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तन-मन के जुड़े हैं तार- दिमाग बचा सकता है दिल को होने से बीमार

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 22, 2015
दिल हमारे शरीर का सबसे मज़बूत अंग है, क्योंकि यह गर्भकाल से ही काम करना शुरू कर देता है और जीवन भर हमारे शरीर में रक्त का लगातार संचार करता रहता है, लेकिन यह हमारे मनोभावों के प्रति उतना ही संवेदनशील है।
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    दिमाग़ रखता है दिल का खयाल

    यदि आप डिमेंशिया से बचना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अपने दिल को स्वस्थ रखना होगा। जी हां, फ्रांस में सेंटर फॉर रिसर्च इन इपीडेमियोलॉजी एंड पोपुलेशन हेल्थ के शोधकर्ताओं ने पाया कि स्वस्थ हृदय डिमेंशिया को दूर रखने की एक प्रमुख कुंजी होता है। बड़े पैमाने पर माना जाता है कि मस्तिष्क की याददाश्त, तर्क-विर्तक और समझबूझ की शक्ति कम से कम 60 साल की उम्र तक कम होना शुरू नहीं होती है।
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    दिमाग़ रखता है दिल का खयाल
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    ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की रिपोर्ट

    ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार पोषक पदार्थ खाकर दिल को स्वस्थ रखकर और नियमित व्यायाम से याददाश्त संबंधी समस्याओं को जल्दी आने से रोका जा सकता है, जोकि डिमेंशिया को भी कुछ हद तक दूर रखने में मददगार साबित हो सकता है। डिमेंशिया का फिलहाल कोई इलाज नहीं है। शोधकर्ताओं का मानना है कि, सर्वसम्मति से यह मान्यता उभरकर सामने आ रही है कि ‘जो हमारे हृदय के लिए अच्छा है वह मस्तिष्क के लिए भी अच्छा होता है।’ इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 45 से 70 आयुवर्ग के 7000 से अधिक सरकारी कर्मचारियों का अध्ययन किया।  
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    ब्रिटिश मेडिकल जर्नल की रिपोर्ट
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    दिल और दिमाग का आध्यत्मिक संबंध

    दिल हमारे शरीर का सबसे मज़बूत अंग है, क्योंकि यह गर्भकाल से ही काम करना शुरू कर देता है और जीवन भर हमारे शरीर में रक्त का लगातार संचार करता रहता है, लेकिन यह हमारे मनोभावों के प्रति उतना ही संवेदनशील है। मनदर्शन-मिशन द्वारा किये गए डाक्यूमेंट्री रिसर्च में दिल और दिमाग के इस गहरे संबंध का खुलासा हुआ।  
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    दिल और दिमाग का आध्यत्मिक संबंध
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    ह्रदय और मनोभाव संबंध

    शोध के उनुसार ह्रदय और मनोभावों के बीच संबंधो का वर्णन हज़ारों सालों पहले धार्मिक ग्रंथो में ही नहीं बल्कि चिकित्सा ग्रंथों में भी किया गया है। अंग्रेजी के अनेक शब्द जैसे हार्टब्रेक, हार्टएक, हैवीहार्टेड और हिंदी के शब्दों में दिल टूटना, दिल बैठना, आदि हमारे मनोभावों के प्रति ह्रदय की संवेदनशीलता को ही व्यक्त करते हैं। भाषाविदों के अनुसार एंजाइना, एंगर, एंग्जाईटी व एंग्विश शब्दों की उत्पत्ति ग्रीक शब्द ‘एन्ज’ से हुई, जिसका अर्थ तेज़ मानसिक दबाव या तीव्र मनोदमन से लिया जाता है।
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    ह्रदय और मनोभाव संबंध
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    क्या है मनोरासायनिक कारण

    लगातार व लंबे समय तक मानसिक तनाव की स्थिति बने रहने पर हमारे दिमाग़ के टेम्पोरल लोब में स्थित भावनात्मक केंद्र ‘अमिग्डाला’ नकारात्मक रूप से अति सक्रिय हो जाता है, जिस कारण हमारे शरीर में तनाव बढ़ाने वाले रसायन ‘कार्टिसाल तथा एड्रिनलिन’ का स्राव बढ़ जाता है। और जिसके परिणाम स्वरूप हमारे दिमाग़ के ‘सेरेब्रल कार्टेक्स’ के ‘पेरियाटल लोब’ में दबाव बढ़ जाता है, और इसका दुष्प्रभाव दिल पर पड़ता है।
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    क्या है मनोरासायनिक कारण
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    दिल और दिमाग के बीच गतिशीलता

    एक ताजा अध्ययन में दिल और दिमाग के बीच गतिशीलता होने के कुछ सुराग प्रदान किए हैं। हमारा दिमाग एक प्रोटन बनाता है जिसे मस्तिष्क-व्युत्पन्न न्यूरोट्रोपिक (neurotrophic) कारक (brain-derived neurotrophic factor (BDNF)) कहा जाता है। जो मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को बढ़ने में मदद करता है, नसों के संवाद में मदद करता है, तथा नसों की बदलने और अनुकूल बनने की क्षमता में शामिल होता है। जब इस प्रोटीन का स्तर ऊंचा हो जाता है, इसे एक प्राकृतिक अवसादरोधी माना जाता है।
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    दिल और दिमाग के बीच गतिशीलता
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    अवसाद हृदय रोग का एक बड़ा कारण

    अवसाद हृदय रोग का एक बड़ा कारण होता है। साथ ही अवसाद होने पर हार्ट अटैक, दिल की विफलता या अलिंद के बाद मृत्यु होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। शायद मस्तिष्क-व्युत्पन्न न्यूरोट्रोपिक कारक (BDNF) का निम्न स्तर इस संबंध में कुछ व्याख्या कर सकता है।
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    अवसाद हृदय रोग का एक बड़ा कारण
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    कीमोथेरेपी से बढ़ा जाता है ख़तरा

    कैंसर के इलाज के लिए की गई कुछ कीमोथेरेपी दिल की विफलता का कारण बन सकती हैं। इसी कारण से कीमोथेरेपी ले रहे कई रोगियों के दिल का नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड किया जाता है। कैंसर खुद ही मन और शरीर के तनाव का बड़ा कारण है। कुछ कीमोथेरेपी दिल के BDNF प्रोटीन रिसेप्टर को ब्लॉक कर देती हैं।  
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    कीमोथेरेपी से बढ़ा जाता है ख़तरा
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    बचाव

    इससे बचाव के लिये कुछ खास बरकीब नहीं है, बस दैनिक क्रियाकलाप से उत्पन्न तनाव व दबाव को अपने मन पर हावी न होने दे। मनोरंज़क गतिविधियों तथा मन को सुकून व शान्ति प्रदान करने वाली चीज़ें जैसे ध्यान व विश्राम हर दिन थोड़ी जगह दें। आठ घण्टे की आरामदायक नींद अवश्य लें।
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