 29, 2014

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हिस्‍टेरेक्‍टॉमी एक प्रकार की सर्जरी है, जिसके माध्यम से महिला के गर्भाशय को निकाला जाता है, इससे जुड़ी कई बातें होती हैं जिन्‍हें चिकित्‍सक आपको बताना भूल सकते हैं, उनके बारे में भी जानें।
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    हिस्‍टेरेक्‍टॉमी के बारे में

    यह एक प्रकार की सर्जरी है जिसके माध्यम से महिला के गर्भाशय को निकाला जाता है। गर्भाशय महिलाओं की प्रजनन प्रणाली का अंग है, जो कि बंद मुट्ठी के आकार का होता है। गर्भाशय निकाले जाने के बाद महिला मां नहीं बन सकती है, तथा इसके बाद मासिक धर्म भी नहीं होता है। यदि महिला की ओवरी नहीं निकाली गई है तो महिला मादा हार्मोन पैदा करती रहेंगी। यदि अंडाशय (ओवरी) निकाले गए हैं, तो मासिक धर्म रुक जाएगा। इससे जुड़ी कुछ बातों को चिकित्‍सक आपसे बताना भूल सकते हैं, लेकिन आप इन बातों को भी जानें।

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    सेक्‍स लाइफ खत्‍म नहीं होती

    हिस्‍टेरेक्‍टॉमी कराने के बाद आपकी सेक्‍स लाइफ का खात्‍मा नहीं होता है, इस सर्जरी प्रक्रिया से गुजरने के बाद 2 से 4 सप्‍ताह के बीच में आप दोबारा सेक्‍स संबंध बना सकती हैं। अगर आपकी गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्‍स) को निकाल दिया गया है तो आपको यौन संबंध बनाने के लिए कम से कम 6 सप्‍ताह का समय चाहिए।

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    यह इंडोमेट्रियॉसिस का उपचार नहीं

    इंडोमेट्रियॉसिस (Endometriosis) गर्भाशय से जुड़ी एक प्रकार की समस्‍या है, जिसमें गर्भाशय के बाहर की कोशिकायें पैदा होने लगती हैं या फिर दिखने लगती हैं। तो अगर आपने हिस्‍टेरेक्‍टॉमी कराया है तो आप यह भूल जाइये कि आपको गर्भाशय ग्रीवा से जुड़ी यह समस्‍या नहीं हो सकती है।

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    मीनोपॉज की स्थित आ जाती है

    हिस्‍टेरेक्‍टॉमी कराने के बाद मूड में बदलाव, रात में पसीना होना, अन्रिदा की समस्‍या, तनाव होने की शिकायत हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप मीनोपॉज की स्थिति में आ गई हैं। हालांकि इस सर्जरी के बाद आप मां नहीं बन सकती हैं और मासिक धर्म भी समाप्‍त हो जाता है, लेकिन यह मेनोपॉज से नहीं जुड़ा है।

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    अंडाशय भी शामिल

    हिस्‍टेरोक्‍टॉमी की प्रक्रिया में अंडाशय यानी ओवरी भी शामिल हो सकती है। सर्जरी के दौरान चिकित्सक गर्भाशय से ओवरी और फैलोपियन ट्यूब एक साथ निकाल सकता है। ओवरी महिलाओं के हार्मोन एस्‍टोजन और प्रोजेस्‍टेरॉन के लिए जिम्‍मेदार होती हैं। अगर आपकी दोनों ग्रंथियां निकाल दी गई हैं तो यह आपके सेक्‍सुअल स्‍वास्‍थ्‍य और रीढ़ की हड्डी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

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    शारीरिक बदलाव आते हैं

    इस सर्जरी की प्रक्रिया के बाद आपके शरीर के अंदर कुछ बदलाव आ सकते हैं, जिससे निजात पाने के लिए आप हार्मोन थेरेपी का सहारा ले सकती हैं। लेकिन इसे कराने से पहले एक बार चिकित्‍सक से सलाह जरूर लें।

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    हिस्‍टेरेक्‍टॉमी से बच सकती हैं

    गर्भाशय की सर्जरी कराने से पहले कुछ स्थितियां ऐसी भी हो सकती हैं जिसमें आपको हिस्‍टेरोक्‍टॉमी न करानी पड़े। अगर आपके गर्भाशय में फाइब्रॉयड्स हैं तो सर्जरी के जरिये इनका उपचार संभव है और इसमें गर्भाशय निकलवाने की जरूरत नहीं पड़ती। तो अगर गर्भाशय को निकलवाने से पहले कोई अन्‍य उपचार संभव हो तो उसे जरूर जानें।

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    कम आक्रामक सर्जरी

    अगर आप हिस्‍टेरोक्‍टॉमी कराने जा रही हैं तो यह आपके लिए दर्दनाक हो सकता है। इसलिए कम आक्रामक उपचार के बारे में एक बार चिकित्‍सक से पूछें। लेप्रोस्‍कोपिक या रोबोटिक एसिस्‍टेड हिस्‍टेरेक्‍टॉमी कम आक्रामक हो सकती है। इसमें रक्‍त स्राव भी बहुत कम होता है, और यह बहुत जल्‍दी ठीक भी हो जाता है।

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    मॉर्सीलेशन तकनीक

    मॉसीलेशन (morcellation) एक प्रकार का यंत्र है जो गर्भाशय की सर्जरी के दौरान प्रयोग किया जाता है, इसके फायदे और नुकसान भी हैं। इस तकनीक को प्रयोग करने का सबसे अधिक खतरा होता है, क्‍योंकि इसके कारण कैंसरयुक्‍त कोशिकाओं के फैलने की आशंका बहुत अधिक होती है। हालांकि इस विधि के बाद कैंसर होने होने की संभावना बहुत ही दुर्लभ होता है।

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    कैंसर से बचा सकता है

    हिस्‍टेरोक्‍टॉमी महिलाओं को ओवेरियन कैंसर से बचा सकता है, जो महिलायें बीआरसीए1 और बीआरसीए2 से ग्रस्‍त होती हैं उनमें गर्भाशय कैंसर होने की संभावना अधिक होती है जो इस सर्जरी के बाद समाप्‍त हो जाती है। नेशनल कैंसर इंस्‍टीट्यूट की मानें तो केवल 1 प्रतिशत महिलायें ऐसी होती हैं जिनमें इस जीन के बिना भी ओवेरियन कैंसर हो जाता है, लेकिन इस जीन के साथ ओवेरियन कैंसर होने का खतरा बहुत अधिक होता है।

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    मनोवैज्ञानिक असर

    इस सर्जरी के बाद महिला का शरीर कुछ हप्‍तों में सामान्‍य हो जाता है, लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से वह ठीक नहीं हो पाती है। क्‍योंकि इस सर्जरी के बाद भूख न लगना, अनिद्रा की शिकायत, तनाव आदि से उबरने में वक्‍त लग सकता है, इसके लिए आप किसी मनोवैज्ञानिक की सलाह ले सकती हैं।

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