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त्‍वचा की सामान्‍य समस्‍याओं से कैसे निपटें

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 06, 2014
अगर आप त्‍वचा संबंधी समस्‍याओं जैसे मुंहासों, एक्‍जीमा और स्‍पाइडर वेन से पी‍ड़ि‍त है तो घबराने की जरूरत नहीं हैं। क्‍योंकि बीमारी के बारे में जानकारी होने पर, इनका इलाज आप आसानी से घर पर कर सकते हैं।
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    त्‍वचा की सामान्‍य समस्‍याएं

    कभी न कभी त्‍वचा संबंधी समस्‍याओं से हम सभी ग्रस्‍त होते हैं, और इनमें से कई समस्‍याये तो ऐसी भी है जो बार-बार होती हैं जैसे एलर्जी, एक्‍ने, संक्रमण आदि। मायो क्‍लीनिक द्वारा कराये गये शोध के अनुसार अन्‍य बीमारियों की तुलना में त्‍वचा की समस्‍या के कारण लोग चिकित्‍सक के पास जाते हैं। अगर आप त्‍वचा संबंधी समस्‍याओं जैसे मुंहासों, एक्‍जीमा और स्‍पाइडर वेन से पी‍ड़ि‍त है तो घबराने की जरूरत नहीं हैं। क्‍योंकि बीमारी के बारे में जानकारी होने पर, इनका इलाज आप आसानी से घर पर कर सकते हैं। image courtesy : getty images

    त्‍वचा की सामान्‍य समस्‍याएं
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    मुहांसे

    यह त्‍वचा की आम समस्‍या है जो किशोरों में ज्‍यादातर देखी जाती है। इस उम्र में शरीर में कई प्रकार के रासायनिक व हार्मोंन परिवर्तन तेजी से होते हैं और इनसे चेहरे पर मुहांसे निकलने शुरू हो जाते हैं। सेलीसिलिक (चिरायता) एसिड युक्‍त फेसवास का प्रयोग करके मुहांसों को होने से रोका जा सकता है। यदि आपको मुहांसे हो भी गये हैं तो इसके प्रयोग से कुछ दिनों में ठीक भी हो जायेंगे। इसके अलावा बाहर से आने के बाद अपनी मुंह को अच्‍छे से साफ कीजिए, क्‍योंकि पसीना, धूल और त्‍वचा के तैलीय होने के कारण भी मुहांसे होते हैं। image courtesy : getty images

    मुहांसे
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    एथलीट फुट

    एथलीट फुट, खमीर के सतही संक्रमण के कारण, पैरों की उंगालियों में होने वाली समस्‍या है। यह संक्रमण सार्वजनिक जगहों के प्रयोग के कारण अधिक होता है, जैसे - सार्वजिनक शॉवर, सार्वजनिक लॉक-अप आदि के प्रयोग के कारण। यदि संक्रमण फैलने के दौरान ही उपचार कर लिया जाये तो यह समस्‍या गंभीर समस्‍या नहीं बनती। लेकिन अगर इसका उपचार समय पर न किया जाये तो यह दर्दनाक हो सकता है। इस संक्रमण को रोकने के लिए एंटी-फंगल क्रीम का प्रयोग करें। लेकिन यह समस्‍या अगर 2 सप्‍ताह से ज्‍यादा समय तक रहे तो चिकित्‍सक से जरूर मिलें। image courtesy : getty images

    एथलीट फुट
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    एक्जिमा

    यह त्वचा की एक आम समस्या है। इसमें त्वचा लाल होकर सूज जाती है और उसमें खुजली होती है। घरेलू महिलाओं में लगातार पानी और डिटर्जेट के संपर्क में रहने के कारण एक्जिमा होता है। एक्‍जिमा से बचने के लिये कुछ उपचार जैसे, लक्षणों को बिगाड़ने वाले उत्तेजकों से बचें, घावों को कुरेदें नहीं, अधिक समय तक स्नान न करें और साबुन का प्रयोग कम से कम करें आदि शामिल है। एक्जिमा से पीड़ित लोगों को दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी व अन्य दूसरे तरल पेय पीने की आदत बनानी चाहिए। इन लोगो को प्रात: काल खाली पेट 3-4 गिलास पानी पीने से बहुत राहत मिलती है। मगर इस पानी के साथ एक चम्मच आंवला चूर्ण या फिर 2-3 चम्मच शहद के साथ एक नींबू निचोड़कर पीया जाये तो बहुत अच्छा रहता है। image courtesy : getty images

