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छोड़ें बच्चों पर चिल्लाना

By:Shabnam Khan , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 21, 2014
बहुत से माता-पिता की आदत होती है कि वो बच्चों पर छोटी छोटी बातों पर चिल्लाते रहते हैं। आपको अपनी इस आदत को छोड़ने की जरूरत है। बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार न केवल आप दोनों के संबंध को अच्छा बनाएगा बल्कि बच्चे के विकास में भी सहायक होगा।
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    बच्चों पर चिल्लाने से बिगड़ सकती है बात

    शायद ही कोई माता-पिता हों, जिन्हें अपने बच्चों पर चिल्लाना न पड़ता हो। बच्चों की शरारत, जिद, बात न मानना या फिर उनकी कोई गलती करना, गाहे-बगाहे आपको मौका दे ही देता है कि आप उन पर गुस्से से चिल्लाएं। बच्चों के साथ आपके इस व्यवहार का कारण हमेशा बच्चे ही हों ये जरूरी नहीं है। कई बार दफ्तर की फ्रस्ट्रेशन, माता-पिता के आपसी रिश्तों में खटास, थकान से पैदा हुआ चिड़चिड़ापन या फिर खराब स्वास्थ्य ऐसे कारण बन जाते हैं, जिनका गुस्सा हम बच्चों पर उतार देते हैं। लेकिन बच्चों पर चिल्लाने से आपके और आपके बच्चों के आपसी संबंध खराब हो सकते हैं। इसके साथ साथ आपकी इस आदत का बुरा असर बच्चों पर पड़ता है। तो आइये, जानते हैं कुछ ऐसे खास तरीके, जिनको आप अपने बच्चों पर चिल्लाने की बुरी आदत से छुटकारा पा सकते हैं।

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    बच्चों पर चिल्लाने से बिगड़ सकती है बात
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    प्लान करके चलें

    अगर आप वर्किंग वुमन और मॉम साथ में हैं तो ऐसा लगभग रोज होता होगा कि आप अपने ऑफिस के लिए तैयार होते होते अपने बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करती होंगी। ये बहुत मुश्किल काम है, खासतौर पर तब जब बच्चे छोटे हों। ऐसे में जब बच्चे आपके निर्देशों को मानकर ठीक से तैयार नहीं होते और साथ ही आप को देरी होने लगती है तो आप उनपर चिल्ला देती होंगी। इससे बचने का एक आसान तरीका ये है कि बच्चों के जागने से कुछ देर पहले उठें। अपनी तैयारी कर लें फिर बच्चों को तैयार होने में मदद करें। या फिर पहले बच्चों को तैयार करवा दें, उन्हें नाश्ता करने दें, और उस दौरान आप तैयार हो जाएं। प्लानिंग से आप इस दिक्कत का सामना कर पाएंगी।

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    प्लान करके चलें
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    रोल मॉडल बनें

    बच्चे आमतौर पर वही करते हैं, जो वो अपने माता-पिता से सीखते हैं। अगर वो आपसे चिल्लाने की आदत सीख कर, अपने से छोटे भाई या बहन को फिजूल में डांटें, उन पर बेबात चिल्लाए, तो बेशक आपको अच्छा नहीं लगेगा। जब आप उन पर छोटी-बड़ी बातों पर चिल्लाएंगे, उन्हें बुरी तरह से डाटेंगे तो वो आपसे यही सब सीख कर अपने से छोटों के साथ करेंगे। इस स्थिति से बचने के लिए अपने बच्चों के रोल मॉडल बनें। आप जैसा व्यवहार उनका देखना चाहते हैं, वैसा ही उनके साथ करें।

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    रोल मॉडल बनें
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    बच्चों के मुताबिक उम्मीदें लगाएं

    हर बच्चे की अपनी अलग क्षमता होती है। आप अपने बच्चे को उसका कमरा साफ करने के लिए कह दें, और वो इस काम को अच्छी तरह से न कर पाए। तो इसका मतलब ये नहीं कि वो आपकी बात नहीं मानता, हो सकता है कि वो उस लिहाज से छोटा हो, या इतना काम उसे न आता हो। बच्चे पर चिल्लाने की बजाय उन उम्मीदों पर ध्यान दें जो आप उनसे लगाते हैं। बच्चों को उनकी उम्र और क्षमता के हिसाब से जिम्मेदारियां दें, जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करें।

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    बच्चों के मुताबिक उम्मीदें लगाएं
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    ऊंची आवाज में बात न करें

    बच्चों से जब भी बात करें अपनी आवाज पर खास ध्यान दें। बच्चों से बहुत तेज़ आवाज में बात न करें। बच्चे तेज आवाज से डर जाते हैं और वो अपनी बात सामने नहीं रख पाते। ऐसे में हो सकता है कि आप उन्हें ऐसी बात पर डांट दें, जिसमें उनकी कोई गलती ही न हो। बेहतर रहेगा कि आप अपने गुस्से या नाराजगी पर नियंत्रण करके बच्चे से सामान्य होकर बात करें।

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    ऊंची आवाज में बात न करें
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    चेतावनी देकर छोड़ें

    अगर बच्चा कोई बड़ा नुकसान या गलती कर दे तो उसपर तुरंत चिल्लाएं नहीं। बच्चे को थोड़ा डांट समझा कर चेतावनी दे कर छोड़ दें। वैसे भी, आपके चिल्लाते रहने का कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। अगर आप उसे वॉर्निंग देंगे तो वो आगे से वैसी गलती करने से पहले सोचेगा।

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    चेतावनी देकर छोड़ें
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    टीचर की तरह सोचें

    टीचर बच्चों के गलत व्यवहार को व्यक्तिगत रूप से नहीं लेते, बल्कि उसे एक ऐसे मौके के रूप में लेते हैं जिसमें वो उन्हें कुछ समझा सकते हैं। इसलिए अगर आपके बच्चे ने आईस्क्रीम का खाली कंटेनर फ्रिज में छोड़ दिया हो या अपने स्कूल बैग को बिस्तर पर पटक दिया हो तो बजाय कि उस पर चिल्लाने के ये सोचे कि उसे क्या सिखाने की जरूरत है। चिल्लाने से महज आपसे बच्चे डरेंगे। और याद रखें आपको उन्हें डराना नहीं बल्कि सिखाना है।

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    टीचर की तरह सोचें
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    चिल्लाए नहीं समझाएं

    कई बार ऐसा होता है कि आप एक बात को चिल्ला चिल्ला कर 10 बार कहते हैं लेकिन तब भी आपका बच्चा आपकी बात नहीं सुनता। वो इसलिए, क्योंकि वो आपकी इस आदत का आदि हो चुका है। उसे आपके चिल्लाने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। इसलिए अगर आपको बच्चे को कुछ कहना हो तो बजाय कि दूर से चिल्लाते रहने के उसके पास जाएं, उसका ध्यान अपनी ओर खींचे, उससे आंखें मिलाएं और फिर मजबूती से अपनी बात सामने रखें। ऐसे में बच्चा आपको और आपकी बात को अनदेखा नहीं कर सकता।

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    चिल्लाए नहीं समझाएं
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