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आत्मसंयम को मजबूत कैसे करें

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 24, 2014
अक्सर लोग गुस्से में विवेक खोकर तुरंत ही आत्म-संयम खो बैठते हैं। ये सच है कि समय बीतने के साथ-साथ लोगों के आत्मसंयम में भारी कमी आयी है, जिसके गंभीर परिणाम होते हैं।
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    आत्मसंयम

    महात्‍मा गांधी ने कहा था कि

    आत्‍मसंयम, अनुशासन और
    बलिदान के बिना राहत या
    मुक्ति की आशा नहीं की
    जा सकती।

    और ये बात सोलह आने सच भी है। लेकिन अक्सर लोग गुस्से में विवेक खोकर तुरंत ही आत्म-संयम खो बैठते हैं। ये सच है कि समय बीतने के साथ-साथ लोगों के आत्मसंयम में भारी कमी आयी है, जिसके गंभीर परिणाम होते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि वे क्यों कुछ क्षण भी ठहरकर अपनी प्रतिक्रिया के घातक परिणामों पर विचार नहीं कर पाते हैं? और किस प्रकार से वे अ पने आत्मसंयम को मजबूत को मजबूत कर सकते हैं? चलिये जानें -
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    आत्मसंयम
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    क्यों कम हो रहा है आत्मसंयम

    दरअसल मनुष्य का जीवन बहुत जटिल है। वास्तव में वह था तो बुहत सरल, लेकिन खुद हमने ही उसे जटिल बना दिया। जब इंसान पैदा होता है, तो उसके पास कुछ नहीं होता। और इस दुनिया से जाते समय भी उसके हाथ खाली ही होते हैं। लेकिन और ज्यादा पाने की आपाधापी में दिन गुजरने के साथ उसका आत्मसंयम टूटता जाता है।
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    क्यों कम हो रहा है आत्मसंयम
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    आत्मसंयम के लाभ

    आत्मसंयम द्वारा हमें नित्य प्रति बार बार एक ही तरह के कामों में फंसे रहने से मुक्ति मिल सकती है। उससे हमें बहुत सी व्यर्थ की आदतों से छुटकारा मिल सकता है। आत्मसंयम का जीवन स्रजनशील जीवन है। कुछ नया गढने ,नया बनाने का अवसर हमें उससे प्राप्त होता है। किन्तु आत्मसंयम के लिए लगन की आवश्यकता है । वह हमें जन्म से प्राप्त नहीं होती । उसे हम अपने प्रयत्न और अभ्यास से ही प्राप्त कर सकते है। हमारे मन में जो कूडा करकट जमा हो जाता है, मकडजाले लग जाते है , इन्हें झाडू देकर साफ़ करना होगा। जैसे रेलवे स्टेशन पर सफाई कर्मचारी झाड़ू और कूड़े की टोकरी लिए बराबर प्लेटफोर्म की सफाई में लगे रहते है ऐसे ही हमें मन के फर्श को निरंतर साफ़ करते रहना होगा।
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    आत्मसंयम के लाभ
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    समझना होगा आत्मसंयम का महत्व

    काम, क्रोध, लोभ, मोह और भय हमेशा हमारा रास्ता रोकते हैं और हमें आगे नहीं बढ़ने देंगे। इसलिये इन्हें रास्ते से हटाना जरूरी होता है। और काम, क्रोध, लोभ, मोह और भय को दूर करने के लिये आपको आत्मसंयम को बढ़ाना होगा।
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    समझना होगा आत्मसंयम का महत्व
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    कठिन नहीं, सुखद है आत्मसंयम

    आत्मसंयम की उपयोगिता को किसी भी सूरत में और किसी भी काल में कम नहीं आंका जा सकता है। यह हां यह भी सच है कि प्रारंभ में आत्मसंयम का मार्ग थोड़ा कठिन लगता है। यह कुछ ऐसा है, जैसा कि आंवला खाते समय पहले उसका स्वाद बहुत खट्टा लगता है लेकिन खाने के बाद पानी पीने पर यह मीठा लगता है और स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। इसी तरह इंद्रिय विषयों का संयम शुरुआत में  कठिन लगता है लेकिन इंद्रियों का संयम करने वाला हमेशा सुखी रहता है।
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    कठिन नहीं, सुखद है आत्मसंयम
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    कम अहंकार

    आत्मसंयम का मानसिक स्वास्थ्य पर बेहतर प्रभाव पड़ता है। लेकिन इसके स्तर को बनाए रखने के लिए आपको अपने अहंकार को कम करना होगा। अहंकार को कम करने के लिए आप आत्मसंयम की एक्सरसाइज कर सकते हैं। बस दिमाग को शांत रखें और विवेक और दया भाव से काम करें।
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    कम अहंकार
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    पुरस्कृत करें

    पुरस्कार वास्तव में आत्म-नियंत्रण को मजबूत बनाने में मददगार हो सकता हैं। कई शोधों में भी पाया गया कि पुरस्कृत किये जाने पर लोगों ने न सिर्फ बेहतर काम किया बल्कि वे काम के दौरान ज्यादा उदार व उत्साहित दिखे। इसके लिए जरूरी नहीं कि पुरस्कार हमेशा पैसा ही हो। लोगों के सामने काम की तरीफ भी एक बेहतर पुरस्कार हो सकता है।  
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    पुरस्कृत करें
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    आत्मस्वीकृति

    कभी कभी एक बुरी आदत से परहेज का मतलब भी आत्म-नियंत्रण की कसरत की तरह होता है। ऐसा करने का एक तरीका यह आत्मस्वीकृति का उपयोग करना भी है। इसका मतलब है आप जिन कोर चीजों में विश्वास करते हैं उनकी पुष्टि करना। ये कोर चीज़ आपका परिवार, आपकी रचनात्मकता या ऐसी कोई भी चीज हो सकती है, जिसमें आपका अटूट विश्वास हो।
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    आत्मस्वीकृति
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    अपने दिल का इस्तेमाल करें

    दिल अक्सर दिमाग पर राज़ करता है, इसलिए स्वयं पर नियंत्रण बढ़ाने के लिए अपनी भावनाओं का उपयोग करें। ज ब आप दिल से सोचते हैं तो न सिर्फ किसी के बारे में बेहतर सोच पाते हैं, बल्कि बेहतर महसूस भी करते हैं।
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     अपने दिल का इस्तेमाल करें
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