शरीर कैसे देता है विटामिन की कमी के संकेत

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 07, 2014

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जब आपके शरीर में कुछ महत्वपूर्ण विटामिनों की कमी होती है तो, शरीर इसके कुछ संकेत देने लगता है। विटामिन की कमी शरीर के लिए हानिकारक हो सकती है।
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    विटामिनों की कमी के संकेत

    जब आपके शरीर में कुछ महत्वपूर्ण विटामिनों की कमी होती है तो, शरीर इसके कुछ संकेत देने लगता है। विटामिन की कमी शरीर और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। खासकर आज की प्रोसेस्ड फूड डाइट के चलते तो यह आम बात होती जा रही है। विशेषज्ञ बताते हैं कि ले ही विटामिनों की कमी से आपको कोई रोग न हो, लेकिन दैनिक जीवन के काम-काज में इसके कारण कई समस्याएं हो सकती हैं। क्योंकि विटामिन शरीर में सभी जैव रासायनिक प्रतिक्रियाओं के लिए सह-कारक हैं। और हमें ठीक ढंग से काम करने के क्रम में इनकी बेहद जरूरत होती है। तो हमेशा निम्न असामान्य विटामिन की कमी के चेतावनी संकेत के प्रति सचेत रहें।
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    मुंह के कोनों में दरारें पड़ना

    यह नियासिन (बी 3), राइबोफ्लेविन (बी 2), और बी 12, आयरन, ज़िंक, और विटामिन बी की कमी का लक्षण है। शआकाहारी लोगों में  यह आम होता है। इससे बचने के लिए दाल, अंडा, मछली, ट्यूना, क्लेम, टमाटर, मूंगफली, और फलियां आदि खाएं।
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    चेहरे पर लाल दाने, या बाल झड़ना

    यह अकसर बायोटिन (बी 7) जिसे कि हेयर विटामिन के नाम से भी जाना जाता है, की कमी से होता है। जब आपका शरीर वसा में घुलनशील विटामिन (जैसे ए, डी, ई, के आदि) का भंडारण कर रहा होता है तो यह पानी में घुलनशील, विटामिन बी को नहीं बचाता। इससे बचने के लिए पकाए हुए अंडे, सामन, एवकाडो, मशरूम, फूलगोभी, सोयाबीन, नट, रसभरी व केले आदि का सेवन करें।
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    लाव व सफेद एक्ने (गाल, हाथ, जांघों और कूल्हों पर)

    ऐसा आमतौर पर आवश्यक फैटी एसिड और विटामिन ए और डी की कमी से होता है। इससे बचने के लिए संतृप्त वसा और ट्रांस वसा का सेवन कम करें और और स्वस्थ वसा में वृद्धि करें। आप चाहें तो केवल डॉक्टर की सलाह से इसके लिए सप्लीमेंट भी ले सकते हैं।
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    हाथ, पैर आदि में झुनझुनी, चुभन, और स्तब्ध होना

    यह विटामिन बी ,जैसे फोलेट (B9), बी -6, और बी 12 की कमी के कारण होता है। यह परिधीय नसों और जहां वे खतम होती हैं, वहां से संबंधित एक समस्या होती है। इन लक्षणों के साथ चिंता, अवसाद, एनीमिया, थकान, और हार्मोन असंतुलन आदि भी देखे जा  सकते हैं। इससे बचने के लिए पालक, शतावरी, बीट, सेम, अंडे आदि का सेवन करना चहिए।
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    मांसपेशियों में ऐंठन

    पैर की उंगलियों, पैरों की मेहराब में दर्द, पैरों के पीछे की ओर दर्द व ऐंठन मैग्नीशियम, कैल्शियम और पोटेशियम आदि की कमी के कारण होत है। इससे बचने के लिए केले, बादाम, अखरोट, स्क्वैश, चेरी, सेब, अंगूर, ब्रोकोली आदि का नियमित सेवन करें।
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    प्रोटीन की कमी से होने वाली मसूडों की बीमारियां

    मसूड़ों की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। लेकिन 35 वर्ष की उम्र के बाद मसूड़ों की बीमारी का खतरा बढ जाता है। और अगर शरीर में प्रोटीन की कमी हो तो इस उम्र में हर चार में से तीन लोग मसूड़ों की बीमारी से पीड़ित होते हैं। प्रतिदिन 1000 मिलीग्राम प्रोटीन और विटामिन खाने से मसूडों की समस्या कम होती है।
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    मल्टीपल स्क्लेरोसिस

    जिन लोगों में विटामिन 'डी' की कमी होती है उन्हें मल्टीपल स्क्लेरोसिस होने का जोखिम अधिक रहता है। कनाडा में हुए एक शोध के अनुसार सूरज की रोशनी से मिलने वाला यह विटामिन मल्टीपल स्क्लेरोसिस (एमएस) को रोकता है। स्क्लेरोसिस में अंग या टिश्यू  कठोर हो जाते हैं। इस अध्ययन की रिपोर्ट मांट्रियल में मल्टीपल स्क्लेरोसिस पर आयोजित एक सम्मेलन में प्रस्तुत की गई थी।
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    शिशुओं की मांसपेशियों में मरोड़ और सांस लेने में परेशानी

    शिशुओं में विटामिन डी की कमी होने पर मांसपेशियों में मरोड़े, सांस लेने में परेशानी और दौरे आने की समस्या हो सकती है। उनके शरीर में कैल्शियम की भी कमी हो जाती है। सांस की तकलीफ की वजह से बच्चे की पसलियां नर्म रह जाती हैं और आस-पास की मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती हैं।
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