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भूखे होने पर शरीर कैसे रखता है आपको जीवित

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 27, 2014
सिर्फ इसलिए कि आप भूखे है इसका मतलब यह नहीं कि आप असहाय बन गए। इस स्‍लाइड शो में जनिये कि शरीर आपको जीवित और सक्रिय रखने के लिए कैसे लड़ती है।
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    बिना भोजन के जीवन

    मानव शरीर ऑक्‍सीजन के बिना पांच से दस मिनट तक और बिना पानी के 3-8 दिनों तक जीवित नहीं रह सकता हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि बिना भोजन के लोग 70 दिनों तक भूख रह सकते हैं। यह कैसे संभव है?

    बिना भोजन के जीवन
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    शारीरिक और प्रतिरोधक क्षमता

    इस जवाब विकसित उतर शारीरिक और प्रतिरोधक क्षमता की एक श्रृंखला में निहित है। यह एक ऐसी श्रृंखला है जिसमें अगर आपको भूखा रहना पड़ें तो ये लंबे समय तक जीवित रखने के लिए काम करती हैं। सिर्फ इसलिए कि आप भूखे है इसका मतलब यह नहीं कि आप असहाय बन गए। इस स्‍लाइड शो में जनिये कि शरीर आपको जीवित और सक्रिय रखने के लिए कैसे लड़ती है।

    शारीरिक और प्रतिरोधक क्षमता
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    भूखे रहना

    अगर आप इसकी परिभाषा के बारे में जानना चाहते है तो हम कहेंगे कि भूखे रहना एक प्रक्रिया है। हमारा शरीर कार की तरह नहीं है कि गैस न होने पर उसे बंद कर दें। जब हम लंबे समय तक कम मात्रा में एनर्जी लेते है लेकिन शरीर में पानी उपलब्‍ध होता है तो हमारी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के बाद वाली श्रृंखला में द‍ाखिल हो जाता है। यह वह श्रृंखला है जिसमें शरीर पहचाता है कि भोजन दुर्लभ है लेकिन फिर भी कार्य करता है।

    भूखे रहना
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    0-6 घंटे खाने के बाद

    खाने के जल्‍द ही बाद, हमारा शरीर ग्‍लूकोज के उत्‍पादन के लिए ग्‍लाइकोजन(अणु जिसमें ऊर्जा इकट्ठी होती है) को तोड़ना शुरू कर देता है। जब हम सामान्‍य रूप से खाते हैं तो ग्‍लूकोज का उपयोग एक प्राथमिक ईंधन के रूप में करते है और इस भंडारण के मोड़ पर सब ठीक रहता है और हम खुश रहते हैं। साथ ही  ग्‍लूकोज लीवर और मांसपेशियों में भविष्‍य के उपयोग के लिए शरीर के आस-पास फैटी एसिड के साथ संग्रहीत होकर पैक हो जाता है।

    0-6 घंटे खाने के बाद
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    एनर्जी के आवंटन

    एनर्जी के आवंटन के समय दिमाग को शरीर की कुल संग्राहित एनर्जी में से लगभग 25 प्रतिशत की आवश्‍यकता होती है और बाकि एनर्जी की जरूरत हमारी मांसपेशियों के ऊतकों और लाल रक्त कोशिकाओं के ईंधन के लिए होती है। जब छह घंटे के लिए ग्‍लूकोज जलने के मोड में चला जाता है, तो इस समय बिना भोजन के रहना मुश्किल हो जाता है।

     

    एनर्जी के आवंटन
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    6-72 घंटे खाने के बाद

    खाने के छह घंटे या उससे अधिक देर भूखे रहने पर आप अम्लरक्तता के स्‍तर में प्रवेश कर लेते हैं। यह भूखा रहने के प्रवेश के रूप में पहले महत्‍वपूर्ण चयापचय चरण में बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। इस बिंदु पर आकर सभी ग्लाइकोजन भंडार समाप्त हो जाते है और आपके शरीर के पास ऊर्जा के लिए फैटी एसिड से टकराना शुरू करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता है।

    6-72 घंटे खाने के बाद
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    अम्लरक्तता के स्‍तर

    अम्लरक्तता के स्‍तर पर सब कुछ अच्‍छी तरह से होता है साथ ही आपका दिमाग ईंधन के स्रोत के रूप में सीधा फैटी एसिड का इस्‍तेमाल नहीं करता है। ये फैट बड़े होते हैं और रक्त मस्तिष्क बाधा पार नहीं कर सकते। इसलिए बिना भोजन के 24 से 48 घंटे के लिए आपका मस्तिष्‍क ईंधन के रूप में शेष ग्लूकोज भंडार का उपयोग करता है जबकि शरीर के बाकी भाग अम्लरक्तता के स्‍तर में चला जाता है।

    अम्लरक्तता के स्‍तर
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    ग्‍लूकोज की कमी

    इस स्‍तर में सबसे बड़ी पेरशानी यह होती है कि ग्लूकोज पर्याप्त नहीं होता है, मस्तिष्क को प्रतिदिन 120 ग्राम ग्लूकोज की आवश्यकता होती है। इस स्‍तर पर, मस्तिष्क को भूखे रहना होता और वह तीन दिन में मर जाते हैं, लेकिन वास्‍तव में ऐसा नहीं होता है, क्‍योकि शरीर के पास एक बैकअप योजना विकसित होती हैं जिससे उसको आहार मिलता रहता है।

    ग्‍लूकोज की कमी
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    72 घंटे और उससे आगे

    दिमाग शरीर से बाहर नहीं है अगर उसके प्रतिदिन की ग्‍लूकोज की मात्रा पूरी नहीं होती है तो अपनी इस मात्रा को पूरा करने के लिए वह शरीर से प्रोटीन लेता है। इस स्‍तर में भूखा रहने पर शरीर सभी कोशिकाओं को खून में अमीनो एसिड विज्ञप्ति के लिए प्रोटीन को तोड़ना शुरू कर देते है। इन अमीनो एसिड को लीवर की सहायता से ग्लूकोज में परिवर्तित कर देता और आपका दिमाग फिर से खुश हो जाता हैं।

    72 घंटे और उससे आगे
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    ऑटोफेगी स्‍तर

    इस स्‍तर में आप अफसोस चरण में प्रवेश करते है जिसको ऑटोफेगी स्‍तर कहते हैं। इस स्‍तर में मांसपेशियां क्षय को बाहर निकालना शुरू कर देता है। इस समय आप सचमुच अंगोपयोग कर रहे होते हैं। इस स्‍तर में हमारा शरीर यह तय करने में सक्षम होता हैं कि कौन सी कोशिकाओं को तोड़ना है और कौन सी को नहीं। यह प्रक्रिया जो हमारी शरीर की चयापचय की जरूरत है और एक्टिव रहकर हमारी क्षमता को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    ऑटोफेगी स्‍तर
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    मौत

    कहने की जरूरत नहीं है लेकिन अगर गोलमाल युद्धाभ्यास के बावजूद भी शरीर इतनी अच्छी तरह काम नहीं कर पा रहा है और ज्यादातर विटामिन और खनिज की कमी के कारण भूखा रहने से प्रतिरक्षा प्रणाली पर बहुत बुरा असर पड़ता है। तो वास्तव में, कुछ लोग बहुत कमजोर हो जाते हैं भूखा रहने के दौरान प्रतिरक्षा संबंधी बीमारियों से मर जाते हैं।

    मौत
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