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रिजल्‍ट के तनाव से बच्‍चों को कैसे रखें दूर

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 11, 2016
इस साल के दसवी-बारहवीं के रिजल्‍ट आने वाले हैं, दसवीं, बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के समय स्थिति कुछ ज्यादा ही नाजुक होती है, क्योंकि यह वहीं मोड़ होता है, जहां से बच्चे को अपनी आगे की पढ़ाई के लिए एक दिशा मिलती है। ऐसे में बच्‍चों के मन में रिजल्‍ट को लेकर बहुत तनाव रहता हैं। तो चलिये जानें कि कैसे बोर्ड रिजल्ट के तनाव से अपने बच्चे को बचाया जा सकता है।
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    रिजल्‍ट और बच्‍चों में तनाव

    मेरी पड़ोस में रहने वाला रोहन अपने बोर्ड के रिजल्‍ट को लेकर बहुत तनाव में हैं, क्‍योंकि उसके पैरेंट्स की इच्‍छा है कि उनका बच्‍चा परीक्षा में अव्‍वल आये और ज्‍यादा से ज्‍यादा स्‍कोर करें। हालांकि वह मानता हैं कि यह इच्‍छा उसके सुनहरे भविष्‍य के सपने से जुड़ी हैं और इस सपने का होना स्‍वाभाविक भी हैं। लेकिन इससे उसको अनावश्‍यक दबाव महसूस हो रहा है और अब जब उसका रिजल्‍ट आने वाला है तो उसका विवेक और सब्र खोने लगा है। यह समस्‍या न जाने रोहन जैसे कितने ही दसवीं और बाहरवीं के रिजल्‍ट को इंतजार करने वाले बच्‍चों की होगी। इसलिए यह समय बच्चों का साथ देने का होता है, न कि उन पर और ज्यादा दबाव बनाने का। तो चलिये जानें कि कैसे बोर्ड रिजल्ट के तनाव से अपने बच्चे को बचाया जा सकता है।

    रिजल्‍ट और बच्‍चों में तनाव
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    रिजल्‍ट के तनाव से बच्‍चों को दूर रखने के उपाय

    इस साल के दसवी-बारहवीं के रिजल्‍ट आने वाले हैं, दसवीं, बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के समय स्थिति कुछ ज्यादा ही नाजुक होती है, क्योंकि यह वहीं मोड़ होता है, जहां से बच्चे को अपनी आगे की पढ़ाई के लिए एक दिशा मिलती है। ऐसे में बच्‍चों के मन में रिजल्‍ट को लेकर बहुत तनाव रहता हैं। पेपर कितना भी अच्छा हुआ हो, लेकिन रिजल्ट का बेस्रबी और तनाव के साथ इंतजार करते हैं। कई बार बच्चे अच्छा रिजल्ट न आने की पीड़ा के साथ ही परिवार के सदस्यों की नाराजगी का सामना नहीं कर पाते। ये स्थिति उन्हें गहरी निराशा, डिप्रेशन, घर छोड़ कर कहीं चले जाने के फैसले ही नहीं बल्कि कई बार तो आत्महत्या के कगार तक ले जाती है। ऐसे में जरूरी है कि पैरेंट्स अपने बच्‍चे के साथ खड़े हो, बच्‍चे को मोटिवेट करें और इमोशनल सहारा दें।

    रिजल्‍ट के तनाव से बच्‍चों को दूर रखने के उपाय
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    बच्‍चों से बात करें

    जब रिजल्‍ट आने वाले हो तो पैरेंट्स को चाहिये कि वे बच्चे के कंधे पर हाथ रखें, उसके साथ खड़े हों और कहें कि कोई भी रिजल्‍ट जिंदगी से बड़ा नहीं होता, उठो और आगे के बारे में सोचो। ऐसे रास्तों के बारे में सोचो, जो तुम्हें तुम्‍हारे बेहतर कल की ओर ले जायें। हार के बाद भी जीत संभव है, बशर्ते अगर तुम दिमाग की परीक्षा से गुजरना न बंद करो।

     बच्‍चों से बात करें
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    बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी बनने से बचें

    पैरेंट्स और समाज द्वारा अनुचित रूप से बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाना आज के युवाओं में तनाव और उच्च रक्तचाप का कारण बनता हैं। इसलिए इन सब बातों से दूर अपने बच्चे की क्षमताओं व रुचियों को पहचानना बेहद जरूरी होता है।

    बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी बनने से बचें
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    समझदार बनें

    रिजल्‍ट के समय पैरेंट्स बेहद तनावपूर्ण स्थिति से गुजर रहे बच्‍चों पर दबाव बनाने की बजाय बच्‍चों को प्रोत्साहित करने, उनका समर्थन व सराहना करने तथा समझदार बनने की आवश्यकता होती है। बच्चों की परवाह करना जरूरी होता है, लेकिन जरूरी नहीं कि रिजल्ट के समय घर जंग के मैदान जैसा बना दिया जाए।

    समझदार बनें
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    अपने बच्‍चे को खुश रहने के लिए कहें

    अपने बच्‍चे में बोर्ड रिजल्‍ट के तनाव को कम करने के लिए रमा ने बहुत ही समझदारी दिखाई उसने अपने बच्‍चे से कहा कि वह उससे बहुत प्‍यार करती हैं। क्या नंबर आएंगे, इससे उसको कोई फर्क नहीं पड़ता। उसने अपने बच्चे को उस समय पर्याप्त समय दिया, उसके साथ गेम खेली और मूवी देखी और उससे अनौपचारिक रूप से बातचीत करते रहीं। इसके अलावा रमा ने अपने बच्‍चे को महान हस्तियों के उदाहरण देकर समझाया कि एक रिजल्ट अगर बुरा आ भी जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। इम्तिहान तो जिंदगीभर चलते रहेंगे। रमा की तरह आपको भी समझदारी से काम लेना हैं।

    अपने बच्‍चे को खुश रहने के लिए कहें
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    बच्चों को विश्वास में लें

    बोर्ड परीक्षाओं के रिजल्ट वाले दिन पैरेंट्स को अपने बच्चों का खास ख्याल रखने की जरुरत है। पिछले कुछ सालों में बोर्ड की परीक्षाओं में बेहतर परफॉर्म करने का दबाव काफी बढ़ा है, ऐसे में बच्चे रिजल्ट को लेकर बेहद तनाव में रहते हैं। उम्मीद के मुताबिक रिजल्ट न आने पर बच्चे अक्सर डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं, और गलत कदम उठा लेते हैं, ऐसे में पैरेंट्स के लिए जरुरी है कि बच्चों को विश्वास में लें कि रिजल्ट चाहे जो भी आये वह हमेशा उनके साथ हैं। बच्चों को यह समझाना भी बेहद जरूरी है कि खराब नतीजे को भविष्य में सुधारा जा सकता है।
    Image Source : Getty

    बच्चों को विश्वास में लें
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