बच्‍चों में नेत्र रोगों की समस्या से कैसे निपटें

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 08, 2015

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बच्चों में दृष्टि दोष के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में जरूरी है कि बच्‍चे की आंखों की जांच नियमित रूप से करवाई जाए ताकि अगर कोई समस्‍या हो तो समय रहते उसका उपचार किया जा सके।
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    बच्‍चों में नेत्र रोग

    बच्चों की आंखे काफी नाजुक होती हैं, उनकी आंखे पूरी तरह से परिपक्व हो रही होती हैं, इसलिए उन्हें खास देखभाल की आवश्यकता होती है। देखा जाता है कि बच्चे बार-बार आंखों पर हाथ लगाते हैं जिसकी वजह से आंखों में संक्रमण की आंशका बढ़ जाती है। कभी-कभी यह संक्रमण बढ़ते बच्चों की आंखो के लिए काफी हानिकारक भी साबित हो सकते हैं। इसलिए इससे बचाव व समस्या का तुरंत उपचार जरूरी होता है। तो चलिये जानें युवा बच्‍चों में नेत्र रोगों की समस्या से कैसे निपटें।
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    बढ़ रहे हैं मामले

    बच्चों में दृष्टि दोष के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। खासतौर पर निकट दृष्टिदोष, जिसमें दूर की वस्तुएं साफ दिखाई नहीं देती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन समस्याओं से बचाव के लिये बच्चों में आंखों की नियमित जांच जरूरी है, साथ ही पढ़ने का सही तरीका, प्राकृतिक रोशनी और स्क्रीन पर कम समय बिताना जरूरी है।  
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    आंखो की जांच जरूरी

    कई बार बच्चों में जन्म से ही आंखों संबंधी समस्याएं हो सकती है। अतः बच्चों के जन्म के बाद उसकी आंखो की जांच करवाना आवश्यक होता है। जांच के दौरान समस्या शुरुआती अवस्था में ही पता चल जाती हैं, जिससे उन्हें ठीक करना आसान हो जाता है। बच्चे की उम्र बढ़ने के साथ समस्याएं भी बढ़ती जाती हैं, इसलिये इस विषय में गंभीरता दिखानी चाहिये।
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    विशेषज्ञ की राय

    दरअसल मानव शरीर में करीब दो दर्जन जीन ऐसे होते हैं, जो निकट दृष्टिदोष का कारण हो सकते हैं। इसमें आनुवंशिक कारणों की भी अहम भूमिका होती है। नेचर जेनेटिक्स जर्नल में प्रकाशित ब्रिटेन शोधकर्ताओं द्वारा 45 हजार से ज्यादा लोगों पर किए गए एक अध्ययन के अनुसार भारत में तीन में से एक व्यक्ति को मायोपिया होता है।
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    आंखों की जांच कब कराएं

    • जन्म के समय बालरोग विशेषज्ञ करते हैं जांच।
    • 3 साल की आयु में, जब बच्चा स्कूल जाना शुरू करता है।
    • 5 साल की आयु में फिर एक बार बच्चे की आंखों की जांच करा लेनी चाहिए।
    • ऐसे बच्चे जिनकी नज़र कमजोर है, उन्हें 14 वर्ष के होने तक हर 6 मिने बाद जांच अवश्य करानी चाहिए। और उसके बाद एक साल में एक बार।
    • किशोर व वयस्क, जो चश्मे व लैंस उपयोग करते हैं, उन्हें हर 2 महिने बाद आंखों की जांच करानी चाहिए।
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    बच्चों को डॉक्टर के पास कब ले जाएं

    • एक आंख का घूमना या किसी ओर दिशा में देखना।
    • बच्चों की आंख बार-बार झपकना, टीवी देखते वक्त या फिर किताब पढ़ते समय आंख मसलने पर।  
    • सही न देख पाना या हाथ से वस्तुओं का बार-बार गिर जाने आदि पर।
    • चीजों को बहुत नज़दीक लाकर देखना और एक चीज़ को देखने के लिए सिर को झुकाने पर।
    • बिना कारण सिरदर्द, आंखों में पानी आना या एक वस्तु का दो-दो दिखाई देने पर।
    • फोटो में आंखों में सफेद निशान नज़र आने पर।

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    दृष्टि को ठीक रखने के उपाय

    • प्राकृतिक रोशनी में समय बिताएं।
    • टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल और वीडियो गेम्स का कम से कम इस्तेमाल करें।  
    • आंख और किताब/स्क्रीन के बीच सही दूरी (कम से कम 30 सेमी. की दूरी) का हमेशा ध्यान रखें।
    • ठीक रोशनी में काम करें।
    • किताब, टेबलेट या फोन आदि पर लेटे हुए देर तक गेम्स न खेलें।

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    सावधानी रखें बचाव करें

    किसी भी रोग का निदान उसकी शुरुआती अवस्‍था में ही करना सरल होता है। ऐसे में जरूरी होता है कि बच्‍चे की आंखों की जांच नियमित रूप से करवाई जाए ताकि अगर कोई समस्‍या हो तो समय रहते उसका उपचार किया जा सके।
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