    एक्जिमा
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    जॉक खुजली

    जॉक खुजली वास्तव में कवक के कारण होता हैं। लेकिन त्‍वचा की यह समस्‍या उन लोगों को ज्‍यादा होती है, जिन्‍हें पसीना अधिक होता है यानी जिम जाने वालों को यह समस्‍या अधिक हो सकती है। लेकिन यदि एंटी-फंगल क्रीम का प्रयोग किया जाये तो इस समस्‍या से निजात पायी जा सकती है। इससे बचाव के लिए जरूरी है शरीर के ऐसे हिस्‍सों को सूखा रखें जहां पर पसीना अधिक होने की संभावना हो। इसलिए एक्‍सरसाइज के बाद आने वाले पसीने को अच्‍छे से पोंछ लेना चाहिए। image courtesy : getty images

    जॉक खुजली
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    वार्ट्स

    वार्ट्स एचपीवी के कारण होने वाली त्‍वचा की समस्‍या है। लेकिन यह समस्‍या शरीर के अन्‍य हिस्‍सों की तुलना में हाथों और पैरों को ज्‍यादा प्रभावित करती है। इसके उपचार के कई तरीके हैं, जैसे - लेजर थेरेपी, इम्‍यूनोथेरेपी, सेलीसिलिक एसिड का प्रयोग, आदि। लेकिन इस समस्‍या की खास वजह यह भी है कि यह अपने आप भी ठीक हो जाता है। image courtesy : getty images

    वार्ट्स
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    पिग्मेंटेशन

    पिग्मेंटेशन त्वचा पर काले या गहरे रंग के धब्बे के रूप में उभरते हैं, यह त्वचा की गंभीर समस्या बनती जा रही है। अल्ट्रावॉयलेट किरणों के कारण त्वचा में मेलेनिन का निर्माण अधिक होने के कारण यह समस्‍या होती है। इसके अलावा हार्मोन असंतुलन विशेषकर महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान या गर्भ निरोधक गोलियों के सेवन और तनाव के कारण भी पिग्मेंटेशन की समस्या हो जाती है। इस समस्‍या से बचने के लिए घर से बाहर जाते समय सनस्‍क्रीन लोशन का इस्‍तेमाल करें। इसके अलावा पीलिंग से काफी फायदा होता है। इनमें ग्लाईकोलिक एसिड , मैंडेलिक एसिड और लैक्टिक एसिड का यूज किया जाता है। साथ ही कच्चे दूध और बेसन में नींबू के जूस की कुछ बूंदें माइल्ड लैक्टिक पील की तरह से काम करती हैं। अगर घर में फटे हुए दूध से चेहरा साफ करें, तो भी फायदा होगा। image courtesy : idiva.com

    पिग्मेंटेशन
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    स्‍पाइडर वेन्‍स

    स्‍पाइडर वेन्‍स छोटे केशिकाएं है, जो त्‍वचा की सतह के पास होते है। और लाल, कभी-कभी बैंगनी और छोटी घुमावदार लाइनों की तरह लगते हैं। यह आमतौर पर चेहरे और पैरो पर पाये जाते हैं। निर्जलीकरण के कारण यह समस्या विकसित होती है, शरीर को हाइड्रेटेड करने के लिए भरपूर मात्रा में पानी लें। संयंत्र यौगिकों की एक विस्‍तृत विविधता पाने के लिए, विभिन्‍न रंग के फल और सब्जियों का सेवन करें। इनमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट रक्‍त वाहिकाओं के नुकसान को रोकने और कोलेजन के उत्‍पादन में समर्थन में सहायक होता है।  image courtesy : getty images

    स्‍पाइडर वेन्‍स
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    रेजर बर्न

    यह समस्‍या पुरुषों में होती है, और आमतौर पर शेविंग के वक्‍त अधिक होती है। इसके कारण गालों पर और गले पर लाल चकत्‍ते हो सकते हैं। नहाने के बाद यदि शेविंग की जाये तो यह समस्‍या नहीं होती है, क्‍योंकि इस दौरान बाल मुलायम हो जाते हैं और शेविंग करने में अधिक दिक्‍कत नहीं होती है। इसके अलावा अच्‍छे किस्‍म के शेविंग किट का प्रयोग कीजिए। image courtesy : getty images

    रेजर बर्न
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