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रिश्तों में आपसी समस्याओं को सुलझाने के तरीके

By:Bharat Malhotra, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 27, 2013
अपने अहम को दरकिनार कर, एक-दूजे को अहमियत दीजिए। ऐसे कई तरीके हैं, जिन्‍हें अपनाकर आप अपने रिश्‍तों में आ रही घटास को दूर कर सकते हैं।
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    रिश्‍तों की परेशानियों को कैसे दूर किया जाए

    कई बार सब कुछ होते हुए भी रिश्‍तों की गाड़ी पटरी से उतरने लगती है। हमारा अहम इसकी सबसे बड़ी वजह होता है। रिश्‍तों में आत्‍म-सम्‍मान होना जरूरी है, लेकिन घमंड नहीं। अपने अहम को दरकिनार कर, एक-दूजे को अहमियत दीजिए। ऐसे कई तरीके हैं, जिन्‍हें अपनाकर आप अपने रिश्‍तों में आ रही तल्‍खी को दूर कर सकते हैं।

    रिश्‍तों की परेशानियों को कैसे दूर किया जाए
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    निजता का करें सम्‍मान

    मूल्‍यों की टकराहट, गलतफहमी और झगड़ों का कारण बनती है। कई बार आप दोनों एक-दूजे की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरते। आप अपने साथी से इस बारे में आराम से बात कर सकते हैं। इसके लिए टकराहट की जरूरत नहीं। इसे आराम से सुलझाया जा सकता है। आप उनके मूल्‍यों और आदतों के बारे में भी पूछ सकते हैं। और साथ ही उनकी आदतों का विश्‍लेषण कर भी आप इन बातों का अंदाजा लगा सकते हैं। अपनी और दूसरों की जरूरत को जानना बेकार के झगड़ों को टालने में मददगार हो सकता है।

    निजता का करें सम्‍मान
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    सुनने की आदत डालें

    हर व्‍यक्ति यह चाहता है कि उसे गंभीरता से लिया जाए और उसकी तारीफ हो। जब आप किसी की बात को ध्‍यान से बिना किसी रोक-टोक के सुनते हैं, तो इसका अर्थ यह है कि आप सामने वाले व्‍यक्ति के प्रति सम्‍मान दिखा रहे हैं। फिर चाहे वो कोई भी बात क्‍यों न हो। आपका साथी आपकी तवज्‍जो चाहता है। फिर चाहे वो अपनी सहेलियों अथवा दोस्‍तों के बारे में बात करे या फिर फैशन के बारे में। आपको सारी बातें ध्‍यान से सुननी चाहिए। उनके दिल की बातें सुन आपको उनके बारे में सही अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी।

    सुनने की आदत डालें
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    जरा नम हो जाइए

    मुस्‍कुराहट कई मुश्किलों को हल कर देती है। अपने साथी को अपनी जिंदादिली का अहसास दिलायें। मदद की पेशकश करते समय आपके अंदाज से गुरूर या अहसान नहीं झलकना चाहिए। उनकी प्रतिभा और उप‍लब्धियों का आदर करें। उनके प्रयासों की प्रशंसा और सराहना करें। आपकी आवाज, अंदाज और क्रियाकलापों से भी ये सब भावनायें जाहिर होनी चाहिए। एक पल के लिए ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आप उनकी बातों के प्रति गंभीर नहीं हैं।

    जरा नम हो जाइए
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    बहस न करें

    घमंड और अहम को जरा एक तरफ कर दें। बहस में व्‍यक्ति की कोशिश स्‍वयं को सही ठहराने की होती है। वह जोर जबरदस्‍ती से भी अपनी बात को सच साबित करना चा‍हता है। यही परिस्थिति असंतोष को जन्‍म देती है। इसमें किसी का लाभ नहीं होता। ठंडे दिमाग से दूसरे पक्ष की बात सुनें। चीजों को दूसरे कोण से देखने की भी कोशिश करें। आप पाएंगे कि अधिकतर झगड़े बेकार की पुरानी बातों पर ही होते हैं।

    बहस न करें
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    माफी मांगे और माफ करें

    माफ करने के लिए बड़ा दिल चाहिए। आपको सामने वाले की गलती माफ कर देनी चाहिए। आपको समझौता करने का भी प्रयास कर लेना चाहिए। लेकिन, अपनी ईमान से समझौता न करें। इसके अलावा अगर आपको लगे कि आपसे कोई गलती हो गई है, तो उसे स्‍वीकार करें और दिल से उसके लिए माफी मांगें। याद रखिये माफी मांगने से कोई छोटा नहीं हो जाता। अपनी गलती को दिल से स्‍वीकार कर लेना दरअसल आपकी सज्‍जनता को ही दर्शाता है।

    माफी मांगे और माफ करें
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    मांग या शर्त नहीं

    बहुत अधिक आशा न रखें। अपने साथी की मदद बिना किसी शर्त के करें। बदले में कोई उम्‍मीद या मांग न रखें। किसी की मदद करने के बाद जो खुशी मिलती है वह अतुल्‍य होती है। इसी खुशी का आनंद उठायें। मदद करते समय असंतोषी रवैया न दिखायें। दूसरों के साथ वैसा ही बर्ताव करें जैसा आप अपने साथ चाहते हैं।

    मांग या शर्त नहीं
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    अपनी भावनाओं का इजहार करें

    दिल में दर्द न रखें। अपने साथी से अपने दिल की बात कहें। उन्‍हें यह मालूम होना चाहिए कि आप क्‍या सोचते हैं। अपनी बात मुस्‍कुराते हुए कहें। बहुत ज्‍यादा इशारों में बातें न करें तो बेहतर। अपने विचार और भावनायें उनके साथ साझा करें। खुलकर बात करें, इससे उन्‍हें आपको समझने में आसानी होगी और साथ ही आपका रिश्‍ता भी प्रगाढ़ होगा।

    अपनी भावनाओं का इजहार करें
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    भरोसा कायम रखें

    भरोसा किसी भी रिश्‍ते की बुनियाद होता है। जिस रिश्‍ते में भरोसा नहीं होता, वह ज्‍यादा लंबे समय तक नहीं चल सकता। भरोसा करें और भरोसा कायम रखें। झूठे वादे न करें। दिए गए वचनों को किसी भी कीमत पर पूरा करें। भरोसा कायम होने के बाद आप एक स्‍वस्‍थ रिश्‍ता रख सकते हैं। और एक बार भरोसा कायम होने के बाद यह आपका उत्तरदायित्‍व बनता है कि आप उस भरोसे को कायम रखें। कभी भी अपने साथी के साथ विश्वासघात न करें।

    भरोसा कायम रखें
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    शारीरिक भाषा को समझें

    अपने साथी की शारीरिक और सांकेतिक भाषा पढ़ने का प्रयास करें। इससे आपको पता चल जाएगा कि आखिर वह क्‍या सोच रहा है। दोनों में एक दूसरे की बातों को सुनने और सम्‍मान देने की भावना होनी चाहिए। कई बार लफ्ज वो नहीं कह पाते जो इनसान अपने क्रियाकलापों से कह देता है। इन सूक्ष्‍म संकेंतों को पढ़ने और पकड़ने का प्रयास करें। रिश्‍ते के लिए यह बहुत जरूरी होता है।

    शारीरिक भाषा को समझें
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    कोई नहीं है परफेक्‍ट

    कभी भी अपने साथी को नीचा दिखाने की कोशिश न करें। आपसी बहस में लोग कई बार निजता का उल्‍लघंन करते हैं। या अपने साथी कि किसी कमजोरी को मुद्दा बनाकर उसे नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। याद रखें, दुनिया में सम्‍पूर्ण कोई नहीं है। हर व्‍यक्ति में कुछ न कुछ कमियां होती हैं, तो बेहतर होगा कि बहस के दौरान भी शालीनता की सीमायें न लांघी जाएं।

    कोई नहीं है परफेक्‍ट
